पंचांग 2026

पंचांग 2026 · मार्गशीर्ष पूर्णिमा

दत्तात्रेय जयंती 2026

Dattatreya Jayanti 2026

तीन देव, एक बालक। और उस बालक के चौबीस गुरु, जिनमें एक मकड़ी भी है।

दत्तात्रेय जयंती 2026 में 23 दिसंबर, बुधवार को है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि 23 दिसंबर, सुबह 10:48 से 24 दिसंबर, सुबह 6:58 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

दत्तात्रेय जयंती का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

पूर्णिमा: उस रात पूरा चाँद

दो डालों के बीच एक मकड़ी जाला बुन रही है। धागा उसके अपने भीतर से निकलता है।

नीचे धरती है। उस पर कोई चलता है, कोई खोदता है। वह कुछ नहीं कहती।

पास से एक नदी बहती है। ऊपर सूरज, रात को चाँद।

एक अवधूत, यानी सब कुछ छोड़ चुका एक साधु, यह सब देख रहा है।

उसने इन सबको गुरु माना। धरती, पानी, आग, चाँद, सूरज, एक कबूतर, एक मकड़ी।

चौबीस गुरु। और जिसके वे गुरु थे, वह ख़ुद तीन देवों का एक रूप था।

2026 में कब

दत्तात्रेय जयंती 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़23 दिसंबर, बुधवार

तिथिमार्गशीर्ष पूर्णिमा23 दिसंबर, सुबह 10:48 से 24 दिसंबर, सुबह 6:58 तक

नक्षत्ररोहिणीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 7:10

सूर्यास्तशाम 5:30

चंद्रोदयशाम 4:37

अगले बरस दत्तात्रेय जयंती 13 दिसंबर 2027, सोमवार को है: दत्तात्रेय जयंती 2027, तारीख़ और मुहूर्त

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं

आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।

Google कैलेंडर में जोड़ें

  • मुफ़्त
  • कोई साइन अप नहीं
  • नाम, नंबर या ईमेल नहीं
  • जब चाहें हटा दें

दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल · सिर्फ़ यह दिन

सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।

शुभकामना

दत्तात्रेय जयंती का शुभकामना कार्ड

दत्तात्रेय जयंती का शुभकामना कार्ड: दत्तात्रेय जयंती की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

अपनों को दत्तात्रेय जयंती की शुभकामनाएँ भेजिए, इस बरस (2026) की तारीख़ के साथ। कार्ड का QR कोड और साथ जाने वाला लिंक इसी पन्ने पर खुलते हैं।

WhatsApp पर भेजेंकार्ड डाउनलोड करें

फ़ोन पर बटन दबाते ही कार्ड सीधे WhatsApp में चला जाता है, बधाई और लिंक के साथ।

पहचान

दत्तात्रेय जयंती क्या है

दत्तात्रेय जयंती, जिसे दत्त जयंती भी कहते हैं, मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को होती है। यह दत्तात्रेय के जन्म का दिन है, जो पुराणों में अत्रि ऋषि और अनसूया के बेटे हैं, और जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और शिव, तीनों का एक रूप माना जाता है; भागवत, मार्कंडेय और ब्रह्मांड पुराण उन्हें ऐसा ही बताते हैं। वे ज्ञान और त्याग के गुरु माने जाते हैं, और नाथ पंथ में भी उनका आदर है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात के दत्त तीर्थों में यह साल का सबसे बड़ा दिन है: गाणगापुर, नरसोबावाड़ी, औदुंबर, माहूर और गिरनार।

कथा

दत्तात्रेय जयंती की कथा

दत्त भक्तों में कथा ऐसे कही जाती है। अत्रि ऋषि की पत्नी अनसूया अपने पति के प्रति सच्ची निष्ठा के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने बहुत तप किया कि उन्हें ऐसा बेटा हो जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव के बराबर हो। सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती ने अपने पतियों से कहा कि अनसूया की परीक्षा लो।

तीनों देव संन्यासी बनकर अनसूया के दरवाज़े आए और भिक्षा माँगी, पर एक ऐसी शर्त के साथ जिसे मानना किसी पतिव्रता के लिए कठिन था। अनसूया एक तरफ़ मेहमान के धर्म और दूसरी तरफ़ अपने व्रत के बीच फँस गईं। उन्होंने अपने पति का ध्यान किया, अत्रि के पैर धोए जल को तीनों पर छिड़का, और तीनों संन्यासी छोटे छोटे बच्चे बन गए। अनसूया माँ की तरह उन्हें दूध पिलाने लगीं।

अत्रि लौटे, तो उन्होंने अपने तप के बल से सब जान लिया। उन्होंने तीनों बच्चों को गले लगाया, और तीनों मिलकर एक बच्चा बन गए: तीन सिर, छह हाथ। तब देव अपने असली रूप में प्रकट हुए और कहा कि यह बालक हमारे बराबर का ऋषि होगा, और इसका नाम दत्तात्रेय होगा। एक दूसरी कथा कहती है कि देवियों के विनती करने पर तीनों देव लौटे और दंपती को बेटे का वर दिया।

भागवत पुराण के ग्यारहवें स्कंध में, सातवें से नौवें अध्याय तक, कृष्ण उद्धव को एक कथा सुनाते हैं: राजा यदु एक युवा अवधूत से मिले, और अवधूत ने उन्हें अपने चौबीस गुरुओं के बारे में बताया। सूची ऐसे शुरू होती है: 'पृथिवी वायुराकाशमापोऽग्निश्चन्द्रमा रविः' (भागवत 11.7.33), यानी धरती, हवा, आकाश, पानी, आग, चाँद और सूरज। फिर कबूतर, अजगर, समंदर, पतंगा, मधुमक्खी, हाथी, शहद निकालने वाला, हिरन, मछली, पिंगला नाम की एक स्त्री, कुरर पक्षी, एक बच्चा, एक कुँवारी लड़की, तीर बनाने वाला, साँप, मकड़ी और एक कीड़ा। धरती से सहना सीखा, हवा से बिना चिपके सबको छूना, मधुमक्खियों से यह कि जोड़ जोड़कर रखना बेकार है। और फिर भी अवधूत कहते हैं, मेरा असली गुरु मेरा अपना आत्मा है। परंपरा इसी अवधूत को दत्तात्रेय मानती है।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में दत्तात्रेय जयंती

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

वाल्मीकि रामायण

संस्कृत · Valmiki Ramayana

वाल्मीकि रामायण के अयोध्या कांड में, वन की राह पर, राम, सीता और लक्ष्मण अत्रि ऋषि के आश्रम पहुँचते हैं (सर्ग 117 से 119)। अत्रि बताते हैं कि जब दस बरस बारिश नहीं हुई और दुनिया जल रही थी, तब अनसूया ने अपने तप से कंद मूल और फल उगाए और जाह्नवी, यानी गंगा, बहा दी। अनसूया सीता को पास बुलाती हैं, और विदा के समय उन्हें माला, कपड़े, गहने और अंगराग देती हैं: 'मया दत्तमिदं सीते तव गात्राणि शोभयेत्। अनुरूपमसंक्लिष्टं नित्यमेव भविष्यति॥' (अयोध्या कांड 118.19), यानी सीते, मेरा दिया यह तुम्हारे अंगों को सजाए, तुम पर जँचे, कभी मैला न हो, सदा ऐसा ही रहे। उसी शाम सीता इन्हीं से सजकर राम के पास जाती हैं, और अगली भोर तीनों बड़े वन में उतर जाते हैं। पुराणों में यही अनसूया दत्तात्रेय की माँ हैं।

कहाँ कैसे

दत्तात्रेय जयंती कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • गाणगापुर, कर्नाटक

    कलबुर्गी ज़िले का यह तीर्थ गुरुचरित्र की परंपरा का बड़ा ठिकाना है, और पंद्रहवीं सदी के दत्त अवतार माने जाने वाले नरसिंह सरस्वती से जुड़ा है।

  • नरसोबावाड़ी, कोल्हापुर

    शिरोळ तालुका का यह क्षेत्र महाराष्ट्र में दत्त जयंती के सबसे बड़े ठिकानों में गिना जाता है।

  • औदुंबर, सांगली

    पलूस तालुका का यह दत्त क्षेत्र भी जयंती पर भक्तों से भरता है।

  • माहूर, नांदेड़

    श्री क्षेत्र माहूर महाराष्ट्र के उन ठिकानों में है जहाँ यह दिन बड़े पैमाने पर होता है।

  • गिरनार, जूनागढ़

    परंपरा कहती है कि यहाँ की एक सूनी चोटी पर दत्त ने बारह हज़ार बरस तप किया, और वहाँ उनके पैरों के निशान रखे हुए हैं।

रीत

दत्तात्रेय जयंती के दिन क्या करते हैं

  1. भोर में नदी या झरने में नहाते हैं, और बहुत से लोग सूरज उगने से डूबने तक उपवास रखते हैं।
  2. दत्त की मूर्ति पर हल्दी और चंदन का लेप लगाते हैं, कहीं सिंदूर भी।
  3. फूल, धूप, दीप और कपूर से पूजा, और भजन और अभिषेक।
  4. अवधूत गीता, जीवन्मुक्त गीता और गुरुचरित्र पढ़ते हैं। गुरुचरित्र इक्यावन अध्यायों की मराठी पोथी है, जिसमें श्रीपाद श्रीवल्लभ और नरसिंह सरस्वती की कथा है।
  5. दत्त का ध्यान करते हैं, और कई लोग इस दिन अपने गुरु की पूजा करते हैं और एकांत में रहते हैं।
  6. बहुत से भक्त दत्त का मंत्र जपते हैं।

सवाल जवाब

दत्तात्रेय जयंती 2026: पूछे जाने वाले सवाल

दत्तात्रेय जयंती 2026 कब है?

दत्तात्रेय जयंती 2026 में 23 दिसंबर, बुधवार को है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि 23 दिसंबर, सुबह 10:48 से 24 दिसंबर, सुबह 6:58 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

दत्तात्रेय कौन हैं?

अत्रि ऋषि और अनसूया के बेटे, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और शिव, तीनों का एक रूप माना जाता है। वे ज्ञान और त्याग के गुरु माने जाते हैं, और कथा में वे तीन सिर और छह हाथ वाले बालक के रूप में जन्मे।

दत्तात्रेय के चौबीस गुरु कौन से हैं?

भागवत पुराण (11.7.33 से 35) के अनुसार: धरती, हवा, आकाश, पानी, आग, चाँद, सूरज, कबूतर, अजगर, समंदर, पतंगा, मधुमक्खी, हाथी, शहद निकालने वाला, हिरन, मछली, पिंगला, कुरर पक्षी, बच्चा, कुँवारी लड़की, तीर बनाने वाला, साँप, मकड़ी और कीड़ा।

दत्त जयंती पर गुरुचरित्र क्यों पढ़ते हैं?

गुरुचरित्र इक्यावन अध्यायों की मराठी पोथी है, जो दत्त के अवतार माने जाने वाले श्रीपाद श्रीवल्लभ और नरसिंह सरस्वती की कथा कहती है। इसलिए दत्त भक्त इस दिन इसे अवधूत गीता के साथ पढ़ते हैं।

अनसूया कौन थीं?

अत्रि ऋषि की पत्नी। वाल्मीकि रामायण में अत्रि बताते हैं कि अनसूया ने दस बरस के सूखे में अपने तप से फल उगाए और गंगा बहाई, और अनसूया सीता को कभी मैले न होने वाले माला, कपड़े और अंगराग देती हैं। पुराणों में वे दत्तात्रेय की माँ हैं।

दत्त के मुख्य तीर्थ कौन से हैं?

कर्नाटक में गाणगापुर; महाराष्ट्र में नरसोबावाड़ी, औदुंबर और माहूर; और गुजरात में गिरनार, जहाँ उनके पैरों के निशान माने जाते हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Dattatreya Jayanthi (The Divine Life Society)अनसूया का तप, देवियों का कहना, संन्यासियों की परीक्षा, पैरों का जल, तीन बच्चे, एक बालक, चौबीस गुरु और उनकी सीख, असली गुरु आत्मा, एकांत और पाठ
  2. Shree Datta Jayanti (Incredible India)मार्गशीर्ष पूर्णिमा, नरसोबावाड़ी, माहूर, औदुंबर, हल्दी चंदन, उपवास, नाथ पंथ
  3. Dattatreya (Wikipedia)तीन देवों का रूप, भागवत, मार्कंडेय और ब्रह्मांड पुराण, गिरनार के पैरों के निशान और तप, गाणगापुर और नरसिंह सरस्वती, गुरुचरित्र
  4. Srimad Bhagavatam 11.7.33 (Vedabase)चौबीस गुरुओं की सूची, कृष्ण का उद्धव को सुनाना
  5. 24 Gurus of Bhagavan Dattatreya (Advaita-L)भागवत 11.7 से 9 में दत्तात्रेय का राजा यदु को गुरुओं की बात बताना
  6. Valmiki Ramayana, Ayodhya Kanda, Sarga 117 (Vedapath)अत्रि का आश्रम, दस बरस का सूखा, कंद मूल और जाह्नवी
  7. Valmiki Ramayana, Ayodhya Kanda, Sarga 118 (Vedapath)अनसूया के दिए माला, कपड़े, गहने और अंगराग, श्लोक 18 और 19
  8. Valmiki Ramayana, Ayodhya Kanda, Sarga 119 (Vedapath)सीता का सजकर राम के पास जाना, भोर में वन में जाना

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।