पंचांग 2027

मनु विश्रांति दर्शन की दूसरी किताब: शब्द, अर्थ और नाम

अर्थबीज

शब्दों का अर्थ और चीज़ों के नाम कहाँ से आते हैं

बीस हज़ार शब्दों की परख, और किसी भी चीज़ का नाम रखने के आठ नियम

अर्थबीज मनु विश्रांति की हिंदी किताब है, इस सवाल पर कि संस्कृत शब्दों का अर्थ कहाँ से आता है, और हर चीज़ का नाम वही क्यों है जो है। कुंडलिनी के चित्र में कमलों पर लिखे अक्षरों से चलकर यह बीस हज़ार से ज़्यादा शब्दों को परखती है। तेरह अध्याय हैं, और आख़िर में कोई भी नाम रखने के आठ नियम।

अर्थबीज का कवर: गहरे नीले पर एक सुनहरा बीज, धातु पा, और उससे उगते शब्द: पानी, पेय, पात्र, पिपासा, पादप और सूर्यप

पीछे के कवर से

अर्थबीज में आप क्या पाएँगे

इसे पेड़ क्यों कहते हैं, और इसे पानी क्यों? हर नाम के भीतर एक काम छिपा है। यह किताब उसे खोलना सिखाती है।

बीस हज़ार से ज़्यादा संस्कृत शब्दों पर परखकर यह दिखाती है कि अर्थ अक्षर में नहीं, धातु में रहता है। आप देखेंगे कि ऋषियों ने चीज़ों के नाम कैसे रखे, डॉल्फ़िन अपने साथी को उसका नाम लेकर कैसे पुकारती है, और बच्चा पेट में ही माँ की धुन कैसे सीख लेता है।

आप किसी भी नाम को सात क़दम में खोल सकेंगे, अपने नाम की लहर शरीर के कमलों पर ख़ुद खींच सकेंगे, और किसी भी चीज़ का नाम आठ सरल नियमों से रख सकेंगे। साथ में वे आकर्षक अंदाज़े भी, जो जाँच में नहीं टिके, ताकि अक्षरों के नाम पर बिकने वाले दावे आपको धोखा न दें।

हर नाम के भीतर एक काम छिपा है।

अनुक्रम

अर्थबीज के तेरह अध्याय, अक्षर से नाम तक

13 अध्याय, 4 हिस्सों में।

  • भूमिका
  1. खंड 1

    अक्षर और अर्थ: नक़्शा और धातु

    अक्षर कमलों पर लिखे हैं, अर्थ धातु में

    1. 1हर अक्षर शरीर के किसी कमल पर लिखा है
    2. 2अर्थ अक्षर में नहीं, धातु में रहता है
  2. खंड 2

    नाम कहाँ से आते हैं: काम, पुकार और पालना

    ऋषि, जानवर और बच्चे नाम कैसे पाते हैं

    1. 3हर चीज़ का नाम उसके काम से पड़ा है
    2. 4जानवर नाम लेकर पुकारते हैं, पर नया शब्द नहीं गढ़ते
    3. 5बच्चा पेट में धुन सीखता है, और नाम बड़ों से सुनकर पाता है
  3. खंड 3

    शब्द कमलों पर: लहर और कसौटी

    लहर, टूटे अंदाज़े, आवाज़ का स्वाद और तिजोरी

    1. 6हर शब्द एक लहर है, और शब्द ऊपर चढ़ते हैं
    2. 7आठ अंदाज़े जो ग़लत निकले
    3. 8गोल चीज़ों के नाम होंठों पर बनते हैं
    4. 9कमल घुमाने से तिजोरी नहीं खुली
  4. खंड 4

    नाम खोलना और रखना: चाबी, मशीन और नियम

    पुराना नाम खोलना, नया नाम गढ़ना

    1. 10हर नाम सात क़दम में खुलता है
    2. 11नए शब्द धातु की मशीन से बनते हैं
    3. 12सोलर पैनल का सही नाम सूर्यप है, जैसे पेड़ का पादप
    4. 13किसी भी चीज़ का नाम आठ नियमों से रखा जा सकता है
  • परिशिष्ट 1: तरीक़ा और आँकड़े
  • परिशिष्ट 2: प्रमेय और पक्के नियम
  • शब्दकोश
  • ग्रंथ सूची
  • टिप्पणियाँ
  • जाँच जारी
  • अनुक्रमणिका

अर्थबीज की भूमिका

र में आग, ल में धरती: एक विश्वास की परख

कुंडलिनी के पुराने चित्र में संस्कृत की पूरी वर्णमाला शरीर के छह कमलों पर लिखी है, हर पंखुड़ी पर एक अक्षर। गले के कमल पर स्वर, नीचे के कमलों पर व्यंजन, और कमलों के साथ पाँच तत्व।

यह देखकर एक विश्वास मन में घर कर गया था: अगर र आग के कमल के पास है, तो र वाले शब्दों में आग होगी। अगर ल धरती से जुड़ा है, तो ल वाले शब्दों में धरती। यह किताब उसी विश्वास की परख है।

परख बीस हज़ार से ज़्यादा संस्कृत शब्दों पर हुई, दो बड़े छपे कोशों से, और पाणिनि की धातुओं पर। विश्वास नहीं टिका। अर्थ अक्षर के कमल में नहीं मिला, धातु में मिला। यही बात पतंजलि ने अपने रथ वाले उदाहरण में, भर्तृहरि ने स्फोट में, और यास्क ने निरुक्त में बहुत पहले कह दी थी।

पर ख़ाली हाथ कुछ नहीं लौटा। कमलों पर हर शब्द एक लहर बनाता है, और वह लहर औसतन नीचे से ऊपर चढ़ती है। स्वर बदलने से अर्थ बचता है, व्यंजन बदलने से चला जाता है। और धातु पर टिकी एक मशीन बनी, जो नए शब्द गढ़ती है और उनका कमलों वाला रास्ता नापती है। जो अंदाज़े टूटे, वे भी इस किताब में उतनी ही जगह पाते हैं जितने टिके हुए।

फिर सवाल और बड़ा हुआ। अगर अर्थ धातु में है, तो दुनिया की हर चीज़ का नाम वही क्यों है जो है? उसे वह नाम कैसे मिला, और हमें कैसे पता कि उसे इसी शब्द से बुलाना है? इसके उत्तर ऋषियों के ग्रंथों में मिले, समुद्र में एक दूसरे को सीटी से पुकारती डॉल्फ़िनों में, और उस बच्चे में जो पेट में ही माँ की धुन सीख लेता है। किताब के आख़िरी हिस्से में किसी भी नाम को खोलने के सात क़दम हैं, आज की कुछ चीज़ों के लिए धातु से गढ़े नाम, और कोई भी नाम रखने के आठ नियम।

यह मनु विश्रांति दर्शन की दूसरी किताब है। पहली किताब "बीजसेतु" अक्षरों का नक़्शा खोलती है, यह किताब उन अक्षरों से बने शब्दों और नामों तक जाती है, और तीसरी किताब "नाददूत" बोले हुए शब्द की ताक़त तौलती है। नक़्शा पहले अध्याय में छोटे में दे दिया गया है, इसलिए यह किताब अकेले भी पूरी पढ़ी जा सकती है।

किताब में चार छोटे निशान मिलेंगे, ताकि पाठक जान सके कि किस बात को किस तरह तौलना है:

सिद्ध
गणित से साबित। काग़ज़ और पेंसिल लेकर कोई भी दोहरा सकता है।
परखा हुआ
ग्रंथ के छपे पाठ से, किसी छपे शोध से, या शब्दकोश के असली शब्दों से मिलाया हुआ।
खुला प्रश्न
अभी उत्तर अधूरा है।
मनु विश्रांति दर्शन
जहाँ शोध की भाषा रुकती है, और साधक बोलता है।

मनु विश्रांति, देहरादून

अर्थबीज से जुड़े विषय

कुंडलिनी के वे सवाल, जिनके जवाब इस साइट पर अपने अपने पन्ने पर हैं।

अर्थबीज पर सवाल जवाब

अर्थबीज किताब किस बारे में है?

अर्थबीज इस सवाल की परख है कि शब्द का अर्थ कहाँ से आता है, और हर चीज़ का नाम वही क्यों है जो है। कुंडलिनी के चित्र में पूरी वर्णमाला कमलों पर लिखी है, तो एक विश्वास बनता है कि र वाले शब्दों में आग होगी और ल वाले शब्दों में धरती। किताब इस विश्वास को बीस हज़ार से ज़्यादा संस्कृत शब्दों पर, दो बड़े छपे कोशों और पाणिनि की धातुओं से परखती है।

क्या संस्कृत शब्द का अर्थ उसके अक्षरों से आता है?

अर्थबीज की परख में नहीं। अर्थ अक्षर के कमल में नहीं मिला, धातु में मिला। यही बात पतंजलि ने अपने रथ वाले उदाहरण में, भर्तृहरि ने स्फोट में, और यास्क ने निरुक्त में बहुत पहले कह दी थी। फिर भी कुछ बातें टिकीं: स्वर बदलने से अर्थ बचता है, व्यंजन बदलने से चला जाता है।

सोलर पैनल को संस्कृत ढंग से क्या कहें?

अर्थबीज का बारहवाँ अध्याय इसका नाम सूर्यप रखता है, उसी ढाँचे पर जिस पर पेड़ को पादप कहते हैं। पादप वह है जो पाद, यानी जड़ से पीता है; सूर्यप वह जो सूरज को पीता है। किताब का आख़िरी हिस्सा किसी भी नई चीज़ का नाम धातु से गढ़ने के आठ नियम देता है।

क्या अर्थबीज पढ़ने से पहले बीजसेतु पढ़ना ज़रूरी है?

नहीं। कमलों पर अक्षरों का नक़्शा पहले अध्याय में छोटे में दे दिया गया है, इसलिए यह किताब अकेले भी पूरी पढ़ी जा सकती है। पर क्रम से पढ़ें, तो बीजसेतु अक्षरों का नक़्शा खोलती है, अर्थबीज उन अक्षरों से बने शब्दों और नामों तक जाती है, और नाददूत बोले हुए शब्द की ताक़त तौलती है।

Arthbeej in English

Arthbeej (अर्थबीज), the second book of Manu Vishranti Darshan, in Hindi: "Where the meanings of words and the names of things come from". It tests the belief that a Sanskrit word carries the meaning of the chakra its letters sit on, across more than twenty thousand words from two printed dictionaries and Panini's verb roots. Meaning was not found in the letter but in the root (dhatu), as Patanjali, Bhartrihari and Yaska said long ago. Thirteen chapters, with seven steps to open any name and eight rules to name anything.