आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · ज्येष्ठ
17 जून 2027 का पंचांग
गुरुवार · ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी
17 जून 2027, गुरुवार को ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी है, 18 जून, सुबह 4:35 तक; उसके बाद पूर्णिमा। नक्षत्र अनुराधा है, रात 9:30 तक। सूर्योदय सुबह 5:23 और सूर्यास्त शाम 7:21। राहु काल दोपहर 2:07 से दोपहर 3:51 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
17 जून 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी18 जून, सुबह 4:35 तक, फिर पूर्णिमा
- नक्षत्र
- अनुराधारात 9:30 तक, फिर ज्येष्ठा
- योग
- सिद्धसुबह 5:53 तक, फिर साध्य
- करण
- गरदोपहर 3:55 तक
- वार
- गुरुवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- वृश्चिकसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मिथुन
- सूर्योदय
- सुबह 5:23
- सूर्यास्त
- शाम 7:21
- चंद्रोदय
- शाम 6:09
- चंद्रास्त
- रात 3:35
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- रात 3:47 से सुबह 4:35 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:54 से दोपहर 12:50 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:42 से दोपहर 3:37 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 2:07 से दोपहर 3:51 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 5:23 से सुबह 7:08 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 8:53 से सुबह 10:37 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जून 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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जोड़ते समय “Remove Alerts” बंद कर दें (टिक हटा दें), तो बड़े त्योहारों की सुबह 7 बजे याद भी आएगी कि अपनों को कार्ड भेजना है।
- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल
इस दिन की रामकथा
रामचंद्र चरित पुराण
कन्नड़ · उनतालीस में से एक
कन्नड़ की सबसे पुरानी बची हुई रामकथा, जैन परंपरा की, जिसे नागचंद्र ने लगभग 1100 ईस्वी में रचा। नागचंद्र को अभिनव पंप यानी नए पंप कहा गया, इसलिए इसे पंप रामायण भी कहते हैं। यहाँ रावण को लक्ष्मण मारते हैं, और रावण एक दुखी नायक है।