पंचांग 2027

कुंडलिनी

षट्चक्रनिरूपण: पूर्णानंद का ग्रंथ, जिससे चक्रों का चित्र बना

सीधा जवाब

षट्चक्रनिरूपण का अर्थ है, छह चक्रों का वर्णन। इसे बंगाल के तांत्रिक साधक पूर्णानंद ने लिखा, अपने ग्रंथ श्रीतत्त्वचिंतामणि के छठे अध्याय के रूप में, जो सन 1577 में पूरा हुआ। इसके पचपन श्लोकों में हर चक्र की पंखुड़ियाँ, उन पर लिखे अक्षर, तत्व, बीज, देवता और शक्ति बताई गई है। 1919 में आर्थर एवलॉन (जॉन वुडरॉफ़) ने इसे अंग्रेज़ी में द सर्पेंट पावर नाम से छापा, और वहीं से यह चित्र दुनिया भर में फैला।

षट्चक्रनिरूपण, एक नज़र में

षट्चक्रनिरूपण, एक नज़र में
नाम का अर्थषट् यानी छह, और निरूपण यानी वर्णन: छह चक्रों का वर्णन
लेखकपूर्णानंद, बंगाल के तांत्रिक साधक; गुरु ब्रह्मानंद परमहंस
कबसन 1577, श्रीतत्त्वचिंतामणि के छठे अध्याय के रूप में
भाषासंस्कृत
श्लोकपचपन
टीकाकालीचरण
अंग्रेज़ी अनुवादआर्थर एवलॉन (जॉन वुडरॉफ़), द सर्पेंट पावर, लंदन, 1919
किस श्लोक में क्यानाड़ियाँ 1 से 3 · छह चक्र 4 से 39 · सहस्रार 40 से 49 · कुंडलिनी की यात्रा 50 से 53 · फल 54 और 55

ग्रंथ में क्या है

पहले तीन श्लोक रीढ़ के भीतर की नाड़ियाँ बताते हैं: सुषुम्ना, चित्रिणी और ब्रह्मनाड़ी। श्लोक 4 से 39 छह कमल, एक एक करके, नीचे से ऊपर: मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्ध और आज्ञा। श्लोक 40 से 49 हज़ार पंखुड़ियों वाला सहस्रार। श्लोक 50 से 53 कुंडलिनी की यात्रा, ऊपर और फिर नीचे। और आख़िरी दो श्लोक इसके फल।

हर कमल के लिए ग्रंथ लगभग एक ही क्रम रखता है: वह कहाँ है, कितनी पंखुड़ियाँ और किस रंग की, उन पर कौन से अक्षर, बीच में किस तत्व का मंडल, उसका बीज और उसका वाहन, बीज की गोद में देवता, कमल की शक्ति, और उसके ध्यान का फल।

आज का चक्र चित्र यहीं से

आज जो चक्र चित्र घर घर में है, उसकी जड़ यही ग्रंथ है, एवलॉन के अनुवाद के रास्ते। पर रास्ते में उसमें कुछ जुड़ भी गया। 1927 में चार्ल्स लेडबीटर ने चक्रों को इंद्रधनुष के सात रंग दिए, जो इस ग्रंथ में नहीं। कई चित्रों में मूलाधार पर गणेश और आज्ञा पर बीज क्षं आ गए, ये भी इस ग्रंथ में नहीं। इस साइट के चक्र पन्ने ग्रंथ के अपने रंग और अपनी बातें रखते हैं, श्लोक की संख्या के साथ।

इसे कहाँ पढ़ें

एवलॉन का अनुवाद, कालीचरण की टीका के साथ, श्लोक दर श्लोक wisdomlib पर पढ़ा जा सकता है। उसका पता नीचे स्रोतों में है। हर श्लोक के साथ संस्कृत, उसका शब्दार्थ और टीका भी है।

इसी ग्रंथ के चित्र को पढ़ने वाली किताब

बीजसेतु का कवर: गहरे नीले पर पाँच घेरे, नीचे से ऊपर के पाँच कमल, उन पर पंखुड़ियों के अक्षर, और सुनहरे अक्षरों में पाँच बीज

बीजसेतु: कुंडलिनी, बीज मंत्र और आवाज़ का सच: एक साधक का शोध

मनु विश्रांति की पहली किताब षट्चक्रनिरूपण के चित्र को ऐसे पढ़ती है, जैसे नक़्शा पढ़ा जाता है: पचास पंखुड़ियाँ, पाँच बीज, और उनके बीच का गणित।

सवाल जवाब

षट्चक्रनिरूपण पर सवाल

षट्चक्रनिरूपण किसने लिखा?

बंगाल के तांत्रिक साधक पूर्णानंद ने, जिनके गुरु ब्रह्मानंद परमहंस थे। यह उनके ग्रंथ श्रीतत्त्वचिंतामणि का छठा अध्याय है।

षट्चक्रनिरूपण कब लिखा गया?

श्रीतत्त्वचिंतामणि सन 1577 में पूरा हुआ, और षट्चक्रनिरूपण उसी का छठा अध्याय है। इसलिए यह ग्रंथ लगभग साढ़े चार सौ साल पुराना है।

षट्चक्रनिरूपण में कितने श्लोक हैं?

पचपन। पहले तीन नाड़ियों पर, 4 से 39 छह चक्रों पर, 40 से 49 सहस्रार पर, 50 से 53 कुंडलिनी की यात्रा पर, और आख़िरी दो इसके फल पर।

षट्चक्रनिरूपण का अंग्रेज़ी अनुवाद किसने किया?

आर्थर एवलॉन ने, जो सर जॉन वुडरॉफ़ का लिखने का नाम था। अनुवाद द सर्पेंट पावर नाम से 1919 में लंदन में छपा, कालीचरण की टीका के साथ।

षट्चक्रनिरूपण का अर्थ क्या है?

षट् यानी छह, चक्र, और निरूपण यानी ठीक ठीक वर्णन। यानी छह चक्रों का वर्णन।

Ṣaṭcakranirūpaṇa, in English

The Ṣaṭcakranirūpaṇa ("Description of the Six Chakras") is the sixth chapter of the Śrītattvacintāmaṇi of Pūrṇānanda, a Bengali tantric adept and disciple of Brahmānanda, completed in 1577. Its 55 verses describe the nadis (1-3), the six chakras from Muladhara to Ajna (4-39), the thousand-petalled Sahasrara (40-49), the rise and return of Kundalini (50-53) and the fruit of the text (54-55): for each lotus, its place, petals and their letters, its element and mandala, its seed and mount, its deity and Shakti. Arthur Avalon (Sir John Woodroffe) translated it with Kālīcaraṇa's commentary in The Serpent Power (London: Luzac, 1919), through which it became the source of the modern chakra picture.

षट्चक्रनिरूपण के स्रोत

  1. षट्चक्रनिरूपण का परिचय: श्रीतत्त्वचिंतामणि का छठा अध्याय (wisdomlib)
  2. षट्चक्रनिरूपण, पूरा अनुवाद, श्लोक दर श्लोक (wisdomlib)
  3. पूर्णानंदनाथ: परिचय और ग्रंथ (wisdomlib)
  4. आर्थर एवलॉन, द सर्पेंट पावर (1919), भूमिका का पाँचवाँ अध्याय: चक्र या कमल
  5. John Woodroffe (Wikipedia)
  6. Chakra (Wikipedia): आज के चित्रों के इंद्रधनुषी रंग कहाँ से आए

षट्चक्रनिरूपण के श्लोकों की संख्या आर्थर एवलॉन (जॉन वुडरॉफ़) के अनुवाद द सर्पेंट पावर (1919) के अनुसार है, जैसा wisdomlib छापता है। हठयोगप्रदीपिका की संख्या उसके आम छपे पाठ के अनुसार है; कुछ संस्करणों में एक दो श्लोक आगे पीछे हो सकते हैं।