पंचांग 2026

पंचांग 2026 · कार्तिक कृष्ण अष्टमी

अहोई अष्टमी 2026

Ahoi Ashtami 2026

माँ का व्रत, और उसे खोलने के लिए आसमान का पहला तारा।

अहोई अष्टमी 2026 में 1 नवंबर, रविवार को है। कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि 1 नवंबर, दोपहर 2:52 से 2 नवंबर, दोपहर 1:11 तक है। चाँद रात 11:36 निकलेगा। समय नई दिल्ली के हैं।

अहोई अष्टमी का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 54 प्रतिशत रोशन

दीवार पर एक चित्र बना है। काँटों वाला एक छोटा जानवर, और उसके पीछे उसके बच्चे।

बच्चा उस पर उँगली रखता है। माँ कहती है, स्याहु है। साही।

पास में अहोई माता हैं, और उनके चारों ओर छोटे छोटे बच्चे बने हैं।

माँ ने सुबह से पानी नहीं पिया। हाथ में गेहूँ के सात दाने हैं, और दादी कथा कह रही हैं।

एक औरत की कथा, जिसकी कुदाल मिट्टी खोदते खोदते एक बिल में जा लगी थी।

शाम ढलती है। सब आँगन में आसमान की ओर देख रहे हैं।

फिर बच्चा ही सबसे पहले चिल्लाता है: वो रहा!

पहला तारा। माँ करवे से अर्घ्य देती है, और सबसे पहले बच्चे को खिलाती है।

2026 में कब

अहोई अष्टमी 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़1 नवंबर, रविवार

तिथिकार्तिक कृष्ण अष्टमी1 नवंबर, दोपहर 2:52 से 2 नवंबर, दोपहर 1:11 तक

नक्षत्रपुष्यसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:33

सूर्यास्तशाम 5:36

चंद्रोदयरात 11:36

चंद्रोदय
रात 11:36नई दिल्ली में चाँद निकलने का समय। बादल हों तो इसी समय अर्घ्य देते हैं।

अगले बरस अहोई अष्टमी 22 अक्टूबर 2027, शुक्रवार को है: अहोई अष्टमी 2027, तारीख़ और मुहूर्त

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शुभकामना

अहोई अष्टमी का शुभकामना कार्ड

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पहचान

अहोई अष्टमी क्या है

अहोई अष्टमी माँओं का व्रत है, जो वे अपने बच्चों की सलामती और लंबी उम्र के लिए रखती हैं। यह कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ता है, यानी करवा चौथ के चार दिन बाद और दीवाली से कुछ दिन पहले। माँ सुबह नहाकर संकल्प लेती है और दिन भर निर्जला रहती है। व्रत चाँद से नहीं, शाम को पहले तारे दिखने पर खुलता है, क्योंकि इस रात चाँद बहुत देर से निकलता है; कुछ घरों में परिवार की रीत से चाँद देखकर खोलते हैं। इसी रात मथुरा के पास गोवर्धन में राधा कुंड का आधी रात का स्नान भी होता है।

कथा

अहोई अष्टमी की कथा

लोक में यह कथा कई रूपों में कही जाती है, पर उसकी जड़ एक है। एक औरत थी, जिसके सात बेटे थे। दीवाली से पहले वह अपने घर की लिपाई पुताई के लिए मिट्टी लेने गई। मिट्टी खोदते हुए उसकी कुदाल एक बिल में जा लगी, और भीतर स्याहु, यानी साही, का एक बच्चा मर गया। वह डर गई, और कहते हैं उसने यह बात किसी को नहीं बताई।

पर स्याहु माँ ने अपने बच्चे को खोया था। उसके शाप से उस औरत के बेटे एक एक करके चले गए। माँ टूट गई। तब किसी कथा में गाँव की एक बूढ़ी, समझदार औरत, और किसी में आकाश की एक आवाज़, उसे राह बताती है: कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई माता की पूजा करो, स्याहु और उसके बच्चों का चित्र बनाओ, व्रत रखो, और जो हुआ उसे सच सच कह दो।

उसने ऐसा ही किया। अष्टमी को उसने दीवार पर अहोई माता और स्याहु के बच्चों का चित्र बनाया, दिन भर व्रत रखा, और पहला तारा दिखने पर रो रोकर स्याहु माँ से माफ़ी माँगी। अहोई माता ख़ुश हुईं, और उसके बच्चे फिर से उसके घर में खिलने लगे। यह कथा हर माँ को यह भी याद दिलाती है कि हर छोटे जीव का बच्चा भी किसी का बच्चा है।

कहाँ कैसे

अहोई अष्टमी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • उत्तर भारत

    घर की दीवार पर अहोई माता बनाई जाती हैं या उनकी छपी तस्वीर लगाई जाती है, और शाम को तारे देखकर माँएँ व्रत खोलती हैं। बड़ी औरतें कथा सुनाती हैं और नई माँएँ सुनती हैं।

  • राधा कुंड, गोवर्धन (मथुरा)

    जिन जोड़ों को संतान की चाह है, वे अहोई अष्टमी की आधी रात, निशीथ काल में, राधा कुंड में एक साथ डुबकी लगाते हैं, और स्नान रात भर चलता है। पानी में खड़े खड़े वे लाल कपड़े से सजा कूष्मांड, यानी कच्चा सफ़ेद पेठा, चढ़ाते हैं, और जिनकी मुराद पूरी हो जाती है वे राधा रानी को धन्यवाद देने लौटकर आते हैं।

रीत

अहोई अष्टमी के दिन क्या करते हैं

  1. सुबह नहाकर माँ बच्चों के लिए व्रत का संकल्प लेती है और दिन भर निर्जला रहती है।
  2. दीवार पर अहोई माता बनाई जाती हैं, स्याहु और उसके बच्चों के साथ, चारों ओर तारे; या उनकी छपी तस्वीर लगाई जाती है।
  3. पूजा की जगह पर पानी भरा कलश रखा जाता है, और रोली, चावल और गेहूँ के दाने रखे जाते हैं।
  4. कथा सुनते समय औरतें हाथ में गेहूँ के सात दाने रखती हैं।
  5. परंपरा से करवे के आगे चाँदी की छोटी अहोई या स्याहु रखी जाती है, और कई घरों में हर साल धागे में चाँदी का एक मनका जोड़ा जाता है, हर बच्चे के लिए एक।
  6. सूरज ढलने के बाद पहला तारा दिखते ही करवे से अर्घ्य दिया जाता है और पुए या मिठाई का भोग लगता है।
  7. माँ अक्सर पहले बच्चों को खिलाती है, फिर ख़ुद व्रत खोलती है।
  8. पूजा के गेहूँ के दाने बाद में बछड़े को खिला दिए जाते हैं या सँभालकर रख लिए जाते हैं।

रसोई

अहोई अष्टमी का खाना

  • पुए शाम की पूजा का मीठा भोग।
  • हलवा और पूरी तारे देखने के बाद अहोई माता को चढ़ाया जाने वाला भोग।
  • दूध और चावल कई घरों में भोग के लिए।

सवाल जवाब

अहोई अष्टमी 2026: पूछे जाने वाले सवाल

अहोई अष्टमी 2026 कब है?

अहोई अष्टमी 2026 में 1 नवंबर, रविवार को है। कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि 1 नवंबर, दोपहर 2:52 से 2 नवंबर, दोपहर 1:11 तक है। चाँद रात 11:36 निकलेगा। समय नई दिल्ली के हैं।

अहोई अष्टमी पर स्याहु किसे कहते हैं?

स्याहु साही को कहते हैं, यानी काँटों वाला वह छोटा जानवर जो बिल में रहता है। व्रत की कथा में एक औरत की कुदाल से स्याहु का बच्चा मर जाता है, इसलिए अहोई माता के चित्र में स्याहु और उसके बच्चे बनाए जाते हैं।

अहोई अष्टमी का व्रत तारे देखकर क्यों खोलते हैं?

इस व्रत में पूजा तारों के निकलने पर होती है, और इस रात चाँद बहुत देर से निकलता है। इसलिए ज़्यादातर माँएँ शाम का पहला तारा देखकर अर्घ्य देती हैं और व्रत खोलती हैं; कुछ घर अपनी रीत से चाँद का इंतज़ार करते हैं।

अहोई अष्टमी पर राधा कुंड में स्नान क्यों करते हैं?

मान्यता है कि अहोई अष्टमी की आधी रात राधा कुंड में डुबकी लगाने से संतान की चाह पूरी होती है। इसलिए हर साल हज़ारों जोड़े गोवर्धन आकर एक साथ स्नान करते हैं और कूष्मांड चढ़ाते हैं।

अहोई अष्टमी करवा चौथ के कितने दिन बाद आती है?

करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को होती है और अहोई अष्टमी उसी पक्ष की अष्टमी को, यानी चार दिन बाद।

अहोई माता के चित्र में क्या बनाते हैं?

अहोई माता, उनके चारों ओर छोटे बच्चे, स्याहु और उसके बच्चे, और आसपास तारे। कई घर चित्र की जगह छपी हुई तस्वीर लगाते हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Ahoi Ashtami (PanchangBodh)निर्जला व्रत, तारा दर्शन, देर से निकलता चाँद, स्याहु की कथा, चाँदी की स्याहु और मनके, करवे से अर्घ्य
  2. Ahoi Ashtami Vrat Katha (Dekho Panchang)मिट्टी खोदती माँ और स्याहु का बच्चा, बूढ़ी औरत की सलाह, चित्र, पहले तारे पर पूजा, बड़ी औरतों का कथा कहना
  3. Ahoi Ashtami: The Vrat That Protects Your Children (Vedadhara)गेहूँ के सात दाने, कलश, तारों के बाद पूजा, बछड़े को दाने
  4. Radhakunda Snan: Drik Panchangराधा कुंड का निशीथ स्नान, जोड़ों का साथ नहाना, कूष्मांड का चढ़ावा
  5. Ahoi Ashtami (Wikipedia)कार्तिक कृष्ण अष्टमी, संकल्प, कथा का आकाशवाणी वाला रूप, पुए और हलवा

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।