पंचांग 2026

पंचांग 2026 · आश्विन शुक्ल प्रतिपदा

शारदीय नवरात्रि 2026

Sharadiya Navratri 2026

नौ रातें, एक दीया, और मिट्टी में उगते जौ।

शारदीय नवरात्रि 2026 में 11 अक्टूबर, रविवार को है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर, रात 9:20 से 11 अक्टूबर, रात 9:32 तक है। घटस्थापना का समय सुबह 6:20 से सुबह 10:12 तक है, और अभिजित मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तक। समय नई दिल्ली के हैं।

अमावस्या: उस रात आकाश में चाँद नहीं

मुट्ठी भर मिट्टी। उसमें जौ के दाने बिखेरे जाते हैं।

बीच में पानी से भरा पीतल का कलश, चावल के ढेर पर।

पास में एक दीया जलता है। नौ रात इसे बुझने नहीं देना है।

तीसरे दिन मिट्टी में हरी सुइयाँ निकल आती हैं।

हर सुबह घर में एक नई देवी का नाम लिया जाता है।

और शाम को कहीं दूर से ढोल की थाप आती है, किसी गली में गोल घेरा बन रहा है।

नौ रातें, नौ रूप। एक ही देवी, जैसे एक ही कथा के कई कहने वाले।

2026 में कब

शारदीय नवरात्रि 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़11 अक्टूबर, रविवार

तिथिआश्विन शुक्ल प्रतिपदा10 अक्टूबर, रात 9:20 से 11 अक्टूबर, रात 9:32 तक

नक्षत्रचित्रासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:20

सूर्यास्तशाम 5:56

चंद्रोदयसुबह 6:48

अभिजित मुहूर्त
सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, दिन के पंद्रह हिस्सों में आठवाँ।
घटस्थापना
सुबह 6:20 से सुबह 10:12 तकप्रतिपदा में, सुबह दिन के पहले तिहाई में।
शारदीय नवरात्रि
11 से 19 अक्टूबरपूरा काल।

अगले बरस शारदीय नवरात्रि 30 सितंबर 2027, गुरुवार को है: शारदीय नवरात्रि 2027, तारीख़ और मुहूर्त

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पहचान

शारदीय नवरात्रि क्या है

शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु की नौ रातें हैं, आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक। पहले दिन घटस्थापना होती है, यानी कलश की स्थापना, और उसका मुहूर्त पंचांग से निकाला जाता है। फिर नौ दिन देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं, एक दिन एक रूप। इन्हीं दिनों में घरों में देवी माहात्म्य का पाठ होता है, गुजरात में गरबा होता है, दक्षिण में गुड़ियों का गोलू सजता है, और उत्तर में रामलीला खेली जाती है। दसवाँ दिन विजयादशमी है।

कथा

शारदीय नवरात्रि की कथा

मार्कंडेय पुराण के देवी माहात्म्य में, दूसरे से चौथे अध्याय तक, महिषासुर की कथा है। महिषासुर भैंसे के रूप वाला असुर था। देवताओं के तेज से जन्मी देवी उससे लड़ने उतरीं। लड़ाई में वह बार बार रूप बदलता रहा, कभी कुछ, कभी कुछ, और देवी हर रूप को काटती रहीं, बिना घबराए। आख़िर जब वह फिर भैंसे के रूप में आया, तो देवी ने त्रिशूल से उसका अंत कर दिया।

कर्नाटक में मान्यता है कि मैसूरु शहर का नाम इसी महिषासुर से पड़ा, जिसे देवी चामुंडेश्वरी ने मारा था। इसीलिए वहाँ का दशहरा देवी की इसी जीत का उत्सव है।

नवरात्रि की नौ देवियाँ इस क्रम में आती हैं। पहले दिन शैलपुत्री, पर्वत की बेटी। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, जिन्होंने शिव को पाने के लिए कड़ा तप किया। तीसरे दिन चंद्रघंटा, पार्वती का ब्याह के बाद का रूप, असुरों से लड़ने को तैयार। चौथे दिन कूष्मांडा, जिनके बारे में कहते हैं कि उन्होंने ब्रह्मांड का अंडा रचा। पाँचवें दिन स्कंदमाता, गोद में बेटे स्कंद को लिए माँ। छठे दिन कात्यायनी, योद्धा रूप, जिन्हें महिषासुर को मारने वाली माना जाता है। सातवें दिन कालरात्रि, सबसे डरावना रूप, शुंभ और निशुंभ के नाश के लिए। आठवें दिन महागौरी, जो शिव के गंगाजल से नहलाने पर उजली हो गईं। और नौवें दिन सिद्धिदात्री, जो आठ सिद्धियाँ देती हैं।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में शारदीय नवरात्रि

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

रामचरितमानस

अवधी · Ramcharitmanas

उत्तर भारत की ज़्यादातर रामलीलाएँ तुलसीदास के रामचरितमानस पर टिकी हैं, और वे शरद की इन्हीं नवरात्रि की रातों में खेली जाती हैं, आम तौर पर लगभग दस रातें, जिनका आख़िरी दृश्य दशहरे की रात रावण के पुतले का जलना है। यानी नवरात्रि की रातों में देवी के साथ साथ मानस की चौपाइयाँ भी गली गली गूँजती हैं।

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में

जहाँ आज भी लंका जलती है।

कहाँ कैसे

शारदीय नवरात्रि कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • गुजरात

    नौ रातों तक गरबा होता है: बीच में मिट्टी का छेदों वाला घड़ा, जिसमें दीया जलता है, और उसके चारों ओर लोग गोल घेरे में नाचते हैं। इस दीये को गर्भ दीप कहते हैं, गर्भ यानी कोख, जीवन की निशानी। रंगी हुई छड़ियों वाला डांडिया रास भी इन्हीं रातों में होता है। यूनेस्को ने गुजरात के गरबा को 2023 में अमूर्त धरोहर की सूची में रखा।

  • तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश

    घरों में सीढ़ियों पर छोटी छोटी गुड़ियाँ सजाई जाती हैं। तमिलनाडु में इसे गोलू या बोम्मई कोलू कहते हैं, कर्नाटक में गोम्बे, और आंध्र में बोम्मला कोलुवु। लोग एक दूसरे के घर गोलू देखने जाते हैं और मिठाई और तोहफ़े बाँटते हैं।

  • मैसूरु, कर्नाटक

    नवरात्रि के दिनों में यहाँ का दशहरा चलता है, और मैसूरु महल रोज़ शाम लगभग एक लाख बल्बों से जगमगाता है।

  • उत्तर प्रदेश, ब्रज और अवध

    रातों को रामलीला का मंच सजता है और राम कथा के दृश्य खेले जाते हैं।

  • आंध्र प्रदेश के मंदिर

    नवरात्रि के हर दिन देवी को एक अलग देवी के रूप में सजाया जाता है।

  • बंगाल, ओड़िशा, असम

    यहाँ नवरात्रि के आख़िरी दिन ही दुर्गा पूजा कहलाते हैं, षष्ठी से दशमी तक।

रीत

शारदीय नवरात्रि के दिन क्या करते हैं

  1. प्रतिपदा को घटस्थापना होती है: चावल पर पानी भरा ताँबे या पीतल का कलश रखा जाता है।
  2. कलश के पास मिट्टी में जौ बोए जाते हैं, जो नौ दिन में उग आते हैं।
  3. एक दीया नौ रातों तक लगातार जलाया जाता है।
  4. हर दिन नवदुर्गा के एक रूप की पूजा होती है, शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक।
  5. घरों और मंदिरों में देवी माहात्म्य, यानी दुर्गा सप्तशती, का पाठ होता है।
  6. अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन होता है, जिसमें छोटी बच्चियों को देवी का रूप मानकर खिलाया जाता है।

सवाल जवाब

शारदीय नवरात्रि 2026: पूछे जाने वाले सवाल

शारदीय नवरात्रि 2026 कब है?

शारदीय नवरात्रि 2026 में 11 अक्टूबर, रविवार को है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर, रात 9:20 से 11 अक्टूबर, रात 9:32 तक है। घटस्थापना का समय सुबह 6:20 से सुबह 10:12 तक है, और अभिजित मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तक। समय नई दिल्ली के हैं।

घटस्थापना क्या है?

घटस्थापना का मतलब है कलश की स्थापना। नवरात्रि के पहले दिन चावल पर पानी भरा कलश रखा जाता है, पास में जौ बोए जाते हैं और नौ रात तक दीया जलता है।

नवरात्रि में किस दिन किस देवी की पूजा होती है?

शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक, एक दिन एक रूप: पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे ब्रह्मचारिणी, तीसरे चंद्रघंटा, चौथे कूष्मांडा, पाँचवें स्कंदमाता, छठे कात्यायनी, सातवें कालरात्रि, आठवें महागौरी और नौवें सिद्धिदात्री।

शारदीय नवरात्रि कब होती है?

आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक। अगला दिन विजयादशमी होता है।

गरबा में बीच में दीया क्यों रखते हैं?

गरबा मिट्टी के उस छेदों वाले घड़े के चारों ओर होता है जिसमें दीया जलता है। इसे गर्भ दीप कहते हैं, यानी कोख का दीया, जो जीवन की निशानी है।

गोलू क्या है?

दक्षिण भारत में नवरात्रि पर सीढ़ियों पर गुड़ियाँ सजाने की रीत को तमिलनाडु में गोलू, कर्नाटक में गोम्बे और आंध्र में बोम्मला कोलुवु कहते हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Navaratri, Wikipediaतिथि, घटस्थापना, गरबा, गोलू, मैसूरु, कन्या पूजन, रामलीला
  2. Nava Durga: the nine forms, SmartPujaनौ देवियाँ दिन दिन के क्रम में
  3. Garba of Gujarat declared Intangible Cultural Heritage, IAS Gyanगरबा, गर्भ दीप, डांडिया, यूनेस्को 2023
  4. Ramlila, Wikipediaरामचरितमानस पर रामलीला, लगभग दस रातें, दशहरे पर पुतला
  5. Mysore Dasara, Wikipediaमैसूरु का नाम, महल की रोशनी
  6. Durga, Wikipediaमहिषासुर का रूप बदलना और त्रिशूल से अंत, आंध्र की रीत
  7. Devi Mahatmya, Wikipediaअध्याय दो से चार में महिषासुर, नवरात्रि में पाठ

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।