आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · आश्विन
24 सितंबर 2027 का पंचांग
शुक्रवार · आश्विन कृष्ण नवमी
24 सितंबर 2027, शुक्रवार को आश्विन कृष्ण नवमी है, 25 सितंबर, रात 12:55 तक; उसके बाद दशमी। नक्षत्र आर्द्रा है, दोपहर 3:59 तक। सूर्योदय सुबह 6:10 और सूर्यास्त शाम 6:16। राहु काल सुबह 10:42 से दोपहर 12:13 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
24 सितंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- आश्विन कृष्ण नवमी25 सितंबर, रात 12:55 तक, फिर दशमी
- नक्षत्र
- आर्द्रादोपहर 3:59 तक, फिर पुनर्वसु
- योग
- वरीयानरात 8:53 तक, फिर परिघ
- करण
- तैतिलदोपहर 1:59 तक
- वार
- शुक्रवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- आश्विन (पूर्णिमांत)भाद्रपद (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मिथुनसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कन्या
- सूर्योदय
- सुबह 6:10
- सूर्यास्त
- शाम 6:16
- चंद्रोदय
- इस दिन नहीं
- चंद्रास्त
- दोपहर 2:06
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:34 से सुबह 5:22 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:49 से दोपहर 12:37 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:14 से दोपहर 3:02 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 10:42 से दोपहर 12:13 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 3:15 से शाम 4:45 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 7:41 से सुबह 9:12 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। सितंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रंगनाथ रामायण
तेलुगु, द्विपद छंद · उनतालीस में से एक
तेलुगु की पहली पूरी रामायण, द्विपद छंद में, जिसे गाकर सुनाया जाता है। इसीलिए यह दरबार की नहीं, लोगों की कथा लगती है। इसमें कई लोक प्रसंग जुड़े हैं, जैसे पुल बनाने में मदद करने वाली गिलहरी, और आज भी चमड़े की कठपुतलियों वाले नाटक इसके द्विपद गाते हैं।