मूलाधार चक्र: कहाँ है, बीज मंत्र लं, और 4 पंखुड़ियों पर कौन से अक्षर
मूलाधार कुंडलिनी का पहला चक्र है: रीढ़ के सबसे निचले सिरे पर, जननेंद्रिय के नीचे और गुदा के ऊपर, सुषुम्ना नाड़ी के मुँह से जुड़ा हुआ। इस कमल का मुँह नीचे की ओर है। इसकी 4 पंखुड़ियाँ गहरा लाल (शोण) हैं, और उन पर व, श, ष, स लिखे हैं। बीच में पृथ्वी का मंडल है, चौकोर, और उसमें बीज मंत्र लं। कुंडलिनी इसी कमल में सोई रहती है।
मूलाधार चक्र, एक नज़र में
| कहाँ | रीढ़ के सबसे निचले सिरे पर, जननेंद्रिय के नीचे और गुदा के ऊपर, सुषुम्ना नाड़ी के मुँह से जुड़ा हुआ। इस कमल का मुँह नीचे की ओर है। |
|---|---|
| पंखुड़ियाँ | 4, गहरा लाल (शोण) |
| पंखुड़ियों के अक्षर | व श ष स, चमकता सुनहरा |
| तत्व | पृथ्वी |
| तत्व का मंडल | चौकोर, बिजली जैसा चमकता पीला, आठों दिशाओं में आठ भाले |
| बीज मंत्र | लं, पीला |
| बीज का वाहन | हाथियों का राजा, ऐरावत |
| देवता | बालक ब्रह्मा, चार हाथ और चार मुख, उगते सूरज जैसे |
| शक्ति | डाकिनी, चार हाथ और लाल आँखें, एक साथ उगते कई सूरजों जैसी |
| षट्चक्रनिरूपण में | श्लोक 4 से 13 |
षट्चक्रनिरूपण में मूलाधार
कमल के बीच एक त्रिकोण है, जिसे त्रैपुर कहते हैं। उसमें स्वयंभू लिंग है, और उस पर कुंडलिनी साढ़े तीन लपेटे में सोई है, शंख के घुमाव की तरह, अपने मुँह से ब्रह्मद्वार को ढके हुए। उसकी गुनगुनाहट मतवाले भौंरों जैसी बताई गई है।
ग्रंथ के अनुसार इसके ध्यान का फल: इस कमल में कुंडलिनी का ध्यान करने वाला वाणी का स्वामी और मनुष्यों में राजा बनता है, सारी विद्याओं में जल्दी निपुण होता है, और रोगों से मुक्त रहता है (श्लोक 13)।
मूलाधार नाम का अर्थ
मूलाधार का अर्थ है जड़ का सहारा: मूल यानी जड़, और आधार यानी जिस पर कुछ टिका हो। सारे चक्र इसी पर टिके हैं, और कुंडलिनी यहीं सोई है।
बीज मंत्र लं
इस कमल का बीज लं है, पृथ्वी तत्व का बीज। बीज छोटा और साफ़ बोला जाता है: पहले अक्षर, फिर होंठ धीरे से बंद करके नाक में गूँजती ध्वनि। सारे बीज, उनके वाहन और बोलने का सरल ढंग बीज मंत्र वाले पन्ने पर हैं।
मूलाधार के बारे में जो आज कहा जाता है, पर ग्रंथ में नहीं
आज के कई चित्रों में मूलाधार के साथ गणेश दिखाए जाते हैं, और ऐरावत के सात सूँड़। षट्चक्रनिरूपण के मूलाधार वाले श्लोकों (4 से 13) में न गणेश का नाम है, न सात सूँड़ों का।
बीजसेतु में मूलाधार

बीजसेतु: कुंडलिनी, बीज मंत्र और आवाज़ का सच: एक साधक का शोध
बीजसेतु का हर हिस्सा एक चक्र है। खंड 1 इसी पर है: मूलाधार: राज़, जहाँ नक़्शा खुलता है।
- अध्याय 1: पाँचों बीज अपने कमल पर नहीं, दूसरे कमलों पर लिखे हैं
- अध्याय 2: पचास पंखुड़ियों में पूरी वर्णमाला छिपी है
इस कमल के बीच बीज लं है। पर ल अक्षर किस कमल की पंखुड़ी पर लिखा है? यही बीजसेतु का पहला सवाल है।
मूलाधार
स्वाधिष्ठान
मणिपूर
अनाहत
विशुद्ध
आज्ञा
सहस्रार