आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · कार्तिक
12 नवंबर 2027 का पंचांग
शुक्रवार · कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी
12 नवंबर 2027, शुक्रवार को कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी है, सुबह 10:22 तक; उसके बाद चतुर्दशी। नक्षत्र रेवती है, सुबह 7:56 तक। सूर्योदय सुबह 6:41 और सूर्यास्त शाम 5:29। राहु काल सुबह 10:44 से दोपहर 12:05 तक है। इस दिन वैकुंठ चतुर्दशी है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
12 नवंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- कार्तिक शुक्ल त्रयोदशीसुबह 10:22 तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- रेवतीसुबह 7:56 तक, फिर अश्विनी
- योग
- सिद्धिरात 9:43 तक, फिर व्यतीपात
- करण
- तैतिलसुबह 10:22 तक
- वार
- शुक्रवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- कार्तिक (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मीनसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- तुला
- सूर्योदय
- सुबह 6:41
- सूर्यास्त
- शाम 5:29
- चंद्रोदय
- शाम 4:00
- चंद्रास्त
- सुबह 4:42
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:05 से सुबह 5:53 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:43 से दोपहर 12:27 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 1:53 से दोपहर 2:36 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 10:44 से दोपहर 12:05 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 2:47 से शाम 4:08 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 8:02 से सुबह 9:23 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। नवंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
कण्णस्स रामायणम्
मलयालम · उनतालीस में से एक
मलयालम की उस दौर की रामकथा जिसे निरणम के राम पणिक्कर ने चौदहवीं सदी में रचा, और जिसे कण्णस्स रामायणम् कहते हैं। एषुत्तच्छन से यह पुरानी है, और इसी तरह की रचनाओं ने उस भाषा को कथा कहने लायक बनाया। यह काम निरणम वाले कवियों के नाम से जाना जाता है।
