पंचांग 2026

पंचांग 2026 · कार्तिक पूर्णिमा

गुरु नानक जयंती 2026

Guru Nanak Jayanti 2026

इक ओंकार। गिनती एक से शुरू होती है।

गुरु नानक जयंती 2026 में 24 नवंबर, मंगलवार को है। कार्तिक पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर, रात 11:43 से 24 नवंबर, रात 8:24 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

गुरु नानक जयंती का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

पूर्णिमा: उस रात पूरा चाँद

घास पर अभी ओस है।

गली के मोड़ से कुछ लोग आते दिखते हैं। धीरे धीरे, एक साथ गाते हुए।

यह प्रभात फेरी है, यानी सुबह की फेरी। गुरपुरब से दो दिन पहले से रोज़ निकलती है।

एक खिड़की खुलती है। एक बूढ़ी माँ हाथ जोड़ती हैं, फिर चुन्नी सिर पर ठीक करती हैं।

फेरी आगे बढ़ जाती है। आवाज़ देर तक गली में रहती है।

गुरु ग्रंथ साहिब खोलो, तो सबसे पहले एक ही अक्षर आता है: ੴ, इक ओंकार।

एक। सारी कथा वहीं से शुरू होती है।

2026 में कब

गुरु नानक जयंती 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़24 नवंबर, मंगलवार

तिथिकार्तिक पूर्णिमा23 नवंबर, रात 11:43 से 24 नवंबर, रात 8:24 तक

नक्षत्रकृत्तिकासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:51

सूर्यास्तशाम 5:25

चंद्रोदयशाम 4:57

अगले बरस गुरु नानक जयंती 14 नवंबर 2027, रविवार को है: गुरु नानक जयंती 2027, तारीख़ और मुहूर्त

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शुभकामना

गुरु नानक जयंती का शुभकामना कार्ड

गुरु नानक जयंती का शुभकामना कार्ड: प्रकाश पर्व की लख लख बधाइयाँ, मनु विश्रांति

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पहचान

गुरु नानक जयंती क्या है

गुरु नानक जयंती सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी, का प्रकाश पर्व है, यानी उनके जन्म का गुरपुरब। SGPC के अनुसार उनका गुरपुरब कत्तक पूरनमाशी को आता है, यानी कार्तिक महीने की पूर्णिमा को। SGPC अपने पन्ने पर उनके जन्म की तारीख़ 15 अप्रैल 1469 भी लिखती है, पर गुरपुरब की परंपरा कत्तक की पूरनमाशी को ही चलती है। उनका जन्म राय भोई की तलवंडी में हुआ था, जो आज पाकिस्तान के शेख़ूपुरा ज़िले में है और ननकाना साहिब कहलाती है। तैयारी दो दिन पहले से शुरू हो जाती है: प्रभात फेरी, अखंड पाठ, फिर नगर कीर्तन, और गुरपुरब के दिन दीवान और लंगर।

कथा

गुरु नानक जयंती की कथा

सिख परंपरा में आता है कि 1469 में राय भोई की तलवंडी में मेहता कालू और माता तृप्ता के घर एक बालक हुआ। नाम रखा गया नानक। बड़ी बहन बेबे नानकी अपने छोटे भाई को बहुत लाड़ करती थीं। ननकाना साहिब में बचपन की जगहें आज भी याद की जाती हैं: जिस खेत में वे बच्चों के साथ खेलते थे, वहाँ गुरुद्वारा बाल लीला है, और जहाँ वे पढ़ने गए, वहाँ गुरुद्वारा पट्टी साहिब।

फिर वह दिन आया जिसकी कथा सिख घरों में सुनाई जाती है। नानक वेईं नदी में नहाने उतरे, और बाहर नहीं आए। एक दिन बीता, दो दिन, तीन दिन। सिख परंपरा कहती है कि उन तीन दिनों में उन्होंने रब की पुकार सुनी। जब वे लौटे, तो उनके पहले शब्द थे: न कोई हिंदू, न कोई मुसलमान। माना जाता है कि मूल मंत्र भी उन्होंने इसी जागने के बाद पहली बार कहा, लगभग तीस बरस की उमर में।

यही मूल मंत्र आज गुरु ग्रंथ साहिब की सबसे पहली बाणी है, जपुजी साहिब से ठीक पहले: ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ ਅਕਾਲ ਮੂਰਤਿ ਅਜੂਨੀ ਸੈਭੰ ਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ देवनागरी में: इक ओंकार सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुर प्रसादि। (गुरु ग्रंथ साहिब, मूल मंत्र) इसका अर्थ: एक ही है, जो सब कुछ का मूल है और सब में है। उसका नाम सच है। वही सब बनाने वाला है। उसे किसी का डर नहीं, किसी से बैर नहीं। उसका रूप समय से परे है, वह जन्म में नहीं आता, अपने आप से है। और वह गुरु की कृपा से मिलता है।

फिर गुरु नानक देव जी ने चार बड़ी यात्राएँ कीं, जिन्हें उदासियाँ कहते हैं। वे पैदल दूर दूर तक गए। आख़िर में रावी के किनारे उन्होंने करतारपुर बसाया, यानी करतार का, बनाने वाले का नगर। वहीं उन्होंने लंगर शुरू किया, जहाँ हर कोई एक साथ, एक पंगत में खाता है।

कहाँ कैसे

गुरु नानक जयंती: कहाँ और कैसे

  • ननकाना साहिब, पाकिस्तान

    गुरुद्वारा जनम अस्थान यहाँ का सबसे बड़ा गुरुद्वारा है, उस जगह जहाँ गुरु जी जन्मे। भारत से श्रद्धालुओं के जत्थे पाकिस्तान सरकार की ख़ास इजाज़त लेकर समय समय पर वहाँ पहुँचते हैं।

  • मोहल्ले और गलियाँ

    गुरपुरब से दो दिन पहले से, सुबह सुबह, प्रभात फेरियाँ गुरुद्वारों से निकलकर मोहल्लों में घूमती हैं, और संगत गुरु की बड़ाई के शबद गाती चलती है।

  • पंजाब और देश भर के गुरुद्वारे

    अखंड पाठ, नगर कीर्तन, तड़के आसा दी वार, कथा, कड़ाह प्रसाद और लंगर, और देर रात तक कीर्तन।

  • गोवा

    यहाँ की सिख संगत भी इसी रीत से गुरपुरब रखती है, और आने वालों को प्रसाद बाँटा जाता है।

रीत

गुरु नानक जयंती के दिन क्या करते हैं

  1. गुरपुरब से दो दिन पहले से सुबह सुबह प्रभात फेरी निकलती है, जिसमें संगत मोहल्लों में शबद गाती हुई चलती है।
  2. दो दिन पहले गुरुद्वारे में अखंड पाठ शुरू होता है: लगभग अड़तालीस घंटे, गुरु ग्रंथ साहिब का बिना रुके पाठ।
  3. गुरपुरब से एक दिन पहले नगर कीर्तन निकलता है, आगे पंज प्यारे और उनके पीछे पालकी में गुरु ग्रंथ साहिब।
  4. गुरपुरब की सुबह, अँधेरे में ही, आसा दी वार के कीर्तन से दीवान शुरू होता है।
  5. फिर कथा होती है, और सिख इतिहास की बात सुनाई जाती है।
  6. अरदास के बाद कड़ाह प्रसाद बँटता है, और फिर लंगर, जिसमें हर कोई, बिना किसी भेद के, साथ खाता है।
  7. कीर्तन देर रात तक चलता है।

रसोई

गुरु नानक जयंती का खाना

  • कड़ाह प्रसाद अरदास के बाद बँटने वाला मीठा हलवा।
  • लंगर गुरु नानक देव जी की करतारपुर में शुरू की हुई साझी रसोई, जिसमें सब एक साथ खाते हैं।

सवाल जवाब

गुरु नानक जयंती 2026: पूछे जाने वाले सवाल

गुरु नानक जयंती 2026 कब है?

गुरु नानक जयंती 2026 में 24 नवंबर, मंगलवार को है। कार्तिक पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर, रात 11:43 से 24 नवंबर, रात 8:24 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

गुरु नानक देव जी का जन्म कहाँ हुआ था?

राय भोई की तलवंडी में, जो आज पाकिस्तान में ननकाना साहिब कहलाती है। वहाँ जन्म की जगह पर गुरुद्वारा जनम अस्थान है।

गुरु नानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा को क्यों होती है?

SGPC के अनुसार गुरु नानक देव जी का गुरपुरब कत्तक पूरनमाशी, यानी कार्तिक की पूर्णिमा, को आता है, और परंपरा इसी दिन को रखती है। SGPC अपने पन्ने पर जन्म की तारीख़ 15 अप्रैल 1469 भी लिखती है।

मूल मंत्र क्या है?

गुरु ग्रंथ साहिब की सबसे पहली बाणी, जो इक ओंकार से शुरू होती है। इसमें बताया गया है कि रब एक है, उसका नाम सच है, वह सब बनाने वाला है, निडर है, बिना बैर का है, समय और जन्म से परे है, और गुरु की कृपा से मिलता है।

प्रभात फेरी क्या होती है?

गुरपुरब से दो दिन पहले से रोज़ सुबह निकलने वाली फेरी, जिसमें संगत गुरुद्वारे से निकलकर मोहल्लों में शबद गाती हुई चलती है।

अखंड पाठ कितने समय का होता है?

लगभग अड़तालीस घंटे का। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब का शुरू से आख़िर तक, बिना रुके पाठ होता है, और यह गुरपुरब से दो दिन पहले शुरू होता है।

गुरु नानक देव जी ने लंगर कहाँ शुरू किया?

करतारपुर में, जिसे उन्होंने रावी नदी के किनारे बसाया था।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Gurpurbs, SGPCकत्तक पूरनमाशी, 15 अप्रैल 1469, तलवंडी और ननकाना साहिब, अखंड पाठ, नगर कीर्तन, आसा दी वार, कथा, लंगर
  2. Guru Nanak, SikhiWikiमाता पिता, बेबे नानकी, वेईं नदी के तीन दिन, पहले शब्द, उदासियाँ, करतारपुर और लंगर
  3. Mool Mantar, SikhiWikiमूल मंत्र का गुरमुखी पाठ, हर शब्द का अर्थ, गुरु ग्रंथ साहिब में पहली जगह, तीस बरस की उमर
  4. Japji Sahib, SikhiWikiजपुजी साहिब और मूल मंत्र का क्रम
  5. Nankana Sahib, SikhiWikiगुरुद्वारा जनम अस्थान, बाल लीला, पट्टी साहिब, भारत से जत्थे
  6. Celebrating the Gurpurab on Guru Nanak Jayanti, The Goanप्रभात फेरी, अड़तालीस घंटे का अखंड पाठ, नगर कीर्तन, लंगर, गोवा की संगत
  7. Guru Nanak Jayanti: Date, history, The Statesmanदो दिन पहले से प्रभात फेरी, नगर कीर्तन, कार्तिक पूर्णिमा, ननकाना साहिब

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।