पंचांग 2027

कुंडलिनी · सात चक्र

मूलाधार चक्र: कहाँ है, बीज मंत्र लं, और 4 पंखुड़ियों पर कौन से अक्षर

सीधा जवाब

मूलाधार कुंडलिनी का पहला चक्र है: रीढ़ के सबसे निचले सिरे पर, जननेंद्रिय के नीचे और गुदा के ऊपर, सुषुम्ना नाड़ी के मुँह से जुड़ा हुआ। इस कमल का मुँह नीचे की ओर है। इसकी 4 पंखुड़ियाँ गहरा लाल (शोण) हैं, और उन पर व, श, ष, स लिखे हैं। बीच में पृथ्वी का मंडल है, चौकोर, और उसमें बीज मंत्र लं। कुंडलिनी इसी कमल में सोई रहती है।

मूलाधार चक्र का कमल, षट्चक्रनिरूपण के वर्णन से: 4 पंखुड़ियाँ, उन पर व, श, ष, स, बीच में चौकोर और बीज लंवशषसलं
मूलाधार, षट्चक्रनिरूपण के श्लोक 4 से 13 के वर्णन से बना चित्र।

मूलाधार चक्र, एक नज़र में

मूलाधार चक्र, एक नज़र में
कहाँरीढ़ के सबसे निचले सिरे पर, जननेंद्रिय के नीचे और गुदा के ऊपर, सुषुम्ना नाड़ी के मुँह से जुड़ा हुआ। इस कमल का मुँह नीचे की ओर है।
पंखुड़ियाँ4, गहरा लाल (शोण)
पंखुड़ियों के अक्षरव श ष स, चमकता सुनहरा
तत्वपृथ्वी
तत्व का मंडलचौकोर, बिजली जैसा चमकता पीला, आठों दिशाओं में आठ भाले
बीज मंत्रलं, पीला
बीज का वाहनहाथियों का राजा, ऐरावत
देवताबालक ब्रह्मा, चार हाथ और चार मुख, उगते सूरज जैसे
शक्तिडाकिनी, चार हाथ और लाल आँखें, एक साथ उगते कई सूरजों जैसी
षट्चक्रनिरूपण मेंश्लोक 4 से 13

षट्चक्रनिरूपण में मूलाधार

कमल के बीच एक त्रिकोण है, जिसे त्रैपुर कहते हैं। उसमें स्वयंभू लिंग है, और उस पर कुंडलिनी साढ़े तीन लपेटे में सोई है, शंख के घुमाव की तरह, अपने मुँह से ब्रह्मद्वार को ढके हुए। उसकी गुनगुनाहट मतवाले भौंरों जैसी बताई गई है।

ग्रंथ के अनुसार इसके ध्यान का फल: इस कमल में कुंडलिनी का ध्यान करने वाला वाणी का स्वामी और मनुष्यों में राजा बनता है, सारी विद्याओं में जल्दी निपुण होता है, और रोगों से मुक्त रहता है (श्लोक 13)।

मूलाधार नाम का अर्थ

मूलाधार का अर्थ है जड़ का सहारा: मूल यानी जड़, और आधार यानी जिस पर कुछ टिका हो। सारे चक्र इसी पर टिके हैं, और कुंडलिनी यहीं सोई है।

बीज मंत्र लं

इस कमल का बीज लं है, पृथ्वी तत्व का बीज। बीज छोटा और साफ़ बोला जाता है: पहले अक्षर, फिर होंठ धीरे से बंद करके नाक में गूँजती ध्वनि। सारे बीज, उनके वाहन और बोलने का सरल ढंग बीज मंत्र वाले पन्ने पर हैं।

मूलाधार के बारे में जो आज कहा जाता है, पर ग्रंथ में नहीं

आज के कई चित्रों में मूलाधार के साथ गणेश दिखाए जाते हैं, और ऐरावत के सात सूँड़। षट्चक्रनिरूपण के मूलाधार वाले श्लोकों (4 से 13) में न गणेश का नाम है, न सात सूँड़ों का।

बीजसेतु में मूलाधार

बीजसेतु का कवर: गहरे नीले पर पाँच घेरे, नीचे से ऊपर के पाँच कमल, उन पर पंखुड़ियों के अक्षर, और सुनहरे अक्षरों में पाँच बीज

बीजसेतु: कुंडलिनी, बीज मंत्र और आवाज़ का सच: एक साधक का शोध

बीजसेतु का हर हिस्सा एक चक्र है। खंड 1 इसी पर है: मूलाधार: राज़, जहाँ नक़्शा खुलता है।

  1. अध्याय 1: पाँचों बीज अपने कमल पर नहीं, दूसरे कमलों पर लिखे हैं
  2. अध्याय 2: पचास पंखुड़ियों में पूरी वर्णमाला छिपी है

इस कमल के बीच बीज लं है। पर ल अक्षर किस कमल की पंखुड़ी पर लिखा है? यही बीजसेतु का पहला सवाल है।

बीजसेतु का पूरा अनुक्रम देखिए

सवाल जवाब

मूलाधार चक्र पर सवाल

मूलाधार चक्र कहाँ होता है?

रीढ़ के सबसे निचले सिरे पर, जननेंद्रिय के नीचे और गुदा के ऊपर, सुषुम्ना नाड़ी के मुँह से जुड़ा हुआ। इस कमल का मुँह नीचे की ओर है।

मूलाधार चक्र का बीज मंत्र क्या है?

लं। यह पृथ्वी का बीज है, और षट्चक्रनिरूपण के अनुसार इसका वाहन हाथियों का राजा, ऐरावत है।

मूलाधार चक्र में कितनी पंखुड़ियाँ हैं, और उन पर कौन से अक्षर लिखे हैं?

4 पंखुड़ियाँ, गहरा लाल (शोण), और उन पर व श ष स लिखे हैं, चमकता सुनहरा रंग में।

मूलाधार चक्र का रंग और तत्व क्या है?

षट्चक्रनिरूपण के अनुसार इसकी पंखुड़ियाँ गहरा लाल (शोण) हैं। तत्व: पृथ्वी। बीच का मंडल: चौकोर, बिजली जैसा चमकता पीला, आठों दिशाओं में आठ भाले। आज के चित्रों के इंद्रधनुषी रंग 1927 में जोड़े गए, ग्रंथ के नहीं।

मूलाधार चक्र के देवता और शक्ति कौन हैं?

देवता: बालक ब्रह्मा, चार हाथ और चार मुख, उगते सूरज जैसे। शक्ति: डाकिनी, चार हाथ और लाल आँखें, एक साथ उगते कई सूरजों जैसी।

Muladhara chakra, in English

Muladhara (Mūlādhāra) is the first chakra of Kundalini, located at the base of the spine, below the genitals and above the anus. In the Ṣaṭcakranirūpaṇa (verses 4-13) it has 4 petals bearing the letters व श ष स, the element earth, and the seed mantra लं, with the mount, deity and Shakti the text names. The petal colours given here are the text's own; the rainbow colours of modern charts are not in it.

मूलाधार चक्र के स्रोत

  1. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 4 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  2. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 5 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  3. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 6 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  4. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 7 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  5. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 9 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  6. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 10 और 11 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  7. षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 13 (आर्थर एवलॉन का अनुवाद, wisdomlib)
  8. आर्थर एवलॉन, द सर्पेंट पावर (1919), भूमिका का पाँचवाँ अध्याय: चक्र या कमल
  9. Muladhara (Wikipedia)

षट्चक्रनिरूपण के श्लोकों की संख्या आर्थर एवलॉन (जॉन वुडरॉफ़) के अनुवाद द सर्पेंट पावर (1919) के अनुसार है, जैसा wisdomlib छापता है। हठयोगप्रदीपिका की संख्या उसके आम छपे पाठ के अनुसार है; कुछ संस्करणों में एक दो श्लोक आगे पीछे हो सकते हैं।