पंचांग 2026 · हर महीने
अमावस्या 2026
Amavasya 2026
आसमान ख़ाली है। अँजुली भरी है।
अक्टूबर से दिसंबर 2026 में अमावस्या 3 बार आती है, हर महीने के आख़िरी दिन, कृष्ण पक्ष के बाद: 10 अक्टूबर, शनिवार, 9 नवंबर, सोमवार और 8 दिसंबर, मंगलवार। हर तारीख़ की तिथि, तर्पण का कुतुप मुहूर्त और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।
आसमान में आज कुछ नहीं। न चाँद, न उसकी कोई फाँक।
घाट की सीढ़ियों पर लोग अँधेरे में ही उतर रहे हैं। पाँव टटोलकर, एक एक सीढ़ी।
एक आदमी कमर तक पानी में खड़ा है। उँगली में कुश की अँगूठी है।
उसकी अँजुली के पानी में काले तिल तैर रहे हैं।
वह एक एक नाम लेता है। पिता का। दादा का। फिर उनके पिता का। और पानी छोड़ देता है।
ऊपर पीपल के नीचे एक औरत तने के चारों ओर घूम रही है। हर फेरे पर कच्चे सूत की एक और लपेट।
आज की रात देखने की नहीं, याद करने की रात है।
एक नदी किनारे, वाल्मीकि कहते हैं, वन में रहते एक राजकुमार ने भी ऐसे ही अँजुली भरी थी। अपने पिता के लिए।
2026 में कब
अमावस्या 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
अगले बरस की हर तारीख़: अमावस्या 2027
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
फ़ोन पर Google का पन्ना ठीक से न खुले, तो यही बटन कंप्यूटर पर दबाइए। जुड़ते ही यह फ़ोन में भी दिखेगा।
जोड़ते समय “Remove Alerts” बंद कर दें (टिक हटा दें), तो बड़े त्योहारों की सुबह 7 बजे याद भी आएगी कि अपनों को कार्ड भेजना है।
- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।
पहचान
अमावस्या क्या है
अमावस्या चाँद के कृष्ण पक्ष का आख़िरी दिन है, जिस रात चाँद बिल्कुल नहीं दिखता; इसीलिए इसे दर्श अमावस्या भी कहते हैं। दक्षिण और पश्चिम भारत की अमांत गिनती में हर महीना इसी दिन पूरा होता है। यह दिन पितरों का है: पवित्र नदी में स्नान, पितरों के नाम पर दान, और तिल मिले जल से उनका तर्पण, यानी उन्हें जल देना। स्नान और दान उस दिन होता है जिस दिन सूरज निकलते समय अमावस्या तिथि हो, यानी उदया तिथि में। पितरों के काम का हिसाब अलग चलता है, इसलिए कभी कभी पंचांग पितृ कार्य के लिए एक दिन और स्नान दान के लिए अगला दिन बताते हैं। अमावस्या जिस वार को पड़े, उससे भी उसका नाम बनता है: सोमवार को सोमवती, मंगलवार को भौमवती, और शनिवार को शनि अमावस्या। कई महीनों की अमावस्या का अपना नाम है, जैसे मौनी, हरियाली, पिठोरी और सर्वपितृ। साल में बारह अमावस्या आती हैं, और अधिक मास वाले बरस में तेरह। इस पन्ने की सूची जनवरी से दिसंबर तक चलती है, इसलिए उसमें तेरह नाम हैं: पौष की अमावस्या साल के दोनों सिरों पर आती है। हर तारीख़ की तिथि और सूरज निकलने की घड़ी यह पन्ना ऊपर अपने आप निकालता है।
पूरी सूची
अमावस्या 2026: हर तारीख़
हर तारीख़, उस दिन की तिथि कब से कब तक, तर्पण का कुतुप मुहूर्त का समय, और उस दिन की अपनी बात।
10अक्टूबर
सर्वपितृ अमावस्या
आश्विन अमावस्या · तिथि 9 अक्टूबर, रात 9:36 से 10 अक्टूबर, रात 9:20 तक
पितृ पक्ष यहीं पूरा होता है। यह सब पुरखों के लिए है, चाहे वे किसी भी तिथि को गए हों, और जिसका श्राद्ध पखवाड़े में छूट गया, वह आज कर सकता है। बंगाल में यही महालया है, और इसके साथ शारदीय नवरात्रि की दहलीज़ आती है; महालया और नवरात्रि, दोनों के अपने पन्ने हैं।
तर्पण का कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तक
9नवंबर
दीपावली
कार्तिक अमावस्या · तिथि 8 नवंबर, सुबह 11:28 से 9 नवंबर, दोपहर 12:32 तक
कार्तिक की अमावस्या की रात दीपावली है, जिसका अपना पन्ना है: बिना चाँद की रात, और घर घर दीये। अमांत गिनती में यही आश्विन की अमावस्या है।
तर्पण का कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:27 तक
8दिसंबर
मार्गशीर्ष अमावस्या
मार्गशीर्ष अमावस्या · तिथि 8 दिसंबर, सुबह 4:13 से 9 दिसंबर, सुबह 6:22 तक
दीपावली के बाद की पहली अमावस्या, अगहन की। अमांत गिनती में कार्तिक का महीना इसी दिन पूरा होता है।
तर्पण का कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:52 से दोपहर 12:34 तक
कथा
अमावस्या की कथा
अमावस्या की कोई एक कथा नहीं है, जैसी एकादशी की है। यह दिन पितरों का है, और इसके काम, स्नान, दान और तर्पण, किसी कथा से नहीं, याद से चलते हैं। पर जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है, तब घरों में एक लोक कथा पढ़ी जाती है, सोमवती अमावस्या की कथा। यह किसी पुराण से नहीं, लोक से आई है, और पंचांगों में इसे इस तरह कहा जाता है।
एक ग़रीब बनिये के सात बेटे थे, सातों ब्याहे हुए, और एक बेटी, जिसका ब्याह अभी बाक़ी था। एक दिन एक जानकार राहगीर उनके घर आया। उसने लड़की के लक्षण देखे और माँ बाप से कहा: इसका सुहाग थोड़े दिन का है, ब्याह के कुछ ही समय बाद यह विधवा हो जाएगी। माँ बाप घबरा गए और उपाय पूछा। राहगीर ने कहा: नदी के उस पार एक धोबिन रहती है, जो सच्ची पतिव्रता है, यानी अपने पति को ही सब कुछ मानती है। यह लड़की मन लगाकर उसकी सेवा करे, उसका आशीर्वाद पाए, और किसी सोमवती अमावस्या को पीपल का व्रत रखे, तो जो लिखा है वह भी बदल सकता है।
उस दिन से लड़की रोज़ नदी पार करके धोबिन के घर जाने लगी। वह उसका काम करती, उसका पानी भरती, और बदले में कुछ नहीं माँगती। दिन बीतते गए। आख़िर धोबिन का मन पसीज गया, और उसने अपनी माँग का सिंदूर लड़की को आशीर्वाद में दे दिया।
फिर सोमवती अमावस्या आई। लड़की ने पीपल के पेड़ की एक सौ आठ परिक्रमा की, और हर फेरे में तने पर कच्चा सूत लपेटा। उसके सुहाग पर जो संकट था, वह टल गया। कथा कहने वाले कहते हैं कि एक औरत का सच्चा पतिव्रत और दूसरी की सेवा और व्रत, सब मिलकर उस बात को भी पलट देते हैं जिसे भाग्य मान लिया गया था। इसीलिए सोमवती अमावस्या पर सुहागिनें आज भी पीपल को कच्चे सूत से बाँधती हैं, और बहुत सी व्रत खोलने से पहले यही कथा पढ़ती या सुनती हैं।
व्रत
अमावस्या का व्रत कैसे रखें
- सूरज निकलने से पहले उठकर संकल्प लिया जाता है, यानी मन में पक्का किया जाता है कि आज का दिन किस तरह निभेगा।
- सुबह का समय पितरों का है; उनका तर्पण, श्राद्ध और दान इसी समय होता है।
- बहुत से लोग पितरों की शांति के लिए दिन भर उपवास रखते हैं, जो जितना निभा सके।
- सोमवती अमावस्या पर सुहागिनें पति और परिवार की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं, जो कथा पढ़ने या सुनने के बाद ही खुलता है।
- पिठोरी अमावस्या पर माएँ बच्चों के लिए उपवास रखती हैं और परिवार के साथ पिठोरी देवी की पूजा करती हैं।
पारण: व्रत कैसे खोलें
अमावस्या अपने आप में किसी बँधे हुए व्रत का दिन नहीं है, जैसे एकादशी है। इसका असली काम स्नान, दान और पितरों का तर्पण है, और वह सुबह, उदया अमावस्या में, पूरा होता है। जो लोग पितरों के लिए उपवास रखते हैं, उनके लिए पंचांगों में पारण की कोई अलग घड़ी नहीं मिलती; दिन का काम पूरा करके वे घर की रीत से व्रत खोलते हैं। सोमवती अमावस्या पर सुहागिनें पीपल की पूजा और परिक्रमा के बाद कथा पढ़ या सुनकर व्रत खोलती हैं। सूरज निकलने की घड़ी, जिससे स्नान दान का दिन तय होता है, यह पन्ना हर तारीख़ के लिए ऊपर छापता है।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में अमावस्या
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
वाल्मीकि रामायण
संस्कृत · Valmiki Ramayana
पितरों को जल देने की रीत रामकथा में भी है। वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड के एक सौ तीसरे सर्ग में राम वन में, मंदाकिनी नदी में उतरकर, पिता दशरथ को जल देते हैं; सीता आगे चलती हैं, लक्ष्मण साथ हैं, और सुमंत्र हाथ पकड़कर राम को घाट तक उतारते हैं। भाई जल छिड़कते हैं और कहते हैं, पिता, यह आपका हो। फिर राम अँजुली में जल लेकर दक्षिण की ओर मुँह करते हैं: 'एतत्ते राजशार्दूल विमलं तोयमक्षयम्', यानी राजाओं में बाघ जैसे पिता, यह निर्मल जल आपके लिए है, जो कभी न घटे। किनारे लौटकर वे कुश के आसन पर इंगुदी और बेर के गूदे का पिंड रखते हैं और रोते हुए कहते हैं: 'यदन्नः पुरुषो भवति तदन्नास्तस्य देवताः', यानी आदमी जो ख़ुद खाता है, वही उसके देवता भी खाते हैं। वन में रहता बेटा पिता को वही देता है जो उसके अपने पास है; अमावस्या की अँजुली भी यही कहती है।
कहाँ कैसे
अमावस्या कहाँ कैसे मनाया जाता है
कोलकाता और बंगाल
सर्वपितृ अमावस्या बंगाल में महालया है, और यहीं से दुर्गा पूजा की गिनती शुरू होती है। लोग भोर में उठकर देवी माहात्म्य के श्लोक पढ़ते हैं, और मान्यता है कि इसी दिन देवी दुर्गा धरती पर उतरती हैं।
तारापीठ, बीरभूम
भादों की अमावस्या बंगाल और पूर्वी भारत में कौशिकी अमावस्या भी है, और इस दिन तारापीठ में तारा माँ की ख़ास पूजा होती है। कौशिकी वह देवी हैं जो, कथा के अनुसार, शुंभ और निशुंभ को मारने के लिए पार्वती के कोश, यानी देह के आवरण, से निकलीं।
उत्तर और मध्य भारत
भादों की इसी अमावस्या को पिठोरी अमावस्या कहते हैं। माएँ आटे या मिट्टी से पिठोरी देवी बनाकर पूजती हैं और बच्चों की सेहत और लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
किसानों के गाँव
आषाढ़ की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। बरसात आने वाली होती है, इसलिए किसान इस दिन हल और खेती के औज़ार पूजते हैं और फ़सल के हरे भरे रहने की कामना करते हैं।
रीत
अमावस्या के दिन क्या करते हैं
- किसी पवित्र नदी, तालाब या कुंड में स्नान होता है; बहुत से लोग गंगा में नहाने जाते हैं।
- नहाने के बाद ताँबे के लोटे से सूरज को जल चढ़ाया जाता है, जिसमें लाल चंदन और लाल फूल डाले जाते हैं।
- उँगली में कुश की पवित्री, यानी कुश घास की अँगूठी, पहनकर तिल मिले जल से पितरों का तर्पण किया जाता है।
- पितरों के नाम पर दान होता है, और ग़रीबों को अपनी ताक़त के हिसाब से दक्षिणा दी जाती है।
- काली चींटियों को शक्कर मिला आटा खिलाया जाता है।
- सोमवती अमावस्या पर सुहागिनें पीपल की जड़ में जल, कच्चा दूध, फूल और चंदन चढ़ाती हैं, दीया जलाती हैं, और कच्चा सूत लपेटते हुए एक सौ आठ परिक्रमा करती हैं।
- हरियाली अमावस्या पर शिव या विष्णु की पूजा बेलपत्र, तुलसी, फल और फूल से होती है, और पेड़ लगाए जाते हैं।
सवाल जवाब
अमावस्या 2026: पूछे जाने वाले सवाल
अमावस्या अक्टूबर से दिसंबर 2026 में कब कब है?
अक्टूबर से दिसंबर 2026 में अमावस्या 3 बार आती है, हर महीने के आख़िरी दिन, कृष्ण पक्ष के बाद: 10 अक्टूबर, शनिवार, 9 नवंबर, सोमवार और 8 दिसंबर, मंगलवार। हर तारीख़ की तिथि, तर्पण का कुतुप मुहूर्त और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।
अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए?
भोर में किसी पवित्र नदी या साफ़ पानी में स्नान, सूरज को जल, तिल मिले जल से पितरों का तर्पण, और उनके नाम पर दान। शिव और विष्णु की पूजा भी इस दिन पुण्य की मानी जाती है।
सोमवती अमावस्या क्या होती है?
जो अमावस्या सोमवार को पड़े, उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। सोमवार शिव का दिन है, इसलिए इस दिन पितरों के काम के साथ शिव पार्वती की पूजा होती है, और सुहागिनें पीपल की परिक्रमा करती हैं। यह हर बरस बराबर नहीं आती: किसी बरस एक भी नहीं, किसी में दो या तीन।
पितरों का तर्पण और स्नान दान अलग अलग दिन क्यों बताए जाते हैं?
स्नान दान उदया तिथि से होता है, यानी जिस सुबह सूरज निकलते समय अमावस्या हो। पितरों के काम का हिसाब अलग चलता है, इसलिए जब अमावस्या दिन के बीच में शुरू हो, तो पंचांग कई बार पितृ कार्य के लिए पहला दिन और स्नान दान के लिए अगला दिन बताते हैं। एक बरस हलहारिणी अमावस्या पर ठीक ऐसा ही हुआ था।
शनि अमावस्या और भौमवती अमावस्या क्या हैं?
शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या शनि अमावस्या कहलाती है, और मंगलवार वाली भौमवती। भौमवती पर हनुमान जी की पूजा ख़ास मानी जाती है।
क्या अमावस्या पर व्रत रखना ज़रूरी है?
नहीं। अमावस्या का मुख्य काम स्नान, दान और तर्पण है। उपवास बहुत से लोग अपनी इच्छा से पितरों की शांति के लिए रखते हैं, और सोमवती और पिठोरी जैसी अमावस्याओं के अपने व्रत हैं।
साल में कितनी अमावस्या होती हैं?
हर महीने एक, यानी बारह। जिस बरस अधिक मास जुड़ता है, उसमें तेरह हो जाती हैं।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- अमावस्या (Bhakti Bharat)साल में बारह या तेरह, दर्श अमावस्या, सोमवती, शनि, भौमवती और हनुमान पूजा, हरियाली, पिठोरी, कुशोत्पाटिनी, मौनी, सर्वपितृ, दीवाली, पितरों के लिए स्नान दान
- हलहारिणी अमावस्या, पितृ कार्य और स्नान दान अलग दिन (Amar Ujala)हलहारिणी नाम और हल पूजा, सूरज को लाल चंदन वाला जल, कुश की पवित्री और तिल से तर्पण, चींटियों को आटा, उपवास, पितृ कार्य और स्नान दान के दो दिन
- सोमवती अमावस्या (PanchangBodh, हिंदी)सोमवार की अमावस्या, शिव पार्वती, पीपल की एक सौ आठ परिक्रमा और कच्चा सूत, जड़ में चढ़ने वाली चीज़ें, सुहागिनों का व्रत, बरस में शून्य से तीन
- Somvati Amavasya (PanchangBodh)सोमवती की कथा: बनिये की बेटी, राहगीर की बात, धोबिन की सेवा, सिंदूर, पीपल का व्रत
- Pithori Amavasya and Kaushiki Amavasya (Free Press Journal)पिठोरी देवी, माओं का व्रत, कुशोत्पाटिनी, कौशिकी अमावस्या और तारापीठ
- हरियाली अमावस्या (Shubh Panchang)सावन की अमावस्या, पेड़ लगाना, शिव विष्णु की पूजा, सुबह का तर्पण
- Pitru Paksha (Wikipedia)सर्वपितृ या महालया अमावस्या, सब पुरखों के लिए, छूटा श्राद्ध, बंगाल में देवी का उतरना और भोर के श्लोक
- Valmiki Ramayana, Ayodhya Kanda, Sarga 103 (valmikiramayan.net)मंदाकिनी में दशरथ को जल, दक्षिण की ओर मुँह, इंगुदी का पिंड, श्लोक 27 और 30
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।