आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · फाल्गुन
21 मार्च 2027 का पंचांग
रविवार · फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी
21 मार्च 2027, रविवार को फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी है, शाम 6:22 तक; उसके बाद पूर्णिमा। नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी है, रात 10:07 तक। सूर्योदय सुबह 6:25 और सूर्यास्त शाम 6:33। राहु काल शाम 5:02 से शाम 6:33 तक है। इस दिन फाल्गुन पूर्णिमा व्रत है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
21 मार्च 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशीशाम 6:22 तक, फिर पूर्णिमा
- नक्षत्र
- पूर्वा फाल्गुनीरात 10:07 तक, फिर उत्तरा फाल्गुनी
- योग
- शूलशाम 4:59 तक, फिर गंड
- करण
- गरसुबह 7:32 तक
- वार
- रविवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- फाल्गुन (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- सिंहसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मीन
- सूर्योदय
- सुबह 6:25
- सूर्यास्त
- शाम 6:33
- चंद्रोदय
- शाम 5:34
- चंद्रास्त
- सुबह 5:27
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:49 से सुबह 5:37 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:04 से दोपहर 12:53 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:30 से दोपहर 3:19 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- शाम 5:02 से शाम 6:33 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 12:29 से दोपहर 2:00 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 3:31 से शाम 5:02 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। मार्च 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
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इस दिन की रामकथा
रामचरितमानस
अवधी · उनतालीस में से एक
अवधी में तुलसीदास की रचना, जो उत्तर भारत में सबसे ज़्यादा पढ़ी और गाई जाती है। यहाँ कथा भक्ति की तरफ़ झुकती है: हनुमान मच्छर जितने छोटे होते हैं, विभीषण का घर तुलसी से पहचाना जाता है, और लौटने से पहले विदा लेना उतना ही ज़रूरी है जितना लंका जलाना।