पंचांग 2026

पंचांग 2026 · आश्विन शुक्ल नवमी

महानवमी 2026

Maha Navami 2026

आज औज़ार भी पूजे जाते हैं, और किताबें भी।

महानवमी 2026 में 19 अक्टूबर, सोमवार को है। आश्विन शुक्ल नवमी तिथि 19 अक्टूबर, सुबह 10:52 से 20 अक्टूबर, दोपहर 12:51 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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उस शाम का चाँद, 58 प्रतिशत रोशन

बस्ता ख़ाली पड़ा है।

किताबें आज पूजा के कमरे में हैं, देवी के आगे।

उनके साथ क़लम और एक पुरानी वीणा, सब पर फूल।

गली में एक ऑटो खड़ा है। उसके माथे पर हल्दी कुमकुम, हैंडल पर गेंदे की माला।

बगल की दुकान में दर्ज़ी की मशीन पर आज कपड़ा ढका है, ऊपर एक फूल।

जिन चीज़ों से रोज़ काम लेते हैं, आज उनके आगे सिर झुकाते हैं।

कहते हैं एक योद्धा ने भी कभी अपने हथियार एक पेड़ में छिपाए थे, और ठीक समय पर वापस निकाले थे।

2026 में कब

महानवमी 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़19 अक्टूबर, सोमवार

तिथिआश्विन शुक्ल नवमी19 अक्टूबर, सुबह 10:52 से 20 अक्टूबर, दोपहर 12:51 तक

नक्षत्रउत्तराषाढ़ासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:24

सूर्यास्तशाम 5:48

चंद्रोदयदोपहर 1:44

अष्टमी 18 अक्टूबर, सुबह 8:29 से 19 अक्टूबर, सुबह 10:52 तक है, उसके बाद नवमी 20 अक्टूबर, दोपहर 12:51 तक। इसलिए इस बरस अष्टमी की पूजा और नवमी, दोनों 19 अक्टूबर को हैं, और संधि पूजा उसी सुबह। बंगाल में महानवमी 20 अक्टूबर को मनाई जाती है।

अगले बरस महानवमी 8 अक्टूबर 2027, शुक्रवार को है: महानवमी 2027, तारीख़ और मुहूर्त

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पहचान

महानवमी क्या है

महानवमी आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है, शारदीय नवरात्रि का नौवाँ और आख़िरी दिन। इस दिन नवदुर्गा के नौवें रूप सिद्धिदात्री की पूजा होती है। उत्तर और मध्य भारत में हवन और कन्या पूजन होता है। दक्षिण भारत में यह आयुध पूजा का दिन है, जब औज़ार, मशीनें, गाड़ियाँ, किताबें और बाजे पूजे जाते हैं; कर्नाटक में यह विजयादशमी से एक दिन पहले है। केरल और तमिलनाडु में इसी के साथ सरस्वती पूजा होती है। और बंगाल की दुर्गा पूजा में यह नवमी का दिन है, हवन, भोग और कुमारी पूजा का।

कथा

महानवमी की कथा

आयुध पूजा की कई कथाएँ कही जाती हैं। लोक में सबसे ज़्यादा सुनी जाने वाली महाभारत से जुड़ी है: अज्ञातवास के आख़िर में अर्जुन ने अपने हथियार एक शमी के पेड़ से वापस निकाले, जहाँ वे छिपाए गए थे, और फिर लड़ाई जीती। इसीलिए हथियारों और औज़ारों की पूजा और शमी के पेड़ की पूजा, दोनों इन दिनों से जुड़ गईं। कुछ लोग इसे देवी की महिषासुर पर जीत से जोड़ते हैं, और कुछ राम की लंका पर जीत से।

मैसूरु में यह कथा आज भी राजमहल में दिखती है। वहाँ महानवमी को राज परिवार अपने हथियारों की पूजा करता है, शाही तलवार की, और फिर उसे हाथी, ऊँट और घोड़ों के जुलूस में घुमाया जाता है। अगले दिन का जुलूस बन्नीमंटप पर ख़त्म होता है, जहाँ शमी के पेड़ की पूजा होती है, उसी पेड़ की जिसे राजा लड़ाई पर जाने से पहले पूजते आए थे। और यह कोई नई रीत नहीं: विजयनगर के राजाओं के समय, चौदहवीं पंद्रहवीं सदी में, यह पूरा उत्सव महानवमी के नाम से ही जाना जाता था।

नौवें दिन की देवी सिद्धिदात्री हैं, नवदुर्गा का आख़िरी रूप। कहते हैं वे आठों सिद्धियाँ देती हैं। नौ रूपों की यात्रा, जो शैलपुत्री, पर्वत की बेटी से शुरू हुई थी, यहाँ पूरी होती है।

कहाँ कैसे

महानवमी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • कर्नाटक

    इसे आयुध पूजे कहते हैं, और यह विजयादशमी से एक दिन पहले होती है। मैसूरु में राज परिवार की तलवार की पूजा होती है और हाथी, ऊँट और घोड़ों के साथ जुलूस निकलता है।

  • तमिलनाडु

    आयुध पूजै और सरस्वती पूजा साथ होती है। किताबें, क़लम और बाजे पूजे जाते हैं, और दफ़्तरों और दुकानों में मशीनें और गाड़ियाँ।

  • केरल

    महानवमी को सरस्वती की पूजा फल, चावल, भुने धान और गुड़ से होती है। अष्टमी की शाम देवी के आगे रखी गई किताबें और औज़ार उत्सव के आख़िर में पूजा एडुप्पु में वापस उठाए जाते हैं।

  • तेलंगाना और आंध्र प्रदेश

    यहाँ इसे आयुध पूजा कहते हैं। घरों में औज़ार और कारोबारों में मशीनें और गाड़ियाँ पूजी जाती हैं, और कई जगह कामगारों को छुट्टी मिलती है।

  • उत्तर और मध्य भारत

    घरों में हवन होता है और नौ छोटी बच्चियों को नवदुर्गा का रूप मानकर बुलाया जाता है: उनके पाँव धोए जाते हैं, कलाई पर धागा बाँधा जाता है, और उन्हें भोजन कराकर विदा किया जाता है।

  • बंगाल

    दुर्गा पूजा की नवमी पर हवन होता है, भोग चढ़ता है, और कई जगह कुमारी पूजा होती है। पंडालों में पुष्पांजलि और धुनुची नाच होता है।

रीत

महानवमी के दिन क्या करते हैं

  1. नवदुर्गा के नौवें रूप सिद्धिदात्री की पूजा होती है।
  2. हवन होता है, अग्नि में आहुति देकर देवी से शुद्धि माँगी जाती है।
  3. नौ बच्चियों का कन्या पूजन होता है: पाँव धोना, कलाई पर धागा, फिर भोजन।
  4. औज़ार, मशीनें और गाड़ियाँ धोकर, सजाकर, उनकी पूजा की जाती है; आज के दफ़्तरों में कंप्यूटर और फ़ोन भी।
  5. किताबें, क़लम और बाजे सरस्वती के आगे रखकर पूजे जाते हैं।
  6. मैसूरु में इन्हीं दिनों शमी के पेड़ की पूजा भी होती है; लोक इसे अर्जुन वाली कथा से जोड़ता है।

रसोई

महानवमी का खाना

  • भुने धान और गुड़ केरल की सरस्वती पूजा का भोग, फल और चावल के साथ।
  • नवमी का भोग बंगाल के पंडालों में देवी को चढ़ने वाला खाना, जो फिर सबमें बँटता है।

सवाल जवाब

महानवमी 2026: पूछे जाने वाले सवाल

महानवमी 2026 कब है?

महानवमी 2026 में 19 अक्टूबर, सोमवार को है। आश्विन शुक्ल नवमी तिथि 19 अक्टूबर, सुबह 10:52 से 20 अक्टूबर, दोपहर 12:51 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

महानवमी को किस देवी की पूजा होती है?

नवदुर्गा के नौवें रूप सिद्धिदात्री की, जिन्हें आठ सिद्धियाँ देने वाली माना जाता है।

आयुध पूजा क्या है?

आयुध पूजा यानी औज़ारों की पूजा। नवमी को औज़ार, मशीनें, गाड़ियाँ, हथियार, किताबें और बाजे साफ़ करके पूजे जाते हैं।

आयुध पूजा क्यों मनाते हैं?

इसकी कई कथाएँ हैं। लोक में कहते हैं कि अर्जुन ने वनवास के बाद अपने हथियार शमी के पेड़ से निकाले थे; कुछ इसे देवी की महिषासुर पर जीत से जोड़ते हैं।

केरल में सरस्वती पूजा कैसे होती है?

दुर्गाष्टमी की शाम पूजा वेप्पु में किताबें देवी के आगे रख दी जाती हैं, महानवमी को सरस्वती की पूजा होती है, और उत्सव के आख़िर में पूजा एडुप्पु में किताबें वापस उठाई जाती हैं।

महानवमी पर हवन क्यों करते हैं?

मान्यता है कि नौ दिन की पूजा नवमी के हवन से पूरी होती है। अग्नि में आहुति देकर देवी से शुद्धि और घर का कुशल माँगा जाता है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Ayudha Puja, Wikipediaनवमी को आयुध पूजा, राज्यों के नाम, क्या पूजा जाता है, अर्जुन और शमी, मैसूरु, केरल का पूजा वेप्पु और एडुप्पु
  2. Maha Navami significance and Ayudha Puja, Shubh Panchangतिथि, हवन, नौ कन्याओं का पूजन, बंगाल की पुष्पांजलि और धुनुची
  3. Saraswati Puja in Kerala, HinduPadमहानवमी पर सरस्वती पूजा, भोग, दुर्गाष्टमी का पूजा वेप्पु
  4. Navaratri, Wikipediaनवमी पर आयुध पूजा, कामगारों की छुट्टी, कन्या पूजन
  5. Mysore Dasara, Wikipediaमहानवमी को शाही तलवार और जुलूस, बन्नीमंटप पर शमी की पूजा, विजयनगर में महानवमी नाम
  6. Durga Puja, Wikipediaबंगाल में नवमी का हवन, भोग, कुमारी पूजा
  7. Nava Durga: the nine forms, SmartPujaसिद्धिदात्री और आठ सिद्धियाँ

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।