मनु विश्रांति दर्शन की तीसरी किताब: आवाज़ और मंत्र
नाददूत
मंत्र और आवाज़ सच में क्या कर सकते हैं, और क्या नहीं
ग्रंथ, कथा और प्रयोग, तीनों तराज़ुओं पर
नाददूत मनु विश्रांति की हिंदी किताब है, इस पर कि मंत्र और आवाज़ सच में क्या कर सकते हैं, और क्या नहीं। अठारह अध्याय हैं, और हर दावा तीन तराज़ुओं पर रखा गया है: ग्रंथ क्या कहते हैं, कथा कहाँ से आई, और प्रयोगों में क्या नापा गया।

पीछे के कवर से
नाददूत किन सवालों को तौलती है
आवाज़ और मंत्र की ताक़त पर बहुत कुछ कहा जाता है, और बहुत कुछ बेचा भी जाता है। यह किताब सच और कहानी को अलग करके दिखाती है, आस्था को चोट पहुँचाए बिना।
आवाज़ कब आग बुझा देती है और कब सिर्फ़ छेड़ती है। जप शरीर में सबसे पहले क्या बदलता है। आपकी साँस जन्म से कौन सा जाप कर रही है। वरदान और श्राप किस नियम से फलते हैं, गांधारी की आँख की असली कथा क्या है, और घास का तिनका अस्त्र कैसे बनता है।
साथ में कुछ सरल, सुरक्षित अभ्यास, जिनका असर नापा जा चुका है: धीमी साँस वाला जप, गुनगुनाना, सुनने का अभ्यास, और सच बोलने की आदत।
आवाज़ ख़बर लाती है, ताक़त सुनने वाला देता है।
अनुक्रम
नाददूत के अठारह अध्याय: आवाज़, मंत्र और वाणी
18 अध्याय, 3 हिस्सों में।
- भूमिका
खंड 1
आवाज़ बाहर क्या करती है: नाप और कथाएँ
आग, कान, देवता, राग, यंत्र और जप
- 1आवाज़ काम नहीं करती, छेड़ती है
- 2मुसीबत में पड़ी आग 250 गुना धीमी आवाज़ से बुझ जाती है
- 3आवाज़ ख़बर लाती है, ताक़त सुनने वाला देता है
- 4कथाओं में देवता सुनता है, तत्व अपना रास्ता नहीं छोड़ता
- 5दीपक राग की आग की कहानी तानसेन के समय की नहीं
- 6शरीर पहला यंत्र है, बाहर का यंत्र उसका सहारा
- 7जप सबसे पहले साँस को धीमा करता है
खंड 2
मंत्र और शरीर: उपचार, साँस और उम्र
रोग, साँस, धड़कन, बुढ़ापा और शरीर पर रखे अक्षर
- 8ग्रंथों में कोई मंत्र अकेले रोग नहीं हरता
- 9जिसके लिए प्रार्थना हुई, उसे पता न हो तो कुछ नहीं बदलता
- 10हर साँस एक जाप है, जो जन्म से चल रहा है
- 11हर जीव को लगभग एक अरब धड़कनें मिलती हैं, मनुष्य उससे आगे निकल गया
- 12बुढ़ापा उलटने का वादा ग्रंथों में है, सबूत अभी नहीं
- 13अक्षर शरीर पर कवच बनते हैं, पत्थर नहीं
खंड 3
वरदान, श्राप और अस्त्र: सच, तप और मंत्र
वाणी कब फलती है, और किसकी क़ीमत पर
- 14सच्चे का बोला खाली नहीं जाता
- 15श्राप देने वाला अपनी कमाई ख़र्च करता है
- 16गांधारी की आँख बचाती नहीं थी, जलाती थी
- 17घास का तिनका भी अस्त्र बन जाता है
- 18मंत्र तीर को नहीं, तीर चलाने वाले को तैयार करता है
- परिशिष्ट: तरीक़ा और आँकड़े
- शब्दकोश
- ग्रंथ सूची
- टिप्पणियाँ
- जाँच जारी
- अनुक्रमणिका
नाददूत की भूमिका
आवाज़ के चमत्कार, तीन तराज़ुओं पर
बचपन से हम ऐसी कथाएँ सुनते आए हैं जिनमें आवाज़ चमत्कार करती है। तानसेन गाते हैं और दीये जल उठते हैं। कुंती एक मंत्र पढ़ती हैं और सूरज सामने आ खड़ा होता है। ऋषि का एक वचन वरदान बन जाता है, और एक वचन श्राप। घास का एक तिनका मंत्र पाकर अस्त्र बन जाता है। आज भी कोई कटोरा बजाकर चक्र खोलने का वादा करता है, तो कोई एक आवृत्ति को ब्रह्मांड की आवाज़ बताता है।
यह किताब इन बातों को एक एक करके तौलने का मेरा शोध है। सवाल सीधा है: आवाज़ और मंत्र सच में क्या कर सकते हैं, और क्या नहीं।
हर बात तीन तराज़ुओं पर रखी गई है। ग्रंथ क्या कहते हैं, उनके अपने शब्दों में। कथा कहाँ से आई, और सबसे पहले कब लिखी मिली। और आज के प्रयोगों में क्या नापा गया, कितने लोगों पर। जहाँ तीनों मिलते हैं, वहाँ बात मज़बूत है। जहाँ नहीं मिलते, वहाँ वही लिखा है।
किताब तीन हिस्सों में चलती है। पहला हिस्सा बाहर की दुनिया का है: आवाज़ की असली ताक़त कितनी है, आग, पानी और पत्थर उसे कैसे सुनते हैं, और सुनने वाले के भीतर क्या होता है। दूसरा हिस्सा शरीर में उतरता है: मंत्र से उपचार, वह साँस जो जन्म से अपने आप एक जाप की तरह चल रही है, धड़कनों की गिनती, बुढ़ापे के वादे, और शरीर पर रखे जाने वाले अक्षर। तीसरा हिस्सा वाणी की सबसे पुरानी ताक़त का है: सच्चे का बोला क्यों खाली नहीं जाता, श्राप देने वाला क्या खोता है, गांधारी की आँख सच में क्या करती थी, और मंत्र तीर को नहीं, तीर चलाने वाले को कैसे तैयार करता है।
जो मिला, वह कथाओं से कम चमत्कारी है, पर कहीं ज़्यादा गहरा। आवाज़ बाहर बहुत कम करती है। उसकी असली ताक़त सुनने वाले के भीतर खुलती है, और उस भीतर को सच और तप साधते हैं।
इस किताब में बहुत से लोगों का काम है: जैमिनि, पतंजलि और धर्मकीर्ति से लेकर कान, आग और साँस पर काम करने वाले आज के वैज्ञानिकों तक। जहाँ जिसकी बात आई है, वहीं उसका नाम है।
यह मनु विश्रांति दर्शन की तीसरी किताब है। कमलों की पंखुड़ियों पर अक्षरों का नक़्शा पहली किताब "बीजसेतु" में है, और शब्दों का अर्थ और चीज़ों के नाम कहाँ से आते हैं, यह दूसरी किताब "अर्थबीज" में। उन दोनों के बाद यह किताब बोली हुई आवाज़ तक आती है। फिर भी यह उनके बिना पूरी पढ़ी जा सकती है।
किताब में चार छोटे निशान मिलेंगे, ताकि पाठक जान सके कि किस बात को किस तरह तौलना है:
- ✦सिद्ध
- गणित से साबित। काग़ज़ और पेंसिल लेकर कोई भी दोहरा सकता है।
- ◆परखा हुआ
- ग्रंथ के छपे पाठ से, या किसी छपे प्रयोग और शोध से मिलाया हुआ।
- ○खुला प्रश्न
- अभी उत्तर अधूरा है।
- ❀मनु विश्रांति दर्शन
- जहाँ शोध की भाषा रुकती है, और साधक बोलता है।
हर अध्याय के अंत के पास एक छोटा अभ्यास है। आवाज़ को समझने का सबसे सीधा रास्ता उसे बोलकर और सुनकर देखना है।
मनु विश्रांति, देहरादून
नाददूत से जुड़े विषय
कुंडलिनी के वे सवाल, जिनके जवाब इस साइट पर अपने अपने पन्ने पर हैं।
इन किताबों के अभ्यास जानकारी और अपने अनुभव के लिए हैं। ये किसी रोग का इलाज नहीं हैं। किसी भी परेशानी में डॉक्टर से मिलें, और गहरी साधना किसी अनुभवी गुरु की देखरेख में करें।
© मनु विश्रांति। सर्वाधिकार लेखक के पास। इन किताबों के विचार, तालिकाएँ, चित्र और गिनतियाँ लेखक का शोध हैं; लेखक की लिखित अनुमति के बिना इनका कोई भी हिस्सा छापा या किसी और रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। समीक्षा या शोध में लेखक के नाम के साथ छोटे उद्धरण दिए जा सकते हैं।
इन किताबों के बारे में लिखना हो, तो: manuvishranti@gmail.com
नाददूत पर सवाल जवाब
नाददूत किताब किस बारे में है?
नाददूत उन कथाओं और दावों को तौलती है जिनमें आवाज़ चमत्कार करती है: तानसेन के गाने से जलते दीये, कुंती का मंत्र, ऋषियों के वरदान और श्राप, और आज के कटोरे और आवृत्तियाँ। हर बात तीन तराज़ुओं पर रखी गई है: ग्रंथ क्या कहते हैं, कथा कहाँ से आई और सबसे पहले कब लिखी मिली, और आज के प्रयोगों में क्या नापा गया।
क्या मंत्र से रोग ठीक होता है?
नाददूत का आठवाँ अध्याय यही परखता है, और उसका शीर्षक ही उत्तर है: ग्रंथों में कोई मंत्र अकेले रोग नहीं हरता। किताब के अभ्यास जानकारी और अपने अनुभव के लिए हैं, किसी रोग का इलाज नहीं। किसी भी परेशानी में डॉक्टर से मिलें।
क्या दीपक राग गाने से दीये जलते थे?
नाददूत का पाँचवाँ अध्याय इस कथा का इतिहास खोजता है, और पाता है कि दीपक राग की आग की कहानी तानसेन के समय की नहीं, बाद में लिखी मिलती है।
जप शरीर में सबसे पहले क्या बदलता है?
नाददूत के सातवें अध्याय के अनुसार, जप सबसे पहले साँस को धीमा करता है। किताब के अभ्यासों में धीमी साँस वाला जप, गुनगुनाना, सुनने का अभ्यास और सच बोलने की आदत हैं, जिनका असर नापा जा चुका है।
Naaddoot in English
Naaddoot (नाददूत), the third book of Manu Vishranti Darshan, in Hindi: "What mantra and sound can really do, and what they cannot". It weighs the old stories and the new claims about sound, from Tansen's Deepak raga and Kunti's mantra to boons, curses and singing bowls, on three scales: what the texts say, where the story came from and when it was first written down, and what experiments have measured. Eighteen chapters in three parts, with simple practices whose effect has been measured.
