पंचांग 2026 · कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा 2026
Kartik Purnima 2026
महीने भर की भोर की डुबकियाँ आज पूरी होती हैं। नदी में दीये, आसमान में पूरा चाँद।
कार्तिक पूर्णिमा 2026 में 24 नवंबर, मंगलवार को है। कार्तिक पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर, रात 11:43 से 24 नवंबर, रात 8:24 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
रेत पर ऊँटों के गले की घंटियाँ। टुन। फिर टुन।
भोर का धुँधलका है, और सामने झील का पानी।
लोग पानी में उतरते हैं। एक डुबकी, फिर दूसरी।
कोई महीने भर से रोज़ भोर में नहाता आया है। आज उसका आख़िरी दिन है।
किनारे पर एक औरत पत्ते की छोटी सी नाव में दीया रखती है और पानी पर छोड़ देती है।
दीया धीरे धीरे बहता है। उसके पीछे और दीये।
कहते हैं, आज ही शिव ने एक तीर से तीन नगर गिराए थे, और आज ही विष्णु मछली बनकर पानी में उतरे। बहता दीया दोनों कथाएँ साथ लिए जाता है।
2026 में कब
कार्तिक पूर्णिमा 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़24 नवंबर, मंगलवार
तिथिकार्तिक पूर्णिमा23 नवंबर, रात 11:43 से 24 नवंबर, रात 8:24 तक
नक्षत्रकृत्तिकासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:51
सूर्यास्तशाम 5:25
चंद्रोदयशाम 4:57
अगले बरस कार्तिक पूर्णिमा 14 नवंबर 2027, रविवार को है: कार्तिक पूर्णिमा 2027, तारीख़ और मुहूर्त
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शुभकामना
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पहचान
कार्तिक पूर्णिमा क्या है
कार्तिक पूर्णिमा कार्तिक महीने की पूर्णिमा है, दीवाली के लगभग पंद्रह दिन बाद। इसे त्रिपुरी या त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन शिव ने त्रिपुरासुर को मारा था, और यह विष्णु के मत्स्य अवतार का दिन भी माना जाता है। शरद पूर्णिमा से चलता आ रहा कार्तिक स्नान, यानी भोर में नदी या तीर्थ में नहाने का महीने भर का नियम, आज पूरा होता है; पुष्कर और काशी में नहाना सबसे बड़ा माना जाता है। हिंदू, सिख और जैन, तीनों के लिए यह दिन ख़ास है। इसी दिन काशी में देव दीपावली होती है, सिख संगत गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाती है, और कटक में बाली जात्रा शुरू होती है; इन तीनों के अपने पन्ने हैं।
कथा
कार्तिक पूर्णिमा की कथा
तारकासुर के तीन बेटे थे: तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली। तीनों ने तप करके ब्रह्मा से वर माँगा, और मिला भी: तीन नगर, जो आकाश में घूमते फिरें, और जिन्हें बस एक ही तीर गिरा सके। इन्हीं को त्रिपुर कहते हैं, और इन तीनों भाइयों को मिलाकर त्रिपुरासुर। वर के भरोसे असुरों ने देवताओं को हरा दिया और उनका राज छीन लिया।
देवता रुद्र, यानी शिव, के पास गए। शिव ने ऐसा तांडव किया कि तीनों नगर अपनी जगह से हिल गए। फिर उन्होंने एक ही तीर चलाया, जिसने तीनों को एक सीध में पकड़ लिया, और उनकी तीसरी आँख की आग ने नगरों और असुरों, दोनों को जला दिया। तभी से शिव त्रिपुरांतक और त्रिपुरारी कहलाए, और यह दिन त्रिपुरी पूर्णिमा। जीत की ख़ुशी में देवताओं ने दीये जलाए, इसीलिए आज मंदिरों में दीपमाला जलती है।
दूसरी कथा विष्णु की है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा को विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया, यानी मछली का रूप, और प्रलय के पानी में मनु को बचाया। इसलिए यह दिन मत्स्य का जन्मदिन भी माना जाता है।
और यह पूरे कार्तिक का आख़िरी दिन है, जिस महीने को पुराण सबसे ऊँचा कहते हैं। पद्म पुराण के उत्तर खंड में कृष्ण कहते हैं कि सब महीनों में कार्तिक उन्हें सबसे प्यारा है, और स्कंद पुराण कहता है: 'मासानां कार्तिकः श्रेष्ठो देवानां मधुसूदनः' (स्कंद पुराण, वैष्णव खंड, कार्तिक मास माहात्म्य 1.14), यानी जैसे देवताओं में मधुसूदन, यानी विष्णु, सबसे ऊँचे हैं, वैसे ही महीनों में कार्तिक।
कहाँ कैसे
कार्तिक पूर्णिमा कहाँ कैसे मनाया जाता है
पुष्कर, राजस्थान
ब्रह्मा के नाम का पुष्कर मेला देवउठनी एकादशी से शुरू होकर आज पूरा होता है। आज पुष्कर झील की डुबकी मुक्ति देने वाली मानी जाती है, और मेले में दूर दूर से लोग और ऊँट आते हैं।
सोनपुर, बिहार
कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ का पशु मेला लगता है, जो इस दिन के बड़े मेलों में गिना जाता है।
पालीताणा, गुजरात
जैन यात्री इस दिन शत्रुंजय पहाड़ की यात्रा करते हैं, और आदिनाथ के मंदिर तक जाकर पूजा करते हैं।
रामटेक, महाराष्ट्र
रामटेक के गढ़ मंदिर में इस दिन लोग रात भर जागते हैं।
दक्षिण भारत
यहाँ यह दिन शिव के छोटे बेटे कार्तिकेय का जन्मदिन माना जाता है, और शिव मंदिरों में दीयों की कतारें जलती हैं।
बोकारो, झारखंड
इस दिन लुगु पहाड़ का मेला लगता है।
रीत
कार्तिक पूर्णिमा के दिन क्या करते हैं
- भोर में नदी, झील या किसी तीर्थ में नहाते हैं, और बहुत से लोग दिन भर उपवास रखते हैं।
- शाम को दीपदान: नदी में छोटी नावों पर दीये बहाए जाते हैं, और पीपल, तुलसी और आँवले के नीचे दीये रखे जाते हैं।
- मंदिरों में दीपमाला, यानी दीयों के खंभे, जलते हैं, और कई मंदिरों में साल के हर दिन के लिए एक, यानी तीन सौ पैंसठ बत्तियाँ जलती हैं।
- विष्णु के लिए सत्यनारायण की कथा, और शिव के लिए रुद्राभिषेक।
- इस दिन गाय और सोने का दान, और ब्राह्मणों को भोजन कराना बड़े पुण्य का काम माना गया है।
- इस दिन किसी को चोट पहुँचाना मना है, पेड़ काटना और फूल तोड़ना भी।
- जो तुलसी विवाह देवउठनी से अब तक नहीं कर पाए, उनके लिए आज आख़िरी दिन है।
सवाल जवाब
कार्तिक पूर्णिमा 2026: पूछे जाने वाले सवाल
कार्तिक पूर्णिमा 2026 कब है?
कार्तिक पूर्णिमा 2026 में 24 नवंबर, मंगलवार को है। कार्तिक पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर, रात 11:43 से 24 नवंबर, रात 8:24 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?
मान्यता है कि इसी दिन शिव ने तारकासुर के तीन बेटों के तीन उड़ते नगरों, त्रिपुर, को एक तीर से जलाया। इसीलिए शिव त्रिपुरारी कहलाए, और यह दिन त्रिपुरी या त्रिपुरारी पूर्णिमा।
कार्तिक स्नान कब से कब तक होता है?
शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक, यानी पूरे कार्तिक महीने भोर में नदी या तीर्थ में स्नान होता है, और कार्तिक पूर्णिमा की डुबकी के साथ यह नियम पूरा होता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान कैसे करें?
शाम को दीया जलाकर किसी छोटी नाव या पत्ते पर रखें और नदी या पानी में बहा दें। दीये मंदिर में, घर में, और पीपल, तुलसी और आँवले के नीचे भी रखे जाते हैं। दीपदान का मुहूर्त इस पन्ने पर ऊपर दिया है।
पुष्कर मेला कार्तिक पूर्णिमा से कैसे जुड़ा है?
ब्रह्मा के नाम का यह मेला देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है, और पूर्णिमा की पुष्कर झील की डुबकी के साथ ख़त्म होता है।
कार्तिक पूर्णिमा और मत्स्य अवतार का क्या संबंध है?
मान्यता है कि इसी दिन विष्णु ने मत्स्य, यानी मछली का रूप लिया और प्रलय के समय मनु को बचाया, इसलिए इसे मत्स्य का जन्मदिन भी माना जाता है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Kartika Purnima (Wikipedia)त्रिपुरारी नाम, मत्स्य, पुष्कर, नावों में दीये, दीपमाला, दान और मनाहियाँ, तुलसी विवाह का आख़िरी दिन, पालीताणा, कार्तिकेय
- What is the significance of Kartik Purnima (eSamskriti)तारकासुर के तीन बेटे, एक तीर का वर, तांडव और तीसरी आँख, मत्स्य और मनु, तीन सौ पैंसठ बत्तियाँ, पद्म और स्कंद पुराण के वचन
- Significance of Kartik Purnima (The Sentinel)देवताओं के दीये, दीपदान, गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व, सोनपुर और लुगु पहाड़ के मेले, कार्तिकेय
- Kartik Pournima: a day when Gods celebrate Diwali (The Hitavada)त्रिपुरासुर का देवताओं का राज छीनना, शरद पूर्णिमा से कार्तिक स्नान, रामटेक का गढ़ मंदिर
- Prabodhini Ekadashi (Wikipedia)पुष्कर मेले का एकादशी से पूर्णिमा तक चलना, झील में स्नान
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।