आज्ञा चक्र: कहाँ है, बीज मंत्र ॐ, और 2 पंखुड़ियों पर कौन से अक्षर
आज्ञा कुंडलिनी का छठा चक्र है: दोनों भौंहों के बीच। इसकी 2 पंखुड़ियाँ चाँद जैसा सफ़ेद हैं, और उन पर ह और क्ष लिखे हैं। बीच में मन का मंडल है, त्रिकोण (योनि), और उसमें बीज मंत्र ॐ।
आज्ञा चक्र, एक नज़र में
| कहाँ | दोनों भौंहों के बीच। |
|---|---|
| पंखुड़ियाँ | 2, चाँद जैसा सफ़ेद |
| पंखुड़ियों के अक्षर | ह क्ष, सफ़ेद |
| तत्व | मन |
| तत्व का मंडल | त्रिकोण (योनि), उसमें बिजली की लड़ी जैसा चमकता इतर लिंग |
| बीज मंत्र | ॐ, दीये की लौ जैसा |
| बीज का वाहन | कोई नहीं बताया गया |
| देवता | इतर नाम का शिव, लिंग रूप में |
| शक्ति | हाकिनी, चाँद जैसे छह मुख और छह हाथ, शुद्ध मन वाली |
| षट्चक्रनिरूपण में | श्लोक 32 से 39 |
षट्चक्रनिरूपण में आज्ञा
यहाँ कोई स्थूल तत्व नहीं, मन रहता है। त्रिकोण में प्रणव (ॐ) है, उसके ऊपर आधा चाँद, बिंदु और नाद (श्लोक 33, 35)। इसके ऊपर महानाद है (श्लोक 39)।
ग्रंथ के अनुसार इसके ध्यान का फल: इसका ध्यान करने वाला मुनियों में श्रेष्ठ, सब जानने और देखने वाला, सबका हितकारी और शास्त्रों का ज्ञाता बनता है, और ब्रह्म से अपनी एकता जानता है (श्लोक 34)।
आज्ञा नाम का अर्थ
आज्ञा का अर्थ है आदेश। टीकाकार कालीचरण लिखते हैं: यहाँ भौंहों के बीच आज्ञा है।
बीज मंत्र ॐ
इस कमल का बीज ॐ है। बीज छोटा और साफ़ बोला जाता है: पहले अक्षर, फिर होंठ धीरे से बंद करके नाक में गूँजती ध्वनि। सारे बीज, उनके वाहन और बोलने का सरल ढंग बीज मंत्र वाले पन्ने पर हैं।
आज्ञा के बारे में जो आज कहा जाता है, पर ग्रंथ में नहीं
आज के कई चित्रों में आज्ञा का बीज क्षं लिखा होता है, और रंग नीला या जामुनी। षट्चक्रनिरूपण (श्लोक 33) में आज्ञा का बीज प्रणव, यानी ॐ है, और इसकी पंखुड़ियाँ चाँद जैसी सफ़ेद।
बीजसेतु में आज्ञा

बीजसेतु: कुंडलिनी, बीज मंत्र और आवाज़ का सच: एक साधक का शोध
बीजसेतु का हर हिस्सा एक चक्र है। खंड 6 इसी पर है: आज्ञा: सीमा, जहाँ बोली रुकती है।
- अध्याय 10: भूतशुद्धि में बीज हुक्म नहीं देते, रास्ता दिखाते हैं
- अध्याय 11: बोली गले पर पूरी हो जाती है, आज्ञा उससे ऊपर है
मूलाधार
स्वाधिष्ठान
मणिपूर
अनाहत
विशुद्ध
आज्ञा
सहस्रार