आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · कार्तिक
11 नवंबर 2027 का पंचांग
गुरुवार · कार्तिक शुक्ल द्वादशी
11 नवंबर 2027, गुरुवार को कार्तिक शुक्ल द्वादशी है, सुबह 10:08 तक; उसके बाद त्रयोदशी। नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद है, सुबह 7:02 तक। सूर्योदय सुबह 6:40 और सूर्यास्त शाम 5:30। राहु काल दोपहर 1:26 से दोपहर 2:47 तक है। इस दिन तुलसी विवाह, प्रदोष व्रत है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
11 नवंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- कार्तिक शुक्ल द्वादशीसुबह 10:08 तक, फिर त्रयोदशी
- नक्षत्र
- उत्तरा भाद्रपदसुबह 7:02 तक, फिर रेवती
- योग
- वज्ररात 10:58 तक, फिर सिद्धि
- करण
- बालवसुबह 10:08 तक
- वार
- गुरुवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- कार्तिक (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मीनसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- तुला
- सूर्योदय
- सुबह 6:40
- सूर्यास्त
- शाम 5:30
- चंद्रोदय
- दोपहर 3:27
- चंद्रास्त
- रात 3:45
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:04 से सुबह 5:52 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:43 से दोपहर 12:27 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 1:53 से दोपहर 2:37 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 1:26 से दोपहर 2:47 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 6:40 से सुबह 8:01 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 9:23 से सुबह 10:44 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। नवंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
अध्यात्म रामायण
संस्कृत · उनतालीस में से एक
दर्शन की तरफ़ झुकी हुई कथा, जो शिव पार्वती के संवाद के रूप में चलती है। यहाँ राम ब्रह्म हैं और सीता माया, इसलिए द्वार पर रोकने वाली भी पहले से जानती है कि जनक के घर जन्मी योगमाया हैं। इसका सुंदरकांड पाँच सर्गों का है।
