पंचांग 2027

आकाश खुल रहा है…

बीजों का घर

यह प्रयोग क्यों

पाँच तत्वों के बीज लं वं रं यं हं अपने कमल के बीच में लिखे जाते हैं, पर उनके अक्षर किसी दूसरे कमल की पंखुड़ियों पर हैं। बीजसेतु इसे बेघर बीज कहती है और पूछती है: क्या यह संयोग है, या नक़्शे की बनावट से ऐसा होना ही था? यह प्रयोग उस सवाल को गिनकर दिखाता है।

क्या करें

  1. “पचास पंखुड़ियाँ” में वर्णमाला को एक एक करके उतरते देखिए, फिर बीज के धागे।
  2. “चार ही क्यों” में मूलाधार की बाड़ 3, 4 या 5 पर खिसकाइए, फिर सारे बँटवारे गिनिए।
  3. “उलट पुलट परख” में एक बार, फिर हज़ार बार, फिर दो लाख बार उलट पुलट कीजिए।

क्या देखिए

  • एक भी बीज अपने ही कमल पर नहीं रुकता; हर धागा किसी और कमल तक जाता है।
  • मूलाधार की पंखुड़ियाँ 3 या 5 हों तो कोई बीज घर लौट आता है; सिर्फ़ 4 पर कोई नहीं।
  • अकेले “कोई बीज घर पर नहीं” होना लगभग 34 प्रतिशत बार संयोग से भी होता है; पर स्वाधिष्ठान पर ठीक य, र और ल का आना हज़ार में लगभग एक बार।

इसके हिस्से

पचास पंखुड़ियाँ

वर्णमाला किस क्रम में कमलों पर उतरती है, यह पूरे नक़्शे की नींव है।

  1. “वर्णमाला को उतरते देखिए” दबाइए।
  2. फिर “बीज के धागे”: हर बीज की पंखुड़ी से उसके अपने कमल तक एक धागा।

देखिए: 1 से 16 गले पर, 17 से 28 दिल पर, और आख़िरी दो अक्षर छलाँग लगाकर सबसे ऊपर आज्ञा पर। कोई धागा अपने ही कमल पर नहीं रुकता।

चार ही क्यों

मूलाधार की पंखुड़ियाँ चार ही क्यों हैं? अगर बाक़ी सब वैसा ही रहे, तो क्या दूसरी गिनती भी चल सकती थी?

  1. बाड़ को 3, 4 और 5 पर खिसकाइए और देखिए कौन सा बीज किस कमल में गिरता है।
  2. “सारे बँटवारे गिनिए” दबाइए: 4,495 बँटवारे, एक एक करके।

देखिए: जिन 325 बँटवारों में कोई बीज घर पर नहीं, उन सबमें मूलाधार की ठीक चार पंखुड़ियाँ हैं।

उलट पुलट परख

असली नक़्शा कितना ख़ास है, यह जानने का सीधा तरीक़ा: अक्षरों को बिना क्रम के बाँटकर देखिए कि वही बात कितनी बार होती है।

  1. “एक बार” दबाइए और देखिए बीज कहाँ गिरे।
  2. फिर हज़ार बार, फिर दो लाख बार, और किताब के अंकों से मिलाइए।

देखिए: जितनी ज़्यादा बार उलट पुलट, अंक उतने ही किताब के अंकों के पास आते हैं: लगभग 34 प्रतिशत, और हज़ार में एक।

स्वर से बीज

पाणिनि का एक नियम गले के स्वरों को बीज के अक्षरों में बदल देता है: इ उ ऋ ऌ से य व र ल।

  1. पाँचों जोड़ों में से एक चुनिए और पहिए पर तत्व से तत्व तक का तीर देखिए।

देखिए: हर बीज अपने स्वर के तत्व से एक क़दम पीछे है, अपनी माँ की ओर, उसी क्रम में जो तैत्तिरीय उपनिषद सृष्टि का बताता है।

इससे क्या मिलता है

संयोग और नियम में फ़र्क़ करना। जो बात संयोग से भी अक्सर हो जाती है, उसे चमत्कार न मानना; और जो सच में दुर्लभ है, उसे पहचानना।

रोज़ की ज़िंदगी में

किसी भी “अद्भुत संयोग” की ख़बर पर यह पूछना कि ऐसा संयोग से कितनी बार होता। यह सवाल अंक ज्योतिष से लेकर बाज़ार की भविष्यवाणियों तक काम आता है।

ध्यान में

बीज मंत्रों को उनके तत्व और कमल के साथ जानना जप को अंधा नहीं रहने देता: लं धरती का बीज है, मूलाधार के बीच लिखा जाता है। और ध्यान के अपने अनुभवों पर भी यही ईमानदारी काम आती है: जो हर किसी को हो सकता है, उसे सिद्धि न मानना। यह प्रयोग नक़्शा देता है, अभ्यास नहीं सिखाता।

यहाँ जो दिखता है, वह नक़्शा और हिसाब है, किसी मंत्र का असर नहीं। अनुभव हर व्यक्ति का अपना होता है; कोई प्रयोग उसका वादा नहीं करता।

रास्ता नक़्शा है, मंत्र का असर नहीं। ये गिनतियाँ बताती हैं कि षट्चक्रनिरूपण के नक़्शे की बनावट क्या है; यह नहीं कि किसी ने इसे जानबूझकर रचा, और न यह कि शरीर में कुछ इसी रास्ते से चलता है।

बीजों के घर पर सवाल जवाब

बेघर बीज क्या हैं?

पाँच तत्वों के बीज लं, वं, रं, यं और हं अपने अपने कमल के बीच में लिखे जाते हैं, पर उनके अक्षर ल, व, र, य और ह पंखुड़ियों पर किसी दूसरे कमल में हैं: ल, र और य स्वाधिष्ठान पर, व मूलाधार पर, ह आज्ञा पर। बीजसेतु इन्हें बेघर बीज कहता है, और साबित करता है कि वर्णमाला के क्रम और मूलाधार की चार पंखुड़ियों के साथ ऐसा होना ही है।

मूलाधार की चार ही पंखुड़ियाँ क्यों?

अक्षर क्रम से कमलों पर उतरते हैं। मूलाधार की तीन पंखुड़ियाँ हों, तो व स्वाधिष्ठान में चला जाता है और जल का बीज घर लौट आता है; पाँच हों, तो ल मूलाधार में आ जाता है और धरती का बीज घर लौट आता है। सिर्फ़ चार पर कोई बीज घर नहीं लौटता। 32 व्यंजनों के सारे 4,495 बँटवारों में से जिन 325 में कोई बीज घर पर नहीं, उन सबमें मूलाधार की ठीक चार पंखुड़ियाँ हैं।

उलट पुलट परख क्या है?

पचास अक्षरों को बिना क्रम के उलट पुलट करके 4, 6, 10, 12, 16 और 2 की ढेरियों में बाँटा जाता है, और गिना जाता है कि कितनी बार वही बात होती है जो असली नक़्शे में है। कोई भी बीज अपने घर पर न हो, यह लगभग 34 प्रतिशत बार होता है, यानी अकेले यह दुर्लभ नहीं; पर स्वाधिष्ठान पर ठीक य, र और ल का आ जाना हज़ार में लगभग एक बार।

यह सब किताब में

प्रमेय, उनके प्रमाण और ग्रंथों के हवाले पहली किताब बीजसेतु: अक्षरों का नक़्शा में हैं। मनु प्रयोगशाला के बाक़ी प्रयोग

The home of the seeds, in English

The alphabet walks down the six lotuses from the throat to the root and jumps to the brow; gold threads run from each element seed's petal to its own lotus, and none ends at home. Move the root lotus's fence, count all 4,495 ways of splitting the 32 consonants (325 leave every seed homeless, all with exactly four root petals), shuffle the fifty letters up to two hundred thousand times, and watch the vowels i, u, r and l become the seeds ya, va, ra and la, one step back on the circle of creation.