पंचांग 2027

आकाश खुल रहा है…

शब्द की बनावट

यह प्रयोग क्यों

संस्कृत के शब्द मनमाने नहीं, बनाए जाते हैं: एक धातु (काम), एक जोड़ (प्रत्यय) और संधि। जैसे सूर्य और प (पीने वाला) से सूर्यप, सूरज की रोशनी पीने वाला, यानी सोलर पैनल। अर्थबीज यह कारख़ाना समझाती है; यह प्रयोग उसे चलता हुआ दिखाता है।

क्या करें

  1. कोई एक चीज़ चुनिए, जैसे सोलर पैनल, और “अगला” दबाते जाइए: हर स्टेशन पर शब्द एक क़दम बनता है।
  2. “अपना शब्द” में कोई काम लिखिए (जैसे पढ़ना, गिनना) और देखिए उसकी धातु से कौन से शब्द निकलते हैं।
  3. आख़िर में “मंत्र के नक़्शे पर देखिए” से उस शब्द का रास्ता कमलों पर खोलिए।

क्या देखिए

  • एक ही धातु से कितने शब्द निकलते हैं: पठ् से पाठक, पाठ, पठन।
  • दो कोशों की छन्नी: कौन सा बना हुआ शब्द पहले से ग्रंथों में है, और कौन सच में नया।
  • गवाह: वही जोड़ दूसरे असली शब्दों में, जैसे पादप (पेड़), मधुप (भौंरा)।
  • कमलों का रास्ता शब्द का अर्थ नहीं बताता; अर्थ हर बार धातु से आता है।

इसके हिस्से

दस नई चीज़ें

अर्थबीज ने आज की दस चीज़ों के संस्कृत ढंग के नाम बनाए, सोलर पैनल से रोबोट तक; हर नाम सात स्टेशनों से गुज़रा।

  1. ऊपर से कोई एक चीज़ चुनिए, जैसे सोलर पैनल।
  2. स्टेशन अपने आप एक एक करके खुलते हैं; “पिछला” और “अगला” से रुककर देखिए।

देखिए: हर नाम की धातु, जोड़, संधि, छन्नी, गवाह और रास्ता। कुछ नाम हारते भी हैं: पहले से कोश में मिल जाएँ, तो छन्नी में अटक जाते हैं।

बीजसेतु कैसे बना

पहली किताब का नाम बीजसेतु भी इसी तरीक़े से मिला: 9 और 12 शब्दों से 106 नए जोड़े, और उनमें से एक चुना गया।

  1. जोड़ों की जाली देखिए: कौन से जोड़े पहले से कोशों में थे।
  2. एक हिस्सा बदलकर देखिए कि नया जोड़ा क्या कहता है।

देखिए: 106 में से 6 जोड़े पहले से कोशों में थे। बीजसेतु दोनों कोशों में नया था, और उसका सेतु सि धातु से है, बाँधना।

अपना शब्द

अब आपकी बारी: कोई काम लिखिए, धातु और उसका असली रूप चुनिए, आगे उपसर्ग या कोई शब्द जोड़िए, और मशीन दोनों कोशों में जाँचकर बताएगी कि शब्द नया है या नहीं, और नियमों पर खरा है या नहीं। या कोई भी शब्द लिखकर उसे जाँचिए।

  1. कोई काम लिखिए, जैसे देखना, बचाना या fly, और धातु चुनिए।
  2. धातु का कोई असली रूप चुनिए; आगे उपसर्ग या कोई शब्द जोड़िए, जैसे जल या सूर्य।
  3. “कोई भी शब्द जाँचिए” में अपना या किसी का बनाया शब्द लिखिए, जैसे विद्युद्यान या दूरभाष।

देखिए: हर रूप मोनियर विलियम्स के कोश से आता है, उसी अर्थ के साथ; छन्नी और गवाह इसी पन्ने पर दोनों कोशों में ढूँढ़े जाते हैं। संधि के आम नियम यहाँ हैं, बहुत दुर्लभ वाले नहीं।

इससे क्या मिलता है

शब्द का अर्थ उसके भीतर से समझना, बाहर से रटना नहीं। और किसी भी नए नाम को परखने का एक साफ़ तरीक़ा: धातु असली, जोड़ असली, गवाह मौजूद।

रोज़ की ज़िंदगी में

रोज़ के शब्दों (लेखक, नायक, मंत्र, यंत्र) के भीतर की धातु पहचानते ही भाषा जीवित लगने लगती है। बच्चे शब्द रटने की जगह बनाना सीखते हैं, और किसी नए शब्द से डरते नहीं।

ध्यान में

योगसूत्र (1.28) जप के साथ अर्थ की भावना की बात करता है: “तज्जपस्तदर्थभावनम्”। मंत्र के शब्द धातु से समझ आ जाएँ, तो जप सिर्फ़ आवाज़ नहीं रहता; मन जानता है कि वह क्या दोहरा रहा है। मंत्र शब्द में भी मन् धातु है, जिसका अर्थ है सोचना।

यहाँ जो दिखता है, वह नक़्शा और हिसाब है, किसी मंत्र का असर नहीं। अनुभव हर व्यक्ति का अपना होता है; कोई प्रयोग उसका वादा नहीं करता।

हर नया शब्द पाँच नियमों से गुज़रता है

  1. धातु असली हो: अर्थ पाणिनि के धातुपाठ की किसी धातु से आए।
  2. जोड़ असली हो: प्रत्यय या समास वही, जो पाणिनि के व्याकरण में है।
  3. शब्द नया हो: मोनियर विलियम्स और मैकडॉनल, दोनों बड़े कोशों में मुख्य शब्द के रूप में पहले से न हो।
  4. गवाह हों: वही धातु और वही जोड़ उसी अर्थ में दूसरे असली शब्दों में दिखें।
  5. रास्ता खींचा जाए: शब्द के अक्षर किन कमलों से गुज़रते हैं। यह उसका अर्थ नहीं, उसकी शरीर यात्रा है।

“धरती का अर्थ चाहिए तो मूलाधार के अक्षर लो” जैसा कोई नियम इस प्रयोग में नहीं, क्योंकि ऐसा हर नियम हज़ारों शब्दों पर कसकर टूट चुका था। अर्थ धातु से आता है, कमल से नहीं।

एक सीमा: “नया शब्द” का अर्थ इतना है कि यह दोनों बड़े कोशों में मुख्य शब्द के रूप में नहीं मिला। कोई जोड़ किसी लंबे शब्द के भीतर या किसी पुराने ग्रंथ में कभी आया या नहीं, यह प्रयोग नहीं बता सकता।

“अपना शब्द” में शब्द का रूप एक मोटे नियम से बनता है, और वह हिस्सा किताब से आगे है। जो बने, उसे कोश में ज़रूर देखिए।

शब्द की बनावट पर सवाल जवाब

शब्द की बनावट वाला प्रयोग क्या करता है?

यह अर्थबीज के तरीक़े से नए संस्कृत ढंग के नाम बनाता है, पाँच नियमों से: अर्थ पाणिनि के धातुपाठ की किसी धातु से आए; जोड़ वही हो जो पाणिनि के व्याकरण में है; शब्द मोनियर विलियम्स और मैकडॉनल, दोनों कोशों में मुख्य शब्द के रूप में पहले से न हो; वही धातु और जोड़ दूसरे असली शब्दों में गवाह बनकर मिलें; और आख़िर में कमलों पर उसका रास्ता खींचा जाए।

क्या कमलों का रास्ता शब्द का अर्थ बताता है?

नहीं। रास्ता शब्द की शरीर यात्रा है, अर्थ नहीं। अर्थबीज की परख में अर्थ हर बार धातु से आया, अक्षर के कमल से नहीं; इसलिए यह प्रयोग कभी रास्ते से शब्द नहीं चुनता।

सोलर पैनल को संस्कृत में क्या कह सकते हैं?

अर्थबीज का बनाया नाम है सूर्यप: सूर्य और प (पा, पीना), सूरज को पीने वाला। इसके गवाह हैं पादप (पेड़), मधुप (भौंरा) और द्विप (हाथी)। दोनों बड़े कोशों में यह मुख्य शब्द के रूप में नहीं है।

बीजसेतु नाम कैसे बना?

पहले हिस्से के 9 और दूसरे के 12 शब्दों से 106 नए जोड़े बने। उनमें से 6 पहले से कोशों में थे: वर्णोदय, स्वरोदय, मातृकोदय मुख्य शब्दों में, और वर्णसूत्र, पद्मसूत्र, पद्मपद मोनियर विलियम्स के पूरे पाठ में। बीजसेतु दोनों में नया था, और उसका “सेतु” सि धातु से है, बाँधना।

यह सब किताब में

शब्द बनाने का तरीक़ा, शब्द की लहर और नाम खोलने के सात क़दम दूसरी किताब अर्थबीज: शब्द, अर्थ और नाम में हैं। मंत्र का नक़्शा उसी आकाश में किसी भी मंत्र को कमलों पर रखता है; मनु प्रयोगशाला के बाक़ी प्रयोग

How a word is built, in English

Arthbeej's way of making new Sanskrit names, station by station: the job a thing does, a root from Panini's list of roots and a real suffix, sandhi, a sieve of two dictionaries (Monier-Williams and Macdonell), witness words built the same way, and the word's path on the six lotuses, which is its journey through the body and never its meaning. With the book's ten modern things, from the solar panel (सूर्यप) to the robot, and how the book's own title was found among 106 joins.