आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · ज्येष्ठ
16 जून 2027 का पंचांग
बुधवार · ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी
16 जून 2027, बुधवार को ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी है, 17 जून, रात 3:21 तक; उसके बाद चतुर्दशी। नक्षत्र विशाखा है, रात 7:44 तक। सूर्योदय सुबह 5:23 और सूर्यास्त शाम 7:21। राहु काल दोपहर 12:22 से दोपहर 2:07 तक है। इस दिन मुहर्रम, प्रदोष व्रत है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
16 जून 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी17 जून, रात 3:21 तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- विशाखारात 7:44 तक, फिर अनुराधा
- योग
- शिवसुबह 6:10 तक, फिर सिद्ध
- करण
- कौलवदोपहर 2:53 तक
- वार
- बुधवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- तुलासूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मिथुन
- सूर्योदय
- सुबह 5:23
- सूर्यास्त
- शाम 7:21
- चंद्रोदय
- शाम 5:11
- चंद्रास्त
- रात 2:52
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- रात 3:47 से सुबह 4:35 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:54 से दोपहर 12:50 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है। बुधवार को इसे नहीं लेते।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:41 से दोपहर 3:37 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 12:22 से दोपहर 2:07 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 7:08 से सुबह 8:52 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 10:37 से दोपहर 12:22 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जून 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामायण कल्पवृक्षम्
तेलुगु · उनतालीस में से एक
तेलुगु की वह रामकथा जिसे विश्वनाथ सत्यनारायण ने बीसवीं सदी में रचा और जिसका नाम है रामायण कल्पवृक्षम्। यह उस समय लिखी गई जब लोग कह रहे थे कि अब पुरानी कथाओं का ज़माना गया। कवि ने वही कथा दोबारा कही, अपने ढंग से, और उसी पर उन्हें ज्ञानपीठ मिला। यह बताता है कि यह कथा किसी पुरानी सदी में बंद नहीं हुई।