आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · फाल्गुन
20 मार्च 2027 का पंचांग
शनिवार · फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी
20 मार्च 2027, शनिवार को फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी है, रात 8:46 तक; उसके बाद चतुर्दशी। नक्षत्र मघा है, रात 11:45 तक। सूर्योदय सुबह 6:26 और सूर्यास्त शाम 6:32। राहु काल सुबह 9:27 से सुबह 10:58 तक है। इस दिन शनि प्रदोष व्रत है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
20 मार्च 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशीरात 8:46 तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- मघारात 11:45 तक, फिर पूर्वा फाल्गुनी
- योग
- धृतिरात 8:06 तक, फिर शूल
- करण
- कौलवसुबह 10:01 तक
- वार
- शनिवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- फाल्गुन (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- सिंहसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मीन
- सूर्योदय
- सुबह 6:26
- सूर्यास्त
- शाम 6:32
- चंद्रोदय
- शाम 4:29
- चंद्रास्त
- सुबह 4:52
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:50 से सुबह 5:38 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:05 से दोपहर 12:53 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:30 से दोपहर 3:18 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 9:27 से सुबह 10:58 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 2:00 से दोपहर 3:31 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 6:26 से सुबह 7:57 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। मार्च 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
वाल्मीकि रामायण
संस्कृत · उनतालीस में से एक
सबसे पुरानी रामकथा, और बाकी सबकी नींव। इसका सुंदरकांड अड़सठ सर्गों का है और पूरा का पूरा हनुमान पर टिका है, जो इस ग्रंथ में और कहीं नहीं होता। ब्योरे इसकी पहचान हैं: नगर के भीतर के घर, सोते हुए लोग, राक्षसियों के नाम, और बीच बीच में हनुमान का अपना सोचना।