पंचांग 2026 · कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी
धनतेरस 2026
Dhanteras 2026
आज बाज़ार में बरतन बिकते हैं, और दरवाज़े पर एक दीया दक्षिण की ओर देखता है।
धनतेरस 2026 में 6 नवंबर, शुक्रवार को है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर, सुबह 10:31 से 7 नवंबर, सुबह 10:48 तक है। प्रदोष काल शाम 5:33 से रात 7:57 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
बरतनों की दुकान से टन टन की आवाज़ आती है। पीतल, ताँबा, स्टील।
कोई चाँदी का एक छोटा सिक्का ही ख़रीद रहा है। आज इतना भी बहुत है।
घर लौटकर दरवाज़े पर चावल के आटे और कुमकुम से छोटे पैर बनते हैं।
सूरज ढल गया है। लक्ष्मी और कुबेर की थाली सजती है।
फिर दरवाज़े के बाहर एक दीया रखते हैं। उसका मुँह दक्षिण की ओर है।
दक्षिण यम की दिशा है। यह दीया उनके लिए है।
एक पुरानी कथा में एक नई दुल्हन ने ऐसे ही दीये जलाकर रात भर मौत को दरवाज़े पर रोके रखा था।
2026 में कब
धनतेरस 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़6 नवंबर, शुक्रवार
तिथिकार्तिक कृष्ण त्रयोदशी6 नवंबर, सुबह 10:31 से 7 नवंबर, सुबह 10:48 तक
नक्षत्रहस्तसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:37
सूर्यास्तशाम 5:33
चंद्रोदयरात 3:41
- प्रदोष काल
- शाम 5:33 से रात 7:57 तकसूर्यास्त के बाद के दो घंटे चौबीस मिनट।
अगले बरस धनतेरस 27 अक्टूबर 2027, बुधवार को है: धनतेरस 2027, तारीख़ और मुहूर्त
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पहचान
धनतेरस क्या है
धनतेरस, जिसे धन त्रयोदशी भी कहते हैं, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है और दीवाली के पाँच दिनों में पहला दिन। इस शाम प्रदोष काल में, यानी सूरज ढलने के आसपास के समय में, लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है, और यम के लिए दक्षिण की ओर दीया जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। यही दिन धन्वंतरि जयंती भी है, उन धन्वंतरि का दिन जो देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं। भारत सरकार 2016 से हर साल धनतेरस को आयुर्वेद दिवस रखती रही, पर तिथि हर साल बदलने की वजह से 2025 से आयुर्वेद दिवस के लिए 23 सितंबर की पक्की तारीख़ तय कर दी गई है।
कथा
धनतेरस की कथा
पुराणों में समुद्र मंथन की कथा है। देवता और असुर अमृत के लिए समुद्र मथ रहे थे, और उसमें से एक एक करके रत्न निकल रहे थे। मान्यता है कि त्रयोदशी के दिन मंथन से धन्वंतरि निकले, एक हाथ में अमृत का कलश लिए और दूसरे में आयुर्वेद की पोथी। वे विष्णु के अवतार और आयुर्वेद के पिता माने जाते हैं, इसीलिए यह दिन सेहत का दिन भी है, सिर्फ़ धन का नहीं।
दूसरी कथा यम दीपदान की है, और यह लोक की कथा है। राजा हिम का एक बेटा था। उसकी कुंडली देखकर ज्योतिषियों ने कहा कि ब्याह के चौथे दिन साँप के काटने से उसकी मौत होगी। राजकुमार सोलह बरस का था जब उसका ब्याह हुआ। चौथी रात आई, और नई दुल्हन ने तय किया कि वह यह होने नहीं देगी।
उसने अपने सारे गहने और सोने चाँदी के सिक्के कमरे के दरवाज़े पर ढेर कर दिए, और चारों ओर दीये ही दीये जला दिए। पति को उसने सोने नहीं दिया; रात भर कहानियाँ सुनाती रही, गीत गाती रही। रात को यम साँप का रूप लेकर आए। पर दीयों की रोशनी और गहनों की चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं, और वे कमरे के भीतर नहीं जा पाए।
यम उसी ढेर पर टिक गए और रात भर दुल्हन के गीत और कहानियाँ सुनते रहे। सुबह हुई, घड़ी बीत गई, और वे चुपचाप लौट गए। राजकुमार बच गया। कहते हैं, तभी से इस दिन यम के लिए दीया जलाया जाता है, ताकि घर में किसी की अकाल मौत न हो।
कहाँ कैसे
धनतेरस कहाँ कैसे मनाया जाता है
उत्तर भारत
यहाँ धनतेरस सबसे ज़्यादा ख़रीदारी का दिन है। बाज़ार देर रात तक खुले रहते हैं, और शाम को प्रदोष काल में लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है।
गुजरात
व्यापारी परिवार चोपड़ा पूजा करते हैं, यानी नए हिसाब की बहियों की पूजा।
महाराष्ट्र
इससे एक दिन पहले वसु बारस होता है, जिसमें गाय और बछड़े की पूजा होती है।
गाँव
किसान अपने मवेशियों को सजाते और पूजते हैं, क्योंकि वही उनकी रोज़ी हैं; कई जगह गायों के सींग रँगे जाते हैं।
दक्षिण भारत
यहाँ धनतेरस उतना बड़ा नहीं, पर धन्वंतरि वाली बात पर ज़्यादा ज़ोर है, ख़ासकर उन घरों में जहाँ आयुर्वेद की परंपरा गहरी है।
रीत
धनतेरस के दिन क्या करते हैं
- घर की सफ़ाई होती है, दरवाज़े पर रंगोली बनती है, और चावल के आटे और कुमकुम से लक्ष्मी के छोटे पैर बनाए जाते हैं।
- सोना, चाँदी, या कम से कम एक नया बरतन ख़रीदा जाता है; पीतल, ताँबा और स्टील के बरतन शुभ माने जाते हैं।
- लोहा और कैंची चाकू जैसी धार वाली चीज़ें, शीशा, काली चीज़ें और तेल इस दिन ख़रीदने से बचते हैं।
- शाम को प्रदोष काल में लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है, और खील बताशे, मिठाई और फल चढ़ाए जाते हैं।
- घर के दरवाज़े के बाहर यम के लिए दीया दक्षिण की ओर मुँह करके जलाया जाता है, और वह रात भर जलता है।
- कई घरों में तेरस के दिन तेरह दीये जलते हैं।
- लक्ष्मी और धन्वंतरि के नाम के दीये भी रात भर जलते हैं।
रसोई
धनतेरस का खाना
- खील बताशे भुने धान की खील और चीनी के बताशे, लक्ष्मी कुबेर की पूजा का भोग।
सवाल जवाब
धनतेरस 2026: पूछे जाने वाले सवाल
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस 2026 में 6 नवंबर, शुक्रवार को है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर, सुबह 10:31 से 7 नवंबर, सुबह 10:48 तक है। प्रदोष काल शाम 5:33 से रात 7:57 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
धनतेरस पर बरतन या धातु क्यों ख़रीदते हैं?
मान्यता है कि इस दिन नया सोना, चाँदी या बरतन ख़रीदने से घर पर बुरी नज़र नहीं पड़ती और भाग अच्छा रहता है। सोना और चाँदी लक्ष्मी की धातुएँ मानी जाती हैं, और पीतल, ताँबे या स्टील का नया बरतन भी शुभ माना जाता है।
यम दीपदान क्या है और दीया किस दिशा में रखते हैं?
धनतेरस की शाम यम के लिए घर के बाहर एक दीया जलाया जाता है, जिसका मुँह दक्षिण की ओर होता है, क्योंकि दक्षिण यम की दिशा मानी जाती है। यह घर वालों को अकाल मौत से बचाने की प्रार्थना है।
धन्वंतरि कौन हैं?
धन्वंतरि देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के देवता हैं, जिन्हें विष्णु का अवतार माना जाता है। मान्यता है कि वे समुद्र मंथन से अमृत का कलश लेकर निकले थे, इसलिए धनतेरस धन्वंतरि जयंती भी है।
क्या आयुर्वेद दिवस अब भी धनतेरस को होता है?
नहीं। 2016 से आयुर्वेद दिवस धनतेरस को होता था, पर धनतेरस की तारीख़ हर साल बदलती है, इसलिए भारत सरकार ने 2025 से इसके लिए 23 सितंबर तय कर दिया है। धनतेरस अपनी जगह धन्वंतरि जयंती बनी रहती है।
धनतेरस पर क्या नहीं ख़रीदना चाहिए?
परंपरा से लोहा, कैंची चाकू जैसी धार वाली चीज़ें, शीशा, काली चीज़ें और तेल इस दिन नहीं ख़रीदे जाते। कुछ इलाक़ों में एल्यूमिनियम से भी बचते हैं।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Ayurveda Day: Press Information Bureau, Government of India (PDF)आयुर्वेद दिवस पहले धनतेरस को, 2016 से; 2025 से 23 सितंबर; धन्वंतरि देवताओं के वैद्य
- Dhanteras (Shubh Panchang)प्रदोष में लक्ष्मी कुबेर पूजा, धन्वंतरि और अमृत कलश, दक्षिण की ओर यम दीया, हिम के बेटे की कथा, क्या ख़रीदें क्या नहीं, गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण, खील बताशे
- The Great Mythological History Of Dhanteras (iTokri)हिम के बेटे की कथा, धन्वंतरि आयुर्वेद के पिता, तेरह दीये, धातु ख़रीदना
- Dhan Teras / Lakshmi Pujan (Swaminarayan)हिम की कथा, रंगोली और लक्ष्मी के पैर, रात भर दीये, गायों के सींग रँगना
- Dhanteras (Wikipedia)कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, धन्वंतरि का कलश और पोथी, मवेशियों की पूजा
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।