पंचांग 2026

पंचांग 2026 · आश्विन शुक्ल षष्ठी

दुर्गा पूजा 2026

Durga Puja 2026

जिस नदी से मिट्टी आई थी, देवी उसी नदी में लौटती हैं।

दुर्गा पूजा 2026 में 16 अक्टूबर, शुक्रवार को है। आश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर, रात 3:26 से 17 अक्टूबर, सुबह 5:55 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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कई कंधों पर मूर्ति टिकी है। पैर सीढ़ी दर सीढ़ी नदी की ओर उतर रहे हैं।

ढाक बज रहा है, पर आज उसकी थाप में थोड़ी उदासी है।

पीछे औरतें एक दूसरे के गालों पर सिंदूर मल रही हैं।

फिर एक लहर आती है, और मूर्ति पानी में उतर जाती है।

महीनों पहले इसी नदी की मिट्टी से इसे गढ़ा गया था।

अब देवी वहीं लौट रही हैं जहाँ से आई थीं।

किनारे पर कोई धीमे से कहता है: अगले बरस फिर आना।

और एक कथा याद आती है, जब देवी को बेसमय जगाया गया था।

2026 में कब

दुर्गा पूजा 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़16 अक्टूबर, शुक्रवार

तिथिआश्विन शुक्ल षष्ठी16 अक्टूबर, रात 3:26 से 17 अक्टूबर, सुबह 5:55 तक

नक्षत्रज्येष्ठासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:22

सूर्यास्तशाम 5:51

चंद्रोदयसुबह 11:34

दुर्गा पूजा
16 से 21 अक्टूबरपूरा काल।

बंगाल में दुर्गा पूजा 16 अक्टूबर को षष्ठी से शुरू होती है। इस बरस अष्टमी और नवमी की पूजा एक ही दिन, 19 अक्टूबर को है, महानवमी 20 अक्टूबर को, और विजया दशमी, विसर्जन और सिंदूर खेला 21 अक्टूबर को। उत्तर भारत में दशहरा 20 अक्टूबर को है।

अगले बरस दुर्गा पूजा 5 अक्टूबर 2027, मंगलवार को है: दुर्गा पूजा 2027, तारीख़ और मुहूर्त

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शुभकामना

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पहचान

दुर्गा पूजा क्या है

दुर्गा पूजा बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है, जो आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष में षष्ठी से दशमी तक, पाँच दिन चलता है। मार्कंडेय पुराण के हिसाब से देवी की यह पूजा नौ दिन की भी हो सकती है और चार दिन की भी, और चार दिन वाला रूप बंगाल, ओड़िशा, असम, झारखंड और बिहार में बड़ा है। इसकी शुरुआत महालया से मानी जाती है, जब देवी कैलास से चलती हैं। कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को ने 2021 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में रखा।

कथा

दुर्गा पूजा की कथा

बंगाल में दुर्गा पूजा को अकाल बोधन कहा जाता है। अकाल यानी बेसमय, और बोधन यानी जगाना। देवी की पूजा का ठीक समय वसंत माना जाता है, जब बासंती पूजा होती है। फिर शरद में यह पूजा क्यों? इसकी कथा बांग्ला की कृत्तिवासी रामायण से आती है, जिसे पंद्रहवीं सदी में कृत्तिवास ओझा ने लिखा।

कथा ऐसे चलती है: लंका की लड़ाई चल रही है। रावण भी देवी का भक्त है, और लंका के एक मंदिर में उनकी पूजा करता है। पर सीता के हरण के बाद देवी का मन राम की ओर फिर गया है। ब्रह्मा राम को सलाह देते हैं: लड़ाई जीतनी है तो देवी को जगाओ, बेल के पेड़ के नीचे उनकी पूजा करो। राम को खटकता है कि यह तो देवी के सोने का समय है, फिर भी ब्रह्मा के कहने पर वे पूजा ठानते हैं।

देवी को एक सौ आठ नीले कमल चढ़ाने हैं। राम कमल गिनते हैं: एक सौ सात। एक कम। अब क्या? राम को याद आता है कि लोग उनकी आँखों को नील कमल जैसी कहते हैं। वे अपनी एक आँख निकालकर चढ़ाने को तैयार हो जाते हैं। उसी पल देवी प्रकट होती हैं, राम की भक्ति से ख़ुश होकर उन्हें आशीर्वाद देती हैं, और कथा कहती है कि उसके बाद राम ने रावण को मारा। बंगाल मानता है कि शरद की दुर्गा पूजा उसी बेसमय जगाने की याद है। एक और बांग्ला कथा में कमल कम पड़ने और आँख चढ़ाने की यही बात ब्रह्मा के साथ कही गई है, जो राम के लिए पुरोहित बनकर पूजा करते हैं।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में दुर्गा पूजा

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

कृत्तिवासी रामायण

बांग्ला · Krittivasi Ramayan

कृत्तिवासी रामायण बांग्ला की वह रामकथा है जिसमें राम शरद ऋतु में दुर्गा की पूजा करते हैं, और बंगाल का अकाल बोधन इसी से जुड़ा है। वाल्मीकि की कथा में राम की यह दुर्गा पूजा नहीं है; यह बांग्ला कथा की अपनी देन है। इस कथा में रावण भी देवी का भक्त है, और राम को लड़ाई के बीच देवी का मन जीतना है। यानी बंगाल की सबसे बड़ी पूजा की जड़ एक रामकथा में है, और वह रामकथा लंका के युद्ध के बीच खड़ी है।

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में

जहाँ आज भी लंका जलती है।

कहाँ कैसे

दुर्गा पूजा कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • कोलकाता के पंडाल

    शहर में बड़े बड़े पंडाल और कलाकृतियों जैसे मंडप बनते हैं, और लोग रात भर एक पंडाल से दूसरे पंडाल घूमते हैं। यूनेस्को ने लिखा कि इन दिनों अमीर ग़रीब, धर्म और समुदाय की दीवारें गिर जाती हैं।

  • कुमारटुली, उत्तर कोलकाता

    कुम्हारों के इस मोहल्ले में महीनों पहले से देवी और उनके परिवार की मूर्तियाँ गढ़ी जाती हैं, गंगा से लाई गई कच्ची मिट्टी से।

  • बंगाल के घाट

    दशमी को मूर्तियाँ जुलूस के साथ उसी नदी में विसर्जित होती हैं जहाँ से मिट्टी आई थी।

  • ओड़िशा, असम, झारखंड और बिहार

    यहाँ भी चार दिन की दुर्गा पूजा बड़ा त्योहार है, मिट्टी की मूर्तियों और देवी माहात्म्य के पाठ के साथ।

  • दुनिया भर के बंगाली

    देश से दूर बसे बंगाली परिवार भी इन दिनों अपनी अपनी पूजा करते हैं, और कई लोगों के लिए यह अपनी जड़ों की ओर लौटने का समय है।

रीत

दुर्गा पूजा के दिन क्या करते हैं

  1. षष्ठी को बोधन होता है: देवी का स्वागत, घट की स्थापना और मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा।
  2. सप्तमी को नवपत्रिका, यानी नौ पौधों का गट्ठर, पवित्र जल से नहलाया जाता है; बंगाल में इसे कोला बउ भी कहते हैं।
  3. अष्टमी को पुष्पांजलि होती है, और अष्टमी नवमी के मिलन पर संधि पूजा।
  4. नवमी को हवन होता है, भोग चढ़ता है, और कई जगह कुमारी पूजा होती है।
  5. पाँचों दिन ढाकी ढाक बजाते हैं; ढाक यानी बड़ा ढोल।
  6. दशमी को औरतें सिंदूर खेला करती हैं, फिर मूर्तियाँ जुलूस के साथ पानी में विदा होती हैं, और लोग दोस्तों और रिश्तेदारों के घर मिलने जाते हैं।

सवाल जवाब

दुर्गा पूजा 2026: पूछे जाने वाले सवाल

दुर्गा पूजा 2026 कब है?

दुर्गा पूजा 2026 में 16 अक्टूबर, शुक्रवार को है। आश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर, रात 3:26 से 17 अक्टूबर, सुबह 5:55 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

दुर्गा पूजा को अकाल बोधन क्यों कहते हैं?

अकाल यानी बेसमय और बोधन यानी जगाना। देवी की पूजा का ठीक समय वसंत माना गया है, पर राम ने लंका की लड़ाई से पहले शरद में देवी को जगाया था, इसी कथा से शरद की पूजा को अकाल बोधन कहते हैं।

राम की दुर्गा पूजा की कथा किस रामायण में है?

यह कथा बांग्ला की कृत्तिवासी रामायण से जुड़ी है। वाल्मीकि रामायण में राम की दुर्गा पूजा नहीं मिलती।

दुर्गा पूजा के पाँच दिन कौन से हैं?

आश्विन शुक्ल पक्ष की षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी। षष्ठी को बोधन होता है और दशमी को विसर्जन।

सिंदूर खेला क्या है?

दशमी को विसर्जन से पहले औरतें एक दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इसे सिंदूर खेला कहते हैं।

दुर्गा पूजा यूनेस्को की सूची में कब आई?

कोलकाता की दुर्गा पूजा 2021 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में रखी गई।

कुमारटुली क्या है?

उत्तर कोलकाता का कुम्हारों का मोहल्ला, जहाँ दुर्गा पूजा के लिए मिट्टी की मूर्तियाँ बनती हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Durga Puja in Kolkata, UNESCO Intangible Cultural Heritage2021 की सूची, गंगा की मिट्टी, कार्यशालाएँ, मंडप, दीवारों का गिरना, दसवें दिन विसर्जन
  2. Durga Puja, Wikipediaपाँचों दिनों की रीतियाँ, कुमारटुली, ढाक, सिंदूर खेला, कृत्तिवासी रामायण
  3. Akalabodhana, Wikipediaअकाल बोधन का मतलब, बांग्ला रामायण की कथा, रावण देवी का भक्त, ब्रह्मा की सलाह, बेल का पेड़, ब्रह्मा पुरोहित
  4. Akaal Bodhan, Bharatpediaकृत्तिवासी रामायण, एक सौ आठ नीले कमल, कमल जैसी आँख
  5. Akal Bodhan, Ashikaवसंत की बासंती पूजा, एक कमल कम
  6. Krittivasi Ramayan, Wikipediaकृत्तिवास ओझा, पंद्रहवीं सदी, बांग्ला
  7. Durga, Wikipediaमार्कंडेय पुराण में नौ या चार दिन, पूर्वी राज्य
  8. Durga Puja in Kolkata, Wikipediaपाँच मुख्य दिन, पंडाल घूमना

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।