पंचांग 2026

पंचांग 2026 · कार्तिक कृष्ण चतुर्थी

करवा चौथ 2026

Karva Chauth 2026

दिन भर पानी की एक बूँद नहीं। फिर छलनी के पार एक चाँद।

करवा चौथ 2026 में 29 अक्टूबर, गुरुवार को है। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि रात 1:07 से रात 10:11 तक है। चाँद रात 8:12 निकलेगा। समय नई दिल्ली के हैं।

करवा चौथ का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 85 प्रतिशत रोशन

भोर से पहले दरवाज़े पर हल्की दस्तक। सास के हाथ में थाली है।

फेनी, थोड़े मेवे, एक फल। सूरज निकलने से पहले यही सरगी है।

फिर दिन शुरू होता है, और उसके साथ प्यास।

शाम को मोहल्ले की औरतें घेरा बनाती हैं। चुनरियाँ, थालियाँ, मिट्टी के करवे।

कथा चलती है, और करवे हाथ से हाथ घूमते हैं।

फिर सब छतों की ओर देखते हैं। आसमान अभी ख़ाली है।

एक बहन की कथा याद आती है, जिसके भाइयों ने पेड़ पर छलनी के पीछे दीया रख दिया था।

इसलिए आज कोई जल्दी नहीं करता। असली चाँद आएगा, तभी छलनी उठेगी।

2026 में कब

करवा चौथ 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़29 अक्टूबर, गुरुवार

तिथिकार्तिक कृष्ण चतुर्थीरात 1:07 से रात 10:11 तक

नक्षत्ररोहिणीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:31

सूर्यास्तशाम 5:39

चंद्रोदयरात 8:12

चंद्रोदय
रात 8:12नई दिल्ली में चाँद निकलने का समय। बादल हों तो इसी समय अर्घ्य देते हैं।

अगले बरस करवा चौथ 18 अक्टूबर 2027, सोमवार को है: करवा चौथ 2027, तारीख़ और मुहूर्त

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं

आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।

Google कैलेंडर में जोड़ें

  • मुफ़्त
  • कोई साइन अप नहीं
  • नाम, नंबर या ईमेल नहीं
  • जब चाहें हटा दें

दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल · सिर्फ़ यह दिन

सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।

शुभकामना

करवा चौथ का शुभकामना कार्ड

करवा चौथ का शुभकामना कार्ड: करवा चौथ की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

अपनों को करवा चौथ की शुभकामनाएँ भेजिए, इस बरस (2026) की तारीख़ के साथ। कार्ड का QR कोड और साथ जाने वाला लिंक इसी पन्ने पर खुलते हैं।

WhatsApp पर भेजेंकार्ड डाउनलोड करें

फ़ोन पर बटन दबाते ही कार्ड सीधे WhatsApp में चला जाता है, बधाई और लिंक के साथ।

पहचान

करवा चौथ क्या है

करवा चौथ कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत है। करवा मिट्टी का वह टोंटी वाला छोटा घड़ा है जिससे रात को चाँद को अर्घ्य दिया जाता है, यानी जल चढ़ाया जाता है, और चौथ का मतलब है चौथी तिथि। सुहागिन औरतें पति की लंबी उम्र के लिए सूरज निकलने से चाँद निकलने तक निर्जला व्रत रखती हैं, यानी न खाना, न पानी। यह व्रत सबसे ज़्यादा उत्तर भारत में रखा जाता है, और कई जगह कुँवारी लड़कियाँ भी मनचाहे वर के लिए इसे रखती हैं। व्रत चाँद को देखकर और अर्घ्य देकर ही खुलता है, इसलिए इस दिन चंद्रोदय का समय सबसे ज़रूरी बात है।

कथा

करवा चौथ की कथा

सबसे ज़्यादा सुनी जाने वाली कथा वीरावती की है। लोक में यह कई तरह से कही जाती है। पंचांगों में दिए एक रूप में इंद्रप्रस्थपुर के एक ब्राह्मण के सात बेटे और एक बेटी थी, वीरावती, जो सबकी लाडली थी। ब्याह के बाद पहला करवा चौथ उसने मायके में रखा। शाम तक भूख प्यास से वह बेहोश होकर गिर पड़ी। भाइयों से बहन का यह हाल देखा नहीं गया। एक भाई दूर के पेड़ पर छलनी और दीया लेकर चढ़ गया, और बाक़ी ने बहन को छत पर ले जाकर कहा, देखो, चाँद निकल आया।

वीरावती ने छलनी के पीछे जलते दीये को चाँद समझकर अर्घ्य दिया और खाना शुरू किया। पहले कौर में बाल निकला, दूसरे पर छींक आई, तीसरे पर ससुराल से बुलावा आ गया। वहाँ पहुँची तो पति मरा पड़ा था। वह रो रोकर अपने व्रत की भूल गिनने लगी। तब इंद्र की पत्नी इंद्राणी आईं और बोलीं कि तुमने असली चाँद को अर्घ्य दिए बिना व्रत तोड़ा। उन्होंने कहा कि साल भर हर महीने की चौथ रखो, करवा चौथ के साथ। वीरावती ने ऐसा ही किया, और उस पुण्य से उसका पति लौट आया। कुछ कहने वालों में इंद्राणी की जगह पार्वती आती हैं, और कुछ में यम ख़ुद उसका पति लौटा देते हैं।

दूसरी कथा करवा नाम की एक पत्नी की है, और लोक में कहते हैं कि करवा माता इन्हीं से जुड़ी हैं। नदी में नहाते समय उसके पति को मगरमच्छ ने पकड़ लिया। करवा ने मगरमच्छ को बाँध दिया, किसी कथा में कच्चे धागे से, किसी में अपनी चुन्नी से, और यम को पुकारा कि मेरे पति को छोड़ दो और मगर को सज़ा दो। यम ने मना किया तो करवा ने शाप देने की बात कही। शाप के डर से यम ने पति को लंबी उम्र दी और मगरमच्छ को यमलोक भेज दिया।

तीसरी कथा द्रौपदी की है। अर्जुन तप करने नीलगिरि की ओर गए थे, और पीछे पांडवों पर एक के बाद एक संकट आने लगे। द्रौपदी ने कृष्ण से राह पूछी। एक रूप में कृष्ण उन्हें बताते हैं कि पार्वती ने शिव के लिए यही व्रत रखा था; दूसरे रूप में वे वीरावती जैसी एक ब्राह्मण कन्या की कथा सुनाते हैं। द्रौपदी ने व्रत रखा, और संकट टल गए। सावित्री की कथा भी, जो यम के पीछे जाकर सत्यवान को लौटा लाईं, इस दिन याद की जाती है, पर वह सीधे करवा चौथ की कथा नहीं है। ये सब लोक में चली आई कथाएँ हैं, और हर जगह थोड़े अलग रूप में सुनाई जाती हैं।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में करवा चौथ

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

रामचरितमानस

अवधी · Ramcharitmanas

रामचरितमानस के लंकाकांड में राम पूरब में उगते चाँद को देखते हैं और साथियों से पूछते हैं कि चाँद में यह कालापन क्या है। सब अपनी अपनी समझ से जवाब देते हैं, और फिर प्रभु ख़ुद कहते हैं: 'कह प्रभु गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा॥' यानी विष चंद्रमा का भाई है, इसलिए चाँद ने उसे बड़े प्यार से अपने हृदय में जगह दी है। एक लोक व्याख्या इसी प्रसंग को करवा चौथ से जोड़ती है: औरतें चाँद की पूजा करती हैं ताकि उसके भीतर का वह विष उनके पति तक न पहुँचे।

कहाँ कैसे

करवा चौथ कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • पंजाब

    यहाँ सास की दी सरगी से दिन शुरू होता है, और शाम को औरतें मिलकर कथा सुनती हैं। थालियाँ घुमाते समय गीत गाए जाते हैं, जिनमें 'वीरो कुड़िए करवड़ा' सबसे जाना माना है।

  • राजस्थान

    औरतें मिट्टी के करवे ख़ुद बनाती हैं और उनमें गेहूँ और चावल भरती हैं। इस दिन वे अपनी शादी का जोड़ा या पारंपरिक चुनरी पहनती हैं।

  • उत्तर प्रदेश

    घरों की दीवारों पर गौरी माँ के चित्र बनाए जाते हैं, और औरतें करवा माता की मिट्टी की मूर्तियों की पूजा करती हैं।

  • उत्तर भारत के मोहल्ले

    पास पड़ोस की औरतें एक जगह इकट्ठा होकर व्रत कथा सुनती हैं और भजन गाती हैं, और चाँद दिखने पर व्रत खोलती हैं।

रीत

करवा चौथ के दिन क्या करते हैं

  1. सूरज निकलने से पहले सास की दी सरगी खाई जाती है, जिसमें फल, फेनी, मिठाई और सूखे मेवे होते हैं।
  2. फिर सूरज निकलने से चाँद निकलने तक निर्जला व्रत रहता है, न खाना, न पानी।
  3. शाम को औरतें सोलह शृंगार करके, यानी पूरा सुहाग वाला सिंगार करके, घेरा बनाती हैं और कथा सुनती हैं।
  4. कथा के बीच करवे सात बार एक हाथ से दूसरे हाथ में घुमाए जाते हैं।
  5. गौरी माँ की पूजा होती है, और शिव पार्वती से पति की लंबी उम्र माँगी जाती है।
  6. चाँद निकलने पर औरतें छलनी से चाँद को देखती हैं, करवे से अर्घ्य देती हैं, और फिर उसी छलनी से पति का मुँह देखती हैं।
  7. पति पानी पिलाकर और मीठा खिलाकर पत्नी का व्रत खुलवाते हैं।
  8. जो कुँवारी लड़कियाँ व्रत रखती हैं, वे कई जगह चाँद की जगह तारे देखकर व्रत खोलती हैं।

रसोई

करवा चौथ का खाना

  • सरगी भोर से पहले सास की भेजी थाली, जिसमें फेनी, मिठाई, फल और सूखे मेवे होते हैं।
  • फेनी सरगी की थाली की ख़ास मिठाई।
  • करवे का भोग राजस्थान में मिट्टी के करवे में भरा गेहूँ और चावल।

सवाल जवाब

करवा चौथ 2026: पूछे जाने वाले सवाल

करवा चौथ 2026 कब है?

करवा चौथ 2026 में 29 अक्टूबर, गुरुवार को है। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि रात 1:07 से रात 10:11 तक है। चाँद रात 8:12 निकलेगा। समय नई दिल्ली के हैं।

करवा चौथ की सरगी क्या होती है?

सरगी भोर से पहले खाया जाने वाला खाना है जो सास बहू को देती है। इसमें फल, फेनी, मिठाई और सूखे मेवे होते हैं, ताकि दिन भर का निर्जला व्रत निभ सके।

करवा चौथ में छलनी से चाँद क्यों देखते हैं?

यह रीत वीरावती की कथा से जोड़ी जाती है, जिसके भाइयों ने छलनी के पीछे दीया रखकर नक़ली चाँद दिखा दिया था। छलनी से असली चाँद देखना इस बात की याद है कि व्रत धोखे से नहीं, सच्चे चाँद को देखकर ही खुलता है।

करवा क्या होता है और उसका क्या काम है?

करवा मिट्टी का टोंटी वाला छोटा घड़ा है। कथा के समय करवे हाथों हाथ घुमाए जाते हैं, और रात को इसी से चाँद को अर्घ्य दिया जाता है।

करवा चौथ का व्रत कब खोलते हैं?

चाँद निकलने के बाद, छलनी से चाँद देखकर, करवे से अर्घ्य देकर और पति का मुँह देखकर। फिर पति पानी और मीठा देकर व्रत खुलवाते हैं।

क्या कुँवारी लड़कियाँ करवा चौथ रख सकती हैं?

हाँ, कई इलाक़ों में कुँवारी लड़कियाँ मनचाहे वर के लिए यह व्रत रखती हैं। कई जगह वे चाँद की जगह तारे देखकर व्रत खोलती हैं।

करवा चौथ की असली कथा कौन सी है?

सबसे ज़्यादा वीरावती की कथा सुनाई जाती है। इसके साथ करवा और मगरमच्छ की कथा, और कृष्ण के कहने पर द्रौपदी के व्रत की कथा भी कही जाती है; ये सब लोक की कथाएँ हैं और हर जगह थोड़े अलग रूप में मिलती हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Karwa Chauth Legends: Drik Panchangवीरावती की कथा, इंद्राणी वाला रूप, छलनी और दीया
  2. Karwa Chauth: date, history and significance (The Quint)कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, करवे से अर्घ्य, उत्तर भारत, कुँवारी लड़कियाँ, वीरावती और यम वाला रूप
  3. Karva Chauth Vrat Katha (Dekho Panchang)पार्वती वाला रूप, सास की सरगी, छलनी से चाँद और पति
  4. Karwa Chauth: Sargi and Puja Vidhi (SmartPuja)निर्जला नियम, सरगी, करवे घुमाना, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश की रीतें, तारे देखकर व्रत खोलना
  5. The History and Legends Behind Karwa Chauth (Hindutone)करवा और चौथ का मतलब, करवा और मगरमच्छ, नीलगिरि और द्रौपदी, सावित्री, छलनी का अर्थ
  6. Karva Chauth: Sacred Stories Behind the Fasting Ritual (MeMeraki)कच्चे धागे वाला रूप, द्रौपदी और इंद्राणी वाला रूप, लंकाकांड में चाँद के विष की बात

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।