आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · भाद्रपद
11 सितंबर 2027 का पंचांग
शनिवार · भाद्रपद शुक्ल एकादशी
11 सितंबर 2027, शनिवार को भाद्रपद शुक्ल एकादशी है, रात 7:37 तक; उसके बाद द्वादशी। नक्षत्र उत्तराषाढ़ा है, 12 सितंबर, रात 2:59 तक। सूर्योदय सुबह 6:04 और सूर्यास्त शाम 6:32। राहु काल सुबह 9:11 से सुबह 10:44 तक है। इस दिन परिवर्तिनी एकादशी है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
11 सितंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- भाद्रपद शुक्ल एकादशीरात 7:37 तक, फिर द्वादशी
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा12 सितंबर, रात 2:59 तक, फिर श्रवण
- योग
- शोभन12 सितंबर, सुबह 6:43 तक, फिर अतिगंड
- करण
- वणिजसुबह 6:18 तक
- वार
- शनिवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- भाद्रपद (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- धनुसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- सिंह
- सूर्योदय
- सुबह 6:04
- सूर्यास्त
- शाम 6:32
- चंद्रोदय
- दोपहर 3:55
- चंद्रास्त
- रात 1:43
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:28 से सुबह 5:16 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:53 से दोपहर 12:43 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:22 से दोपहर 3:12 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 9:11 से सुबह 10:44 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 1:51 से दोपहर 3:25 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 6:04 से सुबह 7:37 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। सितंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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इस दिन की रामकथा
कवितावली
ब्रजभाषा · उनतालीस में से एक
तुलसीदास की दूसरी रामकथा, मानस से अलग। यह ब्रजभाषा में है, कवित्त और सवैयों में, और पूरी कथा क्रम से नहीं चलती, चुने हुए दृश्य ज़ोर से कहे जाते हैं। इसका सुंदरकांड लंका दहन को बहुत फैलाकर कहता है, लंका के लोगों की आँख से। एक ही कवि, और दो बिल्कुल अलग कथाएँ।