पंचांग 2027

कुंडलिनी · सात चक्र

सहस्रार चक्र: सिर के ऊपर हज़ार पंखुड़ियों वाला कमल

सीधा जवाब

सहस्रार सारे चक्रों के ऊपर, सिर के शीर्ष पर, हज़ार पंखुड़ियों वाला कमल है। षट्चक्रनिरूपण इसे पूरे चाँद से भी उजला बताता है, और कहता है कि इसकी पंखुड़ियों पर अ से शुरू होने वाले अक्षर हैं। इसका न कोई तत्व है, न कोई बीज। इसके बीच पूरा चाँद है, उसमें बिजली जैसा त्रिकोण, और वहाँ परमशिव। कुंडलिनी की यात्रा यहीं पहुँचती है।

सहस्रार चक्र का कमल, षट्चक्रनिरूपण के वर्णन से: हज़ार उजली पंखुड़ियाँ, और बीच में पूरा चाँद
सहस्रार, षट्चक्रनिरूपण के श्लोक 40 से 49 के वर्णन से बना चित्र।

सहस्रार चक्र, एक नज़र में

सहस्रार चक्र, एक नज़र में
कहाँसारे चक्रों के ऊपर, सिर के शीर्ष पर, उस ख़ाली जगह में जहाँ शंखिनी नाड़ी है।
पंखुड़ियाँहज़ार, पूरे चाँद से भी उजला सफ़ेद
पंखुड़ियों के अक्षरअ से शुरू होने वाले अक्षर; एवलॉन के अनुसार पचास अक्षर, बीस बार
तत्वकोई नहीं, सब तत्वों से परे
तत्व का मंडलपूरा चाँद, उसमें बिजली जैसा त्रिकोण, और उसमें महाशून्य
बीज मंत्रकोई नहीं
बीज का वाहनकोई नहीं
देवतापरमशिव, जो सबके ब्रह्म और आत्मा हैं
शक्तिनिर्वाण शक्ति, तीनों लोकों की माँ
षट्चक्रनिरूपण मेंश्लोक 40 से 49

षट्चक्रनिरूपण में सहस्रार

इसकी पंखुड़ियों पर अ से शुरू होने वाले अक्षर हैं (श्लोक 40)। एवलॉन लिखते हैं कि पचास अक्षर बीस बार दोहराए गए हैं, और इस तरह हज़ार पंखुड़ियाँ भरती हैं। यहीं अमा कला, निर्वाण कला और निर्वाण शक्ति हैं (श्लोक 46 से 48)।

ग्रंथ के अनुसार इसके ध्यान का फल: जो इस जगह को जानता है और मन को साध लेता है, वह फिर जन्म नहीं लेता, और उसकी वाणी शुद्ध और मधुर हो जाती है (श्लोक 45)।

सहस्रार नाम का अर्थ

सहस्रार का अर्थ है हज़ार आरों वाला: सहस्र यानी हज़ार, और आर यानी पहिये की तीली। यहाँ हज़ार पंखुड़ियाँ हैं।

सहस्रार के बारे में जो आज कहा जाता है, पर ग्रंथ में नहीं

आज के कई चित्रों में सहस्रार बैंगनी होता है, और कुछ लिखते हैं कि इसकी पंखुड़ियों पर कोई अक्षर नहीं। षट्चक्रनिरूपण (श्लोक 40) में यह कमल पूरे चाँद से उजला है, और इसकी पंखुड़ियों पर अक्षर हैं।

बीजसेतु में सहस्रार

बीजसेतु का कवर: गहरे नीले पर पाँच घेरे, नीचे से ऊपर के पाँच कमल, उन पर पंखुड़ियों के अक्षर, और सुनहरे अक्षरों में पाँच बीज

बीजसेतु: कुंडलिनी, बीज मंत्र और आवाज़ का सच: एक साधक का शोध

बीजसेतु का हर हिस्सा एक चक्र है। समापन इसी पर है: सहस्रार: सेतु, जहाँ हर अक्षर घर लौटता है।

  1. अध्याय 12: सहस्रार पर कोई बेघर नहीं

बीजसेतु का पूरा अनुक्रम देखिए

सवाल जवाब

सहस्रार चक्र पर सवाल

सहस्रार चक्र कहाँ होता है?

सारे चक्रों के ऊपर, सिर के शीर्ष पर, उस ख़ाली जगह में जहाँ शंखिनी नाड़ी है। यह सब चक्रों के ऊपर है।

सहस्रार चक्र का बीज मंत्र क्या है?

षट्चक्रनिरूपण सहस्रार का कोई बीज और कोई तत्व नहीं बताता। वह सब तत्वों से परे है।

सहस्रार चक्र में कितनी पंखुड़ियाँ हैं, और उन पर कौन से अक्षर लिखे हैं?

हज़ार पंखुड़ियाँ। षट्चक्रनिरूपण (श्लोक 40) कहता है कि उन पर अ से शुरू होने वाले अक्षर हैं, और एवलॉन के अनुसार पचास अक्षर बीस बार दोहराए गए हैं।

सहस्रार चक्र का रंग और तत्व क्या है?

षट्चक्रनिरूपण के अनुसार इसकी पंखुड़ियाँ पूरे चाँद से भी उजला सफ़ेद हैं। तत्व: कोई नहीं, सब तत्वों से परे। बीच का मंडल: पूरा चाँद, उसमें बिजली जैसा त्रिकोण, और उसमें महाशून्य। आज के चित्रों के इंद्रधनुषी रंग 1927 में जोड़े गए, ग्रंथ के नहीं।

सहस्रार चक्र के देवता और शक्ति कौन हैं?

देवता: परमशिव, जो सबके ब्रह्म और आत्मा हैं। शक्ति: निर्वाण शक्ति, तीनों लोकों की माँ।

Sahasrara chakra, in English

Sahasrara (Sahasrāra) is the thousand-petalled lotus above all the chakras, at the crown of the head. In the Ṣaṭcakranirūpaṇa (verses 40-49) its petals are whiter than the full moon and carry the letters beginning with A (fifty letters repeated twenty times, per Avalon). It has no element and no seed; within it are the full moon, a lightning-like triangle and Parama Shiva, where the journey of Kundalini ends before she returns to Muladhara.

सहस्रार चक्र के स्रोत

  1. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 40 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  2. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 41 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  3. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 42 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  4. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 45 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  5. आर्थर एवलॉन, द सर्पेंट पावर (1919), भूमिका का पाँचवाँ अध्याय: चक्र या कमल
  6. Sahasrara (Wikipedia)

षट्चक्रनिरूपण के श्लोकों की संख्या आर्थर एवलॉन (जॉन वुडरॉफ़) के अनुवाद द सर्पेंट पावर (1919) के अनुसार है, जैसा wisdomlib छापता है। हठयोगप्रदीपिका की संख्या उसके आम छपे पाठ के अनुसार है; कुछ संस्करणों में एक दो श्लोक आगे पीछे हो सकते हैं।