पंचांग 2027

कुंडलिनी · सात चक्र

मणिपूर चक्र: कहाँ है, बीज मंत्र रं, और 10 पंखुड़ियों पर कौन से अक्षर

सीधा जवाब

मणिपूर कुंडलिनी का तीसरा चक्र है: स्वाधिष्ठान के ऊपर, नाभि की जड़ में। इसकी 10 पंखुड़ियाँ पानी से भरे बादलों जैसा गहरा हैं, और उन पर ड से फ तक दस व्यंजन लिखे हैं। बीच में अग्नि का मंडल है, त्रिकोण, और उसमें बीज मंत्र रं।

मणिपूर चक्र का कमल, षट्चक्रनिरूपण के वर्णन से: 10 पंखुड़ियाँ, उन पर ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, बीच में त्रिकोण और बीज रंडढणतथदधनपफरं
मणिपूर, षट्चक्रनिरूपण के श्लोक 19 से 21 के वर्णन से बना चित्र।

मणिपूर चक्र, एक नज़र में

मणिपूर चक्र, एक नज़र में
कहाँस्वाधिष्ठान के ऊपर, नाभि की जड़ में।
पंखुड़ियाँ10, पानी से भरे बादलों जैसा गहरा
पंखुड़ियों के अक्षरड ढ ण त थ द ध न प फ, नीले कमल जैसा
तत्वअग्नि
तत्व का मंडलत्रिकोण, उगते सूरज जैसा चमकता, बाहर तीन स्वस्तिक
बीज मंत्ररं
बीज का वाहनमेढ़ा
देवतारुद्र, शुद्ध सिंदूरी रंग के, पर देह पर मली भस्म से सफ़ेद दिखते, वर और अभय मुद्रा में
शक्तिलाकिनी, चार हाथ, साँवला रंग, पीले वस्त्र
षट्चक्रनिरूपण मेंश्लोक 19 से 21

षट्चक्रनिरूपण में मणिपूर

अग्नि देवता चार हाथ वाले, उगते सूरज जैसे, मेढ़े पर सवार बताए गए हैं (श्लोक 20)।

ग्रंथ के अनुसार इसके ध्यान का फल: नाभि के इस कमल का ध्यान करने से संसार को रचने और मिटाने की शक्ति मिलती है (श्लोक 21)।

मणिपूर नाम का अर्थ

मणिपूर का अर्थ है मणियों से भरा हुआ: मणि यानी रत्न, और पूर यानी भरा हुआ, या नगर।

बीज मंत्र रं

इस कमल का बीज रं है, अग्नि तत्व का बीज। बीज छोटा और साफ़ बोला जाता है: पहले अक्षर, फिर होंठ धीरे से बंद करके नाक में गूँजती ध्वनि। सारे बीज, उनके वाहन और बोलने का सरल ढंग बीज मंत्र वाले पन्ने पर हैं।

मणिपूर के बारे में जो आज कहा जाता है, पर ग्रंथ में नहीं

आज के चित्रों में मणिपूर पीला होता है। षट्चक्रनिरूपण (श्लोक 19) में इसकी पंखुड़ियाँ बरसाती बादलों के रंग की हैं, और आग का त्रिकोण लाल।

बीजसेतु में मणिपूर

बीजसेतु का कवर: गहरे नीले पर पाँच घेरे, नीचे से ऊपर के पाँच कमल, उन पर पंखुड़ियों के अक्षर, और सुनहरे अक्षरों में पाँच बीज

बीजसेतु: कुंडलिनी, बीज मंत्र और आवाज़ का सच: एक साधक का शोध

बीजसेतु का हर हिस्सा एक चक्र है। खंड 3 इसी पर है: मणिपूर: जन्म, जहाँ बीज जन्म लेते हैं।

  1. अध्याय 5: चारों बीज गले के कमल से उतरे हैं
  2. अध्याय 6: हर स्वर बीज बनकर अपने तत्व की माँ का नाम लेता है

इस कमल के बीच बीज रं है। पर र अक्षर किस कमल की पंखुड़ी पर लिखा है? यही बीजसेतु का पहला सवाल है।

बीजसेतु का पूरा अनुक्रम देखिए

सवाल जवाब

मणिपूर चक्र पर सवाल

मणिपूर चक्र कहाँ होता है?

स्वाधिष्ठान के ऊपर, नाभि की जड़ में।

मणिपूर चक्र का बीज मंत्र क्या है?

रं। यह अग्नि का बीज है, और षट्चक्रनिरूपण के अनुसार इसका वाहन मेढ़ा है।

मणिपूर चक्र में कितनी पंखुड़ियाँ हैं, और उन पर कौन से अक्षर लिखे हैं?

10 पंखुड़ियाँ, पानी से भरे बादलों जैसा गहरा, और उन पर ड ढ ण त थ द ध न प फ लिखे हैं, नीले कमल जैसा रंग में।

मणिपूर चक्र का रंग और तत्व क्या है?

षट्चक्रनिरूपण के अनुसार इसकी पंखुड़ियाँ पानी से भरे बादलों जैसा गहरा हैं। तत्व: अग्नि। बीच का मंडल: त्रिकोण, उगते सूरज जैसा चमकता, बाहर तीन स्वस्तिक। आज के चित्रों के इंद्रधनुषी रंग 1927 में जोड़े गए, ग्रंथ के नहीं।

मणिपूर चक्र के देवता और शक्ति कौन हैं?

देवता: रुद्र, शुद्ध सिंदूरी रंग के, पर देह पर मली भस्म से सफ़ेद दिखते, वर और अभय मुद्रा में। शक्ति: लाकिनी, चार हाथ, साँवला रंग, पीले वस्त्र।

Manipura chakra, in English

Manipura (Maṇipūra) is the third chakra of Kundalini, located at the navel. In the Ṣaṭcakranirūpaṇa (verses 19-21) it has 10 petals bearing the letters ड ढ ण त थ द ध न प फ, the element fire, and the seed mantra रं, with the mount, deity and Shakti the text names. The petal colours given here are the text's own; the rainbow colours of modern charts are not in it.

मणिपूर चक्र के स्रोत

  1. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 19 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  2. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 20 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  3. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 21 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  4. आर्थर एवलॉन, द सर्पेंट पावर (1919), भूमिका का पाँचवाँ अध्याय: चक्र या कमल
  5. Manipura (Wikipedia)

षट्चक्रनिरूपण के श्लोकों की संख्या आर्थर एवलॉन (जॉन वुडरॉफ़) के अनुवाद द सर्पेंट पावर (1919) के अनुसार है, जैसा wisdomlib छापता है। हठयोगप्रदीपिका की संख्या उसके आम छपे पाठ के अनुसार है; कुछ संस्करणों में एक दो श्लोक आगे पीछे हो सकते हैं।