आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · पौष
18 जनवरी 2027 का पंचांग
सोमवार · पौष शुक्ल दशमी
18 जनवरी 2027, सोमवार को पौष शुक्ल दशमी है, सुबह 10:28 तक; उसके बाद एकादशी। नक्षत्र कृत्तिका है, रात 9:06 तक। सूर्योदय सुबह 7:15 और सूर्यास्त शाम 5:48। राहु काल सुबह 8:34 से सुबह 9:53 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
18 जनवरी 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- पौष शुक्ल दशमीसुबह 10:28 तक, फिर एकादशी
- नक्षत्र
- कृत्तिकारात 9:06 तक, फिर रोहिणी
- योग
- शुभसुबह 9:34 तक, फिर शुक्ल
- करण
- गरसुबह 10:28 तक
- वार
- सोमवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- पौष (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- वृषभसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मकर
- सूर्योदय
- सुबह 7:15
- सूर्यास्त
- शाम 5:48
- चंद्रोदय
- दोपहर 1:17
- चंद्रास्त
- रात 2:45
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:39 से सुबह 6:27 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:10 से दोपहर 12:53 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:17 से दोपहर 2:59 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 8:34 से सुबह 9:53 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 11:12 से दोपहर 12:32 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 1:51 से दोपहर 3:10 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जनवरी 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
गिरधर रामायण
गुजराती · उनतालीस में से एक
गुजराती की वह रामकथा जिसे गिरधर ने सन 1835 में पूरा किया। उन्होंने कथा मुख्य रूप से वाल्मीकि और हनुमन्नाटक से ली, और उसे सीधी सादी भाषा में लिखा। सबसे बड़ी बात इसका संगीत है: यह कई रागों और छंदों में बँधी है, जैसे धनाश्री, बिलावल, मारू, सोरठ और आसावरी, इसलिए इसे पढ़ा कम और गाया ज़्यादा जाता है।