मणिपूर चक्र: कहाँ है, बीज मंत्र रं, और 10 पंखुड़ियों पर कौन से अक्षर
मणिपूर कुंडलिनी का तीसरा चक्र है: स्वाधिष्ठान के ऊपर, नाभि की जड़ में। इसकी 10 पंखुड़ियाँ पानी से भरे बादलों जैसा गहरा हैं, और उन पर ड से फ तक दस व्यंजन लिखे हैं। बीच में अग्नि का मंडल है, त्रिकोण, और उसमें बीज मंत्र रं।
मणिपूर चक्र, एक नज़र में
| कहाँ | स्वाधिष्ठान के ऊपर, नाभि की जड़ में। |
|---|---|
| पंखुड़ियाँ | 10, पानी से भरे बादलों जैसा गहरा |
| पंखुड़ियों के अक्षर | ड ढ ण त थ द ध न प फ, नीले कमल जैसा |
| तत्व | अग्नि |
| तत्व का मंडल | त्रिकोण, उगते सूरज जैसा चमकता, बाहर तीन स्वस्तिक |
| बीज मंत्र | रं |
| बीज का वाहन | मेढ़ा |
| देवता | रुद्र, शुद्ध सिंदूरी रंग के, पर देह पर मली भस्म से सफ़ेद दिखते, वर और अभय मुद्रा में |
| शक्ति | लाकिनी, चार हाथ, साँवला रंग, पीले वस्त्र |
| षट्चक्रनिरूपण में | श्लोक 19 से 21 |
षट्चक्रनिरूपण में मणिपूर
अग्नि देवता चार हाथ वाले, उगते सूरज जैसे, मेढ़े पर सवार बताए गए हैं (श्लोक 20)।
ग्रंथ के अनुसार इसके ध्यान का फल: नाभि के इस कमल का ध्यान करने से संसार को रचने और मिटाने की शक्ति मिलती है (श्लोक 21)।
मणिपूर नाम का अर्थ
मणिपूर का अर्थ है मणियों से भरा हुआ: मणि यानी रत्न, और पूर यानी भरा हुआ, या नगर।
बीज मंत्र रं
इस कमल का बीज रं है, अग्नि तत्व का बीज। बीज छोटा और साफ़ बोला जाता है: पहले अक्षर, फिर होंठ धीरे से बंद करके नाक में गूँजती ध्वनि। सारे बीज, उनके वाहन और बोलने का सरल ढंग बीज मंत्र वाले पन्ने पर हैं।
मणिपूर के बारे में जो आज कहा जाता है, पर ग्रंथ में नहीं
आज के चित्रों में मणिपूर पीला होता है। षट्चक्रनिरूपण (श्लोक 19) में इसकी पंखुड़ियाँ बरसाती बादलों के रंग की हैं, और आग का त्रिकोण लाल।
बीजसेतु में मणिपूर

बीजसेतु: कुंडलिनी, बीज मंत्र और आवाज़ का सच: एक साधक का शोध
बीजसेतु का हर हिस्सा एक चक्र है। खंड 3 इसी पर है: मणिपूर: जन्म, जहाँ बीज जन्म लेते हैं।
- अध्याय 5: चारों बीज गले के कमल से उतरे हैं
- अध्याय 6: हर स्वर बीज बनकर अपने तत्व की माँ का नाम लेता है
इस कमल के बीच बीज रं है। पर र अक्षर किस कमल की पंखुड़ी पर लिखा है? यही बीजसेतु का पहला सवाल है।
मूलाधार
स्वाधिष्ठान
मणिपूर
अनाहत
विशुद्ध
आज्ञा
सहस्रार