आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · आषाढ़
16 जुलाई 2027 का पंचांग
शुक्रवार · आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी
16 जुलाई 2027, शुक्रवार को आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी है, शाम 4:35 तक; उसके बाद चतुर्दशी। नक्षत्र ज्येष्ठा है, सुबह 5:40 तक। सूर्योदय सुबह 5:34 और सूर्यास्त शाम 7:21। राहु काल सुबह 10:44 से दोपहर 12:27 तक है। इस दिन हरेला, जया पार्वती व्रत है। समय नई दिल्ली के हैं।
त्योहार
इस दिन के त्योहार और व्रत
पंचांग
16 जुलाई 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशीशाम 4:35 तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- ज्येष्ठासुबह 5:40 तक, फिर मूल
- योग
- ब्रह्मदोपहर 1:36 तक, फिर ऐंद्र
- करण
- तैतिलशाम 4:35 तक
- वार
- शुक्रवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- आषाढ़ (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- वृश्चिकसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मिथुन
- सूर्योदय
- सुबह 5:34
- सूर्यास्त
- शाम 7:21
- चंद्रोदय
- शाम 5:51
- चंद्रास्त
- रात 3:10
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- रात 3:58 से सुबह 4:46 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:00 से दोपहर 12:55 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:45 से दोपहर 3:40 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 10:44 से दोपहर 12:27 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 3:54 से शाम 5:37 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 7:17 से सुबह 9:00 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जुलाई 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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इस दिन की रामकथा
रामचरितमानस
अवधी · उनतालीस में से एक
अवधी में तुलसीदास की रचना, जो उत्तर भारत में सबसे ज़्यादा पढ़ी और गाई जाती है। यहाँ कथा भक्ति की तरफ़ झुकती है: हनुमान मच्छर जितने छोटे होते हैं, विभीषण का घर तुलसी से पहचाना जाता है, और लौटने से पहले विदा लेना उतना ही ज़रूरी है जितना लंका जलाना।

