आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · पौष
14 दिसंबर 2027 का पंचांग
मंगलवार · पौष कृष्ण प्रतिपदा
14 दिसंबर 2027, मंगलवार को पौष कृष्ण प्रतिपदा है, शाम 7:02 तक; उसके बाद द्वितीया। नक्षत्र मृगशिरा है, दोपहर 1:25 तक। सूर्योदय सुबह 7:05 और सूर्यास्त शाम 5:26। राहु काल दोपहर 2:51 से शाम 4:08 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
14 दिसंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- पौष कृष्ण प्रतिपदाशाम 7:02 तक, फिर द्वितीया
- नक्षत्र
- मृगशिरादोपहर 1:25 तक, फिर आर्द्रा
- योग
- शुभशाम 4:46 तक, फिर शुक्ल
- करण
- बालवसुबह 8:22 तक
- वार
- मंगलवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- पौष (पूर्णिमांत)मार्गशीर्ष (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मिथुनसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- वृश्चिक
- सूर्योदय
- सुबह 7:05
- सूर्यास्त
- शाम 5:26
- चंद्रोदय
- शाम 6:05
- चंद्रास्त
- सुबह 7:42
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:29 से सुबह 6:17 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:55 से दोपहर 12:36 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 1:59 से दोपहर 2:40 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 2:51 से शाम 4:08 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 9:40 से सुबह 10:58 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 12:16 से दोपहर 1:33 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। दिसंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
सप्तकांड रामायण
असमिया · उनतालीस में से एक
असमिया की पहली बड़ी रामकथा, माधव कंदली की, जो चौदहवीं सदी में लिखी गई। कवि ने ख़ुद कहा है कि उन्होंने लंबी बातें छोड़कर सार लिया, ताकि आम लोग समझ सकें। यहाँ राम और सीता अपनी कमज़ोरियों के साथ इंसान हैं।