पंचांग 2026

पंचांग 2026 · कार्तिक शुक्ल नवमी

जगद्धात्री पूजा 2026

Jagaddhatri Puja 2026

शेर पर देवी, शेर के नीचे हाथी। और हाथी में, कहते हैं, देवताओं का घमंड।

जगद्धात्री पूजा 2026 में 18 नवंबर, बुधवार को है। कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि 18 नवंबर, सुबह 6:06 से 19 नवंबर, सुबह 7:07 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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उस शाम का चाँद, 60 प्रतिशत रोशन

गीली मिट्टी के हाथी की सूँड़ पर एक अँगूठा धीरे धीरे फिरता है।

कारीगर उसे लेटा हुआ बनाता है, सिर नीचे।

हाथी के ऊपर शेर। शेर के ऊपर देवी, लाल कपड़ों में, चार हाथ: शंख, चक्र, धनुष, बाण।

गले में जनेऊ की जगह एक साँप।

पास खड़ा एक लड़का पूछता है, हाथी नीचे क्यों है?

कारीगर मिट्टी से सना हाथ पोंछता है। कहता है, यह घमंड है। घमंड नीचे ही अच्छा।

एक तिनका। उसे न आग जला सकी, न हवा उठा सकी। कथा वहीं से शुरू होती है।

2026 में कब

जगद्धात्री पूजा 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़18 नवंबर, बुधवार

तिथिकार्तिक शुक्ल नवमी18 नवंबर, सुबह 6:06 से 19 नवंबर, सुबह 7:07 तक

नक्षत्रशतभिषासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:46

सूर्यास्तशाम 5:26

चंद्रोदयदोपहर 1:19

अगले बरस जगद्धात्री पूजा 7 नवंबर 2027, रविवार को है: जगद्धात्री पूजा 2027, तारीख़ और मुहूर्त

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शुभकामना

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जगद्धात्री पूजा का शुभकामना कार्ड: जगद्धात्री पूजा की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

जगद्धात्री पूजा क्या है

जगद्धात्री पूजा बंगाल की पूजा है, देवी जगद्धात्री की, यानी जगत को थामने वाली देवी की। यह कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को होती है, और इसी दिन अक्षय नवमी भी पड़ती है। कुछ जगह उत्सव सप्तमी से शुरू होकर पाँच दिन चलता है, और कुछ घरों में बस नवमी के एक ही दिन में सप्तमी, अष्टमी और नवमी, तीनों की पूजा साथ कर ली जाती है। सबसे बड़ी पूजा हुगली ज़िले के चंदननगर और नदिया ज़िले के कृष्णनगर में होती है। देवी शेर पर होती हैं, और शेर के नीचे एक हाथी लेटा होता है, जिसे देवताओं का घमंड माना जाता है। यह पूजा तंत्र की परंपरा से आती है।

कथा

जगद्धात्री पूजा की कथा

केन उपनिषद में एक कथा है। देवताओं ने असुरों से लड़ाई जीती। जीत असल में ब्रह्म की थी, पर देवता कहने लगे: यह जीत हमारी है, यह बल और यह बड़ाई हमारी है। ब्रह्म ने यह देखा, और देवताओं के सामने एक यक्ष के रूप में प्रकट हुए, यानी एक ऐसा अनजाना रूप जिसे वे पहचान न सके। देवताओं ने आपस में पूछा, यह कौन है?

पहले अग्नि गए। यक्ष ने उनसे पूछा, तुम्हारी ताक़त क्या है? और उनके आगे घास का एक तिनका रख दिया। अग्नि ने पूरा ज़ोर लगाया, पर तिनका नहीं जला, और वे लौट आए। फिर वायु गए। तिनका वहीं था। वायु उसे उठाकर ले जाना चाहते थे, पर तिनका अपनी जगह से हिला तक नहीं। आख़िर में इंद्र गए। पर यक्ष उनके सामने से ओझल हो गया, और उसी जगह उन्हें एक स्त्री मिली: 'स तस्मिन्नेवाकाशे स्त्रियमाजगाम बहुशोभमानामुमां हैमवतीम्। तां होवाच किमेतद्यक्षमिति॥' (केन उपनिषद 3.12), यानी उसी जगह इंद्र बहुत तेज वाली एक स्त्री के पास पहुँचे, उमा हैमवती के पास, और उनसे पूछा: यह यक्ष कौन है? उमा ने बताया कि वह ब्रह्म है, और जीत उसी की थी। तब इंद्र ने जाना।

बंगाल की परंपरा इसी उमा को जगद्धात्री से जोड़ती है। कात्यायनी तंत्र में कथा का रूप थोड़ा अलग है: महिषासुर पर दुर्गा की जीत के बाद अग्नि, वायु, वरुण और चंद्र घमंड में आ गए। देवी ने उनकी परीक्षा ली और उनके आगे एक तिनका रखा, कि इसे हिलाकर दिखाओ। कोई उसे हिला न सका, और सबने जाना कि सारी ताक़त की जड़ देवी हैं। तब देवी उमा के रूप में शेर पर प्रकट हुईं, और देवताओं के घमंड को एक हाथी बना दिया। इसीलिए मूर्ति में शेर के नीचे हाथी लेटा होता है।

लोक में उस हाथी की एक और कथा है। कहते हैं वह करींद्रासुर है, जो कभी इंद्र का हाथी ऐरावत था और शाप से असुर बन गया। उसने गंगा को ज़बरदस्ती अपने साथ ले जाना चाहा। गंगा ने महामाया को पुकारा, और देवी ने जगद्धात्री बनकर चक्र और धनुष बाण से उसे मारा। इसलिए उन्हें करींद्रासुर को मारने वाली भी कहा जाता है।

कहाँ कैसे

जगद्धात्री पूजा कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • कृष्णनगर, नदिया

    परंपरा कहती है कि महाराजा कृष्णचंद्र राय को नवाब अलीवर्दी ख़ाँ ने लगान के झगड़े में क़ैद कर रखा था, और वे दुर्गा पूजा न कर सके; बाद में उन्हें देवी के दर्शन हुए, और देवी ने कार्तिक शुक्ल नवमी को पूजा करने को कहा। यहाँ चाषा पाड़ा की बुड़िमा, यानी बूढ़ी माँ, की पूजा सबसे मशहूर है, जिसे सोने चाँदी के भारी गहनों से सजाया जाता है, और विसर्जन की शोभायात्रा को साँग कहते हैं।

  • चंदननगर, हुगली

    हुगली नदी के किनारे यह शहर कभी फ़्रांसीसी बस्ती था। यहाँ के कारीगर गलियों में बत्तियों से बड़े बड़े चित्र बनाते हैं, ऊँची मूर्तियाँ लगती हैं, जैसे रानीमा, और विसर्जन की शोभायात्रा एक दिन में ख़त्म नहीं होती, कभी कभी दो दिन चलती है। एक कथा यहाँ की पूजा का आरंभ इंद्रनारायण चौधरी से जोड़ती है, पर स्रोत इसके समय पर एक राय नहीं हैं।

  • शांतिपुर, नदिया

    एक कहानी कहती है कि पहली मूर्ति शांतिपुर के चंद्रचूड़ तर्कमणि ने बनाई, और उससे पहले बस घट की पूजा होती थी। शांतिपुर के सत्रहवीं सदी के जलेश्वर और राघवेश्वर मंदिरों की दीवारों पर देवी का रूप बना है, जो बताता है कि नदिया में यह पूजा और पुरानी है।

  • भद्रेश्वर, तेंतुलतला

    यहाँ की पूजा में मर्द साड़ी पहनकर रस्मों में हिस्सा लेते हैं।

रीत

जगद्धात्री पूजा के दिन क्या करते हैं

  1. मुख्य पूजा कार्तिक शुक्ल नवमी को होती है, और कई घर इसी एक दिन में सप्तमी, अष्टमी और नवमी की तीनों पूजा कर लेते हैं।
  2. चंदननगर जैसी जगहों पर उत्सव सप्तमी से शुरू होकर कई दिन चलता है।
  3. देवी तीन आँखों और चार हाथों वाली बनती हैं, लाल कपड़ों में, हाथों में शंख, चक्र, धनुष और बाण, और शेर के नीचे हाथी।
  4. मूर्तियाँ सोला के गहनों से सजती हैं, यानी एक हल्के पौधे के सफ़ेद गूदे से बने गहनों से।
  5. पूजा में धुनो पोड़ानो की रीत भी होती है, जो आग से जुड़ी है।
  6. भक्त मानते हैं कि यह पूजा मन को घमंड और लालच से छुड़ाती है।
  7. आख़िर में शोभायात्रा के साथ मूर्तियाँ विसर्जन के लिए नदी तक ले जाई जाती हैं।

सवाल जवाब

जगद्धात्री पूजा 2026: पूछे जाने वाले सवाल

जगद्धात्री पूजा 2026 कब है?

जगद्धात्री पूजा 2026 में 18 नवंबर, बुधवार को है। कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि 18 नवंबर, सुबह 6:06 से 19 नवंबर, सुबह 7:07 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

जगद्धात्री देवी के नीचे हाथी क्यों होता है?

कात्यायनी तंत्र की कथा में देवी ने घमंडी देवताओं के घमंड को हाथी बना दिया था, इसलिए हाथी घमंड का रूप माना जाता है। लोक कथा में वह करींद्रासुर है, जिसे देवी ने मारा।

जगद्धात्री पूजा किस तिथि को होती है?

कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को, उसी दिन जिस दिन अक्षय नवमी होती है। कहीं कहीं उत्सव सप्तमी से शुरू होता है।

जगद्धात्री पूजा की शुरुआत किसने की?

आम परंपरा इसे कृष्णनगर के महाराजा कृष्णचंद्र राय से जोड़ती है, जिन्हें क़ैद से छूटने के बाद देवी के दर्शन हुए बताए जाते हैं। कुछ कहानियाँ शांतिपुर के चंद्रचूड़ तर्कमणि का नाम लेती हैं, और वहाँ के पुराने मंदिर बताते हैं कि नदिया में पूजा इससे भी पहले की है।

चंदननगर की जगद्धात्री पूजा क्यों मशहूर है?

अपनी बत्तियों, ऊँची मूर्तियों और लंबी विसर्जन शोभायात्रा के लिए। यह कभी फ़्रांसीसी बस्ती रहा शहर है, और यहाँ की पूजा कई दिन चलती है।

केन उपनिषद की उमा हैमवती कौन हैं?

केन उपनिषद के तीसरे खंड में जब इंद्र यक्ष को पहचान नहीं पाते, तब उन्हें उमा हैमवती मिलती हैं, जो बताती हैं कि यक्ष ब्रह्म है। बंगाल में इन्हीं उमा को जगद्धात्री से जोड़ा जाता है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Jagaddhatri (Wikipedia)चार हाथ और हथियार, शेर के नीचे हाथी, कात्यायनी तंत्र की कथा, करींद्रासुर, कृष्णचंद्र, शांतिपुर के मंदिर
  2. Jagaddhatri Puja (Wikipedia)नवमी और पाँच दिन, बुड़िमा, साँग, चंदननगर का विसर्जन, धुनो पोड़ानो, तेंतुलतला
  3. Kena Upanishad (Wikipedia)तीसरे खंड की कथा: देवताओं का घमंड, अग्नि, वायु, इंद्र और उमा
  4. Kena Upanishad 3.12 (Vedapath)उमा हैमवती वाला श्लोक और उसका अर्थ
  5. Jagaddhatri Puja (Drik Panchang)शुक्ल नवमी का नियम, अक्षय नवमी, लाल कपड़े और तीन आँखें, करींद्रासुर, कृष्णचंद्र राय
  6. Jagaddhatri Puja: Chandannagar and Krishnanagar traditions (Hindutone)एक दिन में तीनों पूजा, फ़्रांसीसी बस्ती, बत्तियाँ, कृष्णनगर की मिट्टी की कारीगरी, साँप वाला जनेऊ
  7. Overflowing with ecstasy (The Statesman)इंद्रनारायण चौधरी और समय पर मतभेद, सोला के गहने, चंदननगर की शोभायात्रा

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।