स्वाधिष्ठान चक्र: कहाँ है, बीज मंत्र वं, और 6 पंखुड़ियों पर कौन से अक्षर
स्वाधिष्ठान कुंडलिनी का दूसरा चक्र है: सुषुम्ना के भीतर, जननेंद्रिय की जड़ में। इसकी 6 पंखुड़ियाँ सिंदूरी लाल हैं, और उन पर ब, भ, म, य, र, ल लिखे हैं। बीच में जल का मंडल है, आधा चाँद, और उसमें बीज मंत्र वं।
स्वाधिष्ठान चक्र, एक नज़र में
| कहाँ | सुषुम्ना के भीतर, जननेंद्रिय की जड़ में। |
|---|---|
| पंखुड़ियाँ | 6, सिंदूरी लाल |
| पंखुड़ियों के अक्षर | ब भ म य र ल, बिजली जैसा चमकता |
| तत्व | जल |
| तत्व का मंडल | आधा चाँद, चमकता सफ़ेद |
| बीज मंत्र | वं, शरद के चाँद जैसा सफ़ेद |
| बीज का वाहन | मकर, मगर जैसा जलचर |
| देवता | हरि (विष्णु), भरी जवानी में, चार हाथ, पीले वस्त्र, छाती पर श्रीवत्स और कौस्तुभ |
| शक्ति | राकिणी, नीले कमल के भीतर जैसा रंग, उठे हुए हाथों में कई अस्त्र |
| षट्चक्रनिरूपण में | श्लोक 14 से 18 |
षट्चक्रनिरूपण में स्वाधिष्ठान
टीकाकार राघवभट्ट के अनुसार आधे चाँद के दोनों ओर दो कमल बनाए जाते हैं।
ग्रंथ के अनुसार इसके ध्यान का फल: इस कमल का ध्यान करने वाला अहंकार जैसे शत्रुओं से तुरंत छूटता है, योगियों में श्रेष्ठ होता है, और उसकी वाणी गद्य और पद्य में अमृत की तरह बहती है (श्लोक 18)।
स्वाधिष्ठान नाम का अर्थ
स्वाधिष्ठान का अर्थ है अपना ठिकाना: स्व यानी अपना, और अधिष्ठान यानी रहने की जगह।
बीज मंत्र वं
इस कमल का बीज वं है, जल तत्व का बीज। बीज छोटा और साफ़ बोला जाता है: पहले अक्षर, फिर होंठ धीरे से बंद करके नाक में गूँजती ध्वनि। सारे बीज, उनके वाहन और बोलने का सरल ढंग बीज मंत्र वाले पन्ने पर हैं।
स्वाधिष्ठान के बारे में जो आज कहा जाता है, पर ग्रंथ में नहीं
आज के चित्रों में स्वाधिष्ठान नारंगी रंग का होता है। षट्चक्रनिरूपण (श्लोक 14) में इसकी पंखुड़ियाँ सिंदूरी लाल हैं, और इसका जल मंडल सफ़ेद आधा चाँद।
बीजसेतु में स्वाधिष्ठान

बीजसेतु: कुंडलिनी, बीज मंत्र और आवाज़ का सच: एक साधक का शोध
बीजसेतु का हर हिस्सा एक चक्र है। खंड 2 इसी पर है: स्वाधिष्ठान: नियम, जहाँ नियम दिखता है।
- अध्याय 3: हर बीज वही अक्षर है जो उसके तत्व का अक्षर है
- अध्याय 4: बीज बेघर होंगे ही, यह संयोग नहीं, गणित है
इस कमल के बीच बीज वं है। पर व अक्षर किस कमल की पंखुड़ी पर लिखा है? यही बीजसेतु का पहला सवाल है।
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