आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · आषाढ़
15 जुलाई 2027 का पंचांग
गुरुवार · आषाढ़ शुक्ल द्वादशी
15 जुलाई 2027, गुरुवार को आषाढ़ शुक्ल द्वादशी है, दोपहर 2:41 तक; उसके बाद त्रयोदशी। नक्षत्र ज्येष्ठा है, 16 जुलाई, सुबह 5:40 तक। सूर्योदय सुबह 5:33 और सूर्यास्त शाम 7:21। राहु काल दोपहर 2:10 से दोपहर 3:54 तक है। इस दिन प्रदोष व्रत है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
15 जुलाई 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- आषाढ़ शुक्ल द्वादशीदोपहर 2:41 तक, फिर त्रयोदशी
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा16 जुलाई, सुबह 5:40 तक, फिर मूल
- योग
- शुक्लदोपहर 1:03 तक, फिर ब्रह्म
- करण
- बालवदोपहर 2:41 तक
- वार
- गुरुवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- आषाढ़ (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- वृश्चिकसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मिथुन
- सूर्योदय
- सुबह 5:33
- सूर्यास्त
- शाम 7:21
- चंद्रोदय
- शाम 5:00
- चंद्रास्त
- रात 2:20
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- रात 3:57 से सुबह 4:45 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:59 से दोपहर 12:55 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:45 से दोपहर 3:40 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 2:10 से दोपहर 3:54 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 5:33 से सुबह 7:17 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 9:00 से सुबह 10:44 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जुलाई 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
वाल्मीकि रामायण
संस्कृत · उनतालीस में से एक
सबसे पुरानी रामकथा, और बाकी सबकी नींव। इसका सुंदरकांड अड़सठ सर्गों का है और पूरा का पूरा हनुमान पर टिका है, जो इस ग्रंथ में और कहीं नहीं होता। ब्योरे इसकी पहचान हैं: नगर के भीतर के घर, सोते हुए लोग, राक्षसियों के नाम, और बीच बीच में हनुमान का अपना सोचना।