आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · फाल्गुन
5 मार्च 2027 का पंचांग
शुक्रवार · फाल्गुन कृष्ण द्वादशी
5 मार्च 2027, शुक्रवार को फाल्गुन कृष्ण द्वादशी है, सुबह 9:54 तक; उसके बाद त्रयोदशी। नक्षत्र श्रवण है, 6 मार्च, सुबह 4:21 तक। सूर्योदय सुबह 6:43 और सूर्यास्त शाम 6:23। राहु काल सुबह 11:05 से दोपहर 12:33 तक है। इस दिन हेरथ, प्रदोष व्रत है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
5 मार्च 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- फाल्गुन कृष्ण द्वादशीसुबह 9:54 तक, फिर त्रयोदशी
- नक्षत्र
- श्रवण6 मार्च, सुबह 4:21 तक, फिर धनिष्ठा
- योग
- परिघ6 मार्च, रात 2:42 तक, फिर शिव
- करण
- तैतिलसुबह 9:54 तक
- वार
- शुक्रवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- फाल्गुन (पूर्णिमांत)माघ (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- मकरसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कुंभ
- सूर्योदय
- सुबह 6:43
- सूर्यास्त
- शाम 6:23
- चंद्रोदय
- सुबह 4:52
- चंद्रास्त
- दोपहर 3:43
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:07 से सुबह 5:55 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:10 से दोपहर 12:56 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:30 से दोपहर 3:16 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 11:05 से दोपहर 12:33 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 3:28 से शाम 4:56 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 8:10 से सुबह 9:38 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। मार्च 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामकियेन
थाई · उनतालीस में से एक
थाईलैंड की राष्ट्रीय रामकथा, जिसे आज के रूप में अठारहवीं सदी में राजा राम प्रथम के दरबार ने पूरा किया। नाम बदल जाते हैं: राम यहाँ फ्रा राम हैं, सीता नांग सीदा, रावण थोतसकान, और विभीषण फिपेक। हनुमान यहाँ सफ़ेद वानर हैं और ब्रह्मचारी नहीं। यह कथा पढ़ी कम, नाची और खेली ज़्यादा जाती है, खोन नृत्य और छाया नाटक में।
