आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · भाद्रपद
24 अगस्त 2027 का पंचांग
मंगलवार · भाद्रपद कृष्ण सप्तमी
24 अगस्त 2027, मंगलवार को भाद्रपद कृष्ण सप्तमी है, रात 8:25 तक; उसके बाद अष्टमी। नक्षत्र भरणी है, दोपहर 12:38 तक। सूर्योदय सुबह 5:55 और सूर्यास्त शाम 6:52। राहु काल दोपहर 3:38 से शाम 5:15 तक है। इस दिन जन्माष्टमी, कालाष्टमी है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
24 अगस्त 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- भाद्रपद कृष्ण सप्तमीरात 8:25 तक, फिर अष्टमी
- नक्षत्र
- भरणीदोपहर 12:38 तक, फिर कृत्तिका
- योग
- ध्रुवरात 11:49 तक, फिर व्याघात
- करण
- विष्टि (भद्रा)सुबह 8:44 तक
- वार
- मंगलवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- भाद्रपद (पूर्णिमांत)श्रावण (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मेषसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- सिंह
- सूर्योदय
- सुबह 5:55
- सूर्यास्त
- शाम 6:52
- चंद्रोदय
- रात 10:46
- चंद्रास्त
- दोपहर 12:11
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:19 से सुबह 5:07 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:58 से दोपहर 12:49 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:33 से दोपहर 3:25 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 3:38 से शाम 5:15 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 9:09 से सुबह 10:46 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 12:23 से दोपहर 2:01 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। अगस्त 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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इस दिन की रामकथा
रामचरितमानस
अवधी · उनतालीस में से एक
अवधी में तुलसीदास की रचना, जो उत्तर भारत में सबसे ज़्यादा पढ़ी और गाई जाती है। यहाँ कथा भक्ति की तरफ़ झुकती है: हनुमान मच्छर जितने छोटे होते हैं, विभीषण का घर तुलसी से पहचाना जाता है, और लौटने से पहले विदा लेना उतना ही ज़रूरी है जितना लंका जलाना।