आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · आश्विन
22 सितंबर 2027 का पंचांग
बुधवार · आश्विन कृष्ण सप्तमी
22 सितंबर 2027, बुधवार को आश्विन कृष्ण सप्तमी है, 23 सितंबर, सुबह 4:37 तक; उसके बाद अष्टमी। नक्षत्र रोहिणी है, शाम 5:52 तक। सूर्योदय सुबह 6:09 और सूर्यास्त शाम 6:18। राहु काल दोपहर 12:14 से दोपहर 1:45 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
22 सितंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- आश्विन कृष्ण सप्तमी23 सितंबर, सुबह 4:37 तक, फिर अष्टमी
- नक्षत्र
- रोहिणीशाम 5:52 तक, फिर मृगशिरा
- योग
- सिद्धि23 सितंबर, रात 2:00 तक, फिर व्यतीपात
- करण
- विष्टि (भद्रा)शाम 5:18 तक
- वार
- बुधवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- आश्विन (पूर्णिमांत)भाद्रपद (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- वृषभसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कन्या
- सूर्योदय
- सुबह 6:09
- सूर्यास्त
- शाम 6:18
- चंद्रोदय
- रात 10:28
- चंद्रास्त
- दोपहर 12:10
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:33 से सुबह 5:21 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:50 से दोपहर 12:38 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है। बुधवार को इसे नहीं लेते।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:15 से दोपहर 3:04 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 12:14 से दोपहर 1:45 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 7:40 से सुबह 9:12 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 10:43 से दोपहर 12:14 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। सितंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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इस दिन की रामकथा
आनंद रामायण
संस्कृत · उनतालीस में से एक
नौ कांडों का ग्रंथ, जिसमें पूरी वाल्मीकि कथा पहले ही कांड में सिमट जाती है, और बाक़ी आठ कांड नई कथाओं के हैं। इसमें ऐसे कई प्रसंग जुड़े हैं जो पुराने पाठों में नहीं मिलते। इसका रामरक्षा स्तोत्र आज भी रोज़ पढ़ा जाता है।