आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · भाद्रपद
12 सितंबर 2027 का पंचांग
रविवार · भाद्रपद शुक्ल द्वादशी
12 सितंबर 2027, रविवार को भाद्रपद शुक्ल द्वादशी है, रात 10:13 तक; उसके बाद त्रयोदशी। नक्षत्र श्रवण है, 13 सितंबर, सुबह 6:05 तक। सूर्योदय सुबह 6:04 और सूर्यास्त शाम 6:30। राहु काल शाम 4:57 से शाम 6:30 तक है। इस दिन ओणम, वामन जयंती है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
12 सितंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- भाद्रपद शुक्ल द्वादशीरात 10:13 तक, फिर त्रयोदशी
- नक्षत्र
- श्रवण13 सितंबर, सुबह 6:05 तक, फिर धनिष्ठा
- योग
- शोभनसुबह 6:43 तक, फिर अतिगंड
- करण
- बवसुबह 8:56 तक
- वार
- रविवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- भाद्रपद (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मकरसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- सिंह
- सूर्योदय
- सुबह 6:04
- सूर्यास्त
- शाम 6:30
- चंद्रोदय
- शाम 4:30
- चंद्रास्त
- रात 2:39
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:28 से सुबह 5:16 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:53 से दोपहर 12:42 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:22 से दोपहर 3:11 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- शाम 4:57 से शाम 6:30 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 12:17 से दोपहर 1:51 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 3:24 से शाम 4:57 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। सितंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
यम ज़ातदो
बर्मी · उनतालीस में से एक
बर्मा की रामकथा, जिसका नाम यम ज़ातदो है, यानी राम की जातक कथा। बर्मा में यह कथा मंच की कथा है, और वहाँ के लोग इसे अपनी जातक कथाओं में गिनते हैं। लिखे हुए पाठ से ज़्यादा यह खेली जाने वाली कथा है।

