आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · वैशाख
10 मई 2027 का पंचांग
सोमवार · वैशाख शुक्ल चतुर्थी
10 मई 2027, सोमवार को वैशाख शुक्ल चतुर्थी है, सुबह 6:23 तक; उसके बाद पंचमी। नक्षत्र आर्द्रा है, शाम 6:09 तक। सूर्योदय सुबह 5:34 और सूर्यास्त शाम 7:02। राहु काल सुबह 7:15 से सुबह 8:56 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
10 मई 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- वैशाख शुक्ल चतुर्थीसुबह 6:23 तक, फिर पंचमी
- नक्षत्र
- आर्द्राशाम 6:09 तक, फिर पुनर्वसु
- योग
- धृतिरात 8:07 तक, फिर शूल
- करण
- विष्टि (भद्रा)सुबह 6:23 तक
- वार
- सोमवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- वैशाख (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मिथुनसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मेष
- सूर्योदय
- सुबह 5:34
- सूर्यास्त
- शाम 7:02
- चंद्रोदय
- सुबह 8:47
- चंद्रास्त
- रात 11:22
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- रात 3:58 से सुबह 4:46 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:51 से दोपहर 12:45 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:32 से दोपहर 3:26 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 7:15 से सुबह 8:56 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 10:37 से दोपहर 12:18 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 1:59 से दोपहर 3:40 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। मई 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामावतार
ब्रजभाषा · उनतालीस में से एक
दसम ग्रंथ के चौबीस अवतार में बीसवाँ, राम अवतार। ब्रजभाषा में है और गुरमुखी लिपि में लिखा है, और परंपरा इसे गुरु गोबिंद सिंह की रचना मानती है। यह 1698 में सतलुज के किनारे, नैना देवी पहाड़ी के नीचे पूरा हुआ। इसमें पूरा सुंदरकांड एक ही छंद में है: हनुमान जी अँगूठी लेकर जाते हैं, नगर जलाते हैं, अक्षय कुमार को मारते हैं और लौट आते हैं। इसके आख़िरी सवैया और दोहा आज भी रोज़ रहरास साहिब में पढ़े जाते हैं।