पंचांग 2026 · कार्तिक शुक्ल एकादशी
इगास बग्वाल 2026
Igas Bagwal 2026
दीवाली ग्यारह दिन पहले बीत गई। पहाड़ पर वह आज आई है।
इगास बग्वाल 2026 में 20 नवंबर, शुक्रवार को है। कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि 20 नवंबर, सुबह 7:16 से 21 नवंबर, सुबह 6:32 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
हवा में आग का एक गोल बनता है। टूटता है। फिर बनता है।
खेत में कोई चीड़ की सूखी लकड़ियों का गट्ठर सिर के ऊपर घुमा रहा है। रस्सी से बँधा, जलता हुआ।
ऊपर धार पर अँधेरा है, और बस तारे।
ढोल बजता है। घेरा बनता है। गीत उठता है।
गोठ में, यानी पशुओं के घर में, गायों के सींगों पर तेल चमक रहा है।
नीचे के शहरों में दीवाली को ग्यारह दिन बीत गए हैं।
कहते हैं, ख़बर को पहाड़ चढ़ने में वक़्त लगता है। पर जब पहुँचती है, तो हर गाँव उसे अपनी आग से दोबारा कहता है।
2026 में कब
इगास बग्वाल 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़20 नवंबर, शुक्रवार
तिथिकार्तिक शुक्ल एकादशी20 नवंबर, सुबह 7:16 से 21 नवंबर, सुबह 6:32 तक
नक्षत्रपूर्वा भाद्रपदसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:48
सूर्यास्तशाम 5:26
चंद्रोदयदोपहर 2:18
अगले बरस इगास बग्वाल 10 नवंबर 2027, बुधवार को है: इगास बग्वाल 2027, तारीख़ और मुहूर्त
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सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।
शुभकामना
इगास बग्वाल का शुभकामना कार्ड

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पहचान
इगास बग्वाल क्या है
इगास बग्वाल गढ़वाल की अपनी दीवाली है, जो बड़ी दीवाली के ग्यारह दिन बाद, कार्तिक के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। इगास का मतलब है ग्यारहवाँ दिन, यानी शुक्ल पक्ष की एकादशी, और बग्वाल गढ़वाली और कुमाऊँनी में रोशनी के उस त्योहार का नाम है जो दीवाली जैसा है। इसे हरबोधनी एकादशी भी कहते हैं; मान्यता है कि इसी दिन विष्णु के चार महीने के विश्राम का अंत होता है। कई लोग इसे बूढ़ी दीवाली भी कहते हैं, पर कुछ जगह बूढ़ी दीवाली उस बग्वाल को कहते हैं जो इसके बाद मंगसीर महीने में आती है। पूरे उत्तराखंड में, ख़ासकर गढ़वाल के गाँवों में, यह दिन रखा जाता है, और अब शहरों में और परदेस में बसे पहाड़ी भी इसे रखते हैं।
कथा
इगास बग्वाल की कथा
इगास के पीछे लोक में दो कथाएँ कही जाती हैं, और दोनों ही लोक की हैं, किसी पोथी की नहीं।
पहली कथा राम की है। लोक में कहते हैं कि जब राम लंका जीतकर अयोध्या लौटे, तो पहाड़ के दूर के गाँवों तक यह ख़बर ग्यारह दिन देर से पहुँची, क्योंकि रास्ते कठिन थे और ख़बर के साधन कम। जिस दिन ख़बर पहुँची, उसी दिन गाँवों ने अपनी दीवाली मनाई। यही दिन इगास बना। लोक यह भी कहता है कि कुछ इलाक़ों तक ख़बर महीने भर देर से पहुँची, और वहाँ मंगसीर महीने में बग्वाल होती है।
दूसरी कथा एक योद्धा की है। लगभग चार सौ बरस पहले गढ़वाल के राजा महिपत शाह के समय तिब्बत की ओर से आए लुटेरे इलाक़े को लूट रहे थे। राजा ने माधो सिंह भंडारी को सेना देकर भेजा; कुछ कथाओं में उनके साथ लोदी रिखोला का नाम भी आता है। दीवाली आई, पर सेना की कोई ख़बर नहीं आई। गाँव वालों को डर था कि सेना लौटेगी भी या नहीं, इसलिए उन्होंने दीवाली नहीं मनाई।
फिर ग्यारह दिन बाद, कार्तिक शुक्ल एकादशी को, माधो सिंह भंडारी की सेना जीतकर लौटी। उस दिन गाँवों ने अपनी रुकी हुई दीवाली मनाई, और वही दिन इगास बन गया। दोनों कथाओं में एक ही बात है: रोशनी तब जलती है, जब अपनों की ख़बर पहुँचती है।
कहाँ कैसे
इगास बग्वाल कहाँ कैसे मनाया जाता है
गढ़वाल के गाँव
साँझ होते ही लोग गाँव के खुले खेत में जमा होते हैं, भैलो जलाकर घुमाते हैं, और ढोल दमाऊँ पर देर रात तक नाचते गाते हैं। दमाऊँ ढोल के साथ बजने वाला पहाड़ का एक छोटा नगाड़ा है।
मंगसीर बग्वाल वाले इलाक़े
इगास के बाद मंगसीर महीने में एक और बग्वाल आती है, जिसे मंगसीर बग्वाल या मंगसीर दीवाली कहते हैं; इसके साथ दीवाली का महीने भर का सिलसिला पूरा होता है।
शहर और परदेस
शहरों में और विदेश तक बसे पहाड़ी लोग भी इस दिन जमा होकर भैलो, गीत और पहाड़ी पकवानों के साथ इगास रखते हैं।
रीत
इगास बग्वाल के दिन क्या करते हैं
- चीड़ की सूखी लकड़ियाँ, कहीं साथ में घास या तिल और भंगजीरे के डंठल, रस्सी से बाँधकर भैलो बनाते हैं, यानी बड़ी मशाल। कुछ जगह इसे अंधया भी कहते हैं।
- साँझ को भैलो जलाकर खुले खेत में लाते हैं, और लोग घेरे में नाचते गाते हुए उसे अपने चारों ओर और सिर के ऊपर घुमाते हैं।
- मान्यता है कि भैलो का घूमना अँधेरे और बुरी चीज़ों को दूर करता है और लक्ष्मी का आशीर्वाद बुलाता है।
- गाय बैलों को नहलाते हैं, सींगों पर सरसों का तेल लगाते हैं, और हल्दी और माला से सजाते हैं।
- पशुओं को आज ख़ास खाना मिलता है: कहीं चिवड़ा, दूध और घी, कहीं चावल, झंगोरे और मंडुवे से बना भोजन। झंगोरा और मंडुवा पहाड़ के मोटे अनाज हैं।
- घर घर अरसे, पूरी और पकौड़ी बनती हैं और पड़ोसियों और रिश्तेदारों में बाँटी जाती हैं।
- गाँवों में मेले लगते हैं और ढोल दमाऊँ के साथ लोक नाच होते हैं।
रसोई
इगास बग्वाल का खाना
- अरसा चावल के आटे से बनी पहाड़ की मिठाई।
- सिंगल गेहूँ के आटे और दही से बनी मिठाई।
- पूरी और पकौड़ी भैलो की आग के पास मिल बाँटकर खाई जाती हैं।
सवाल जवाब
इगास बग्वाल 2026: पूछे जाने वाले सवाल
इगास बग्वाल 2026 कब है?
इगास बग्वाल 2026 में 20 नवंबर, शुक्रवार को है। कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि 20 नवंबर, सुबह 7:16 से 21 नवंबर, सुबह 6:32 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
इगास बग्वाल क्या है?
इगास बग्वाल उत्तराखंड, ख़ासकर गढ़वाल की दीवाली है, जो बड़ी दीवाली के ग्यारह दिन बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी को आती है। इसमें भैलो जलाकर घुमाए जाते हैं और पशुओं की पूजा होती है।
इगास दीवाली के ग्यारह दिन बाद क्यों मनाई जाती है?
लोक में दो कथाएँ हैं। एक, कि राम के अयोध्या लौटने की ख़बर पहाड़ के गाँवों तक ग्यारह दिन देर से पहुँची। दूसरी, कि माधो सिंह भंडारी की सेना तिब्बत की ओर की लड़ाई जीतकर दीवाली के ग्यारह दिन बाद लौटी।
भैलो क्या होता है?
भैलो चीड़ की सूखी लकड़ियों को बाँधकर बनी बड़ी मशाल है। इगास की साँझ इसे जलाकर खेत में घेरे में नाचते हुए घुमाया जाता है।
माधो सिंह भंडारी कौन थे?
माधो सिंह भंडारी गढ़वाल के एक पुराने योद्धा थे, जो राजा महिपत शाह के समय तिब्बत की ओर के मोर्चे पर सेना लेकर गए। लोक मान्यता है कि उनकी सेना के जीतकर लौटने की ख़ुशी में इगास मनाई गई।
इगास पर पशुओं की पूजा कैसे करते हैं?
गाय बैलों को नहलाकर सींगों पर तेल लगाते हैं, हल्दी और माला से सजाते हैं, और उन्हें ख़ास खाना खिलाते हैं, जैसे चिवड़ा, दूध और घी।
क्या इगास और बूढ़ी दीवाली एक ही हैं?
कई लोग इगास को ही बूढ़ी दीवाली कहते हैं। पर कुछ जगह बूढ़ी दीवाली उस बग्वाल को कहते हैं जो इसके बाद मंगसीर महीने में आती है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Wikipedia: Igas Bagwalइगास और बग्वाल के अर्थ, मूल स्रोतों तक पहुँचना, शहरों में चलन
- Outlook India: Igas Diwali, celebrating Uttarakhand's unique folk festivalदोनों कथाएँ, महिपत शाह, भैलो का सामान, पशुओं का सिंगार, अरसा और सिंगल
- ETV Bharat: Diwali celebrations continue for a month in hilly parts of Uttarakhandमंगसीर बग्वाल, लुटेरे, लोदी रिखोला, पशुओं को चिवड़ा दूध घी, परदेस में इगास
- Adda247: Igas Bagwal, celebrating Uttarakhand's vibrant folk heritageहरबोधनी एकादशी, एकादशी को सेना का लौटना, अंधया, सरसों का तेल और हल्दी, झंगोरा मंडुवा
- Drishti IAS: Uttarakhand, Igas Bagwalकार्तिक शुक्ल एकादशी, दोनों कथाएँ, भैलो और लक्ष्मी की मान्यता
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।