आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · पौष
27 दिसंबर 2027 का पंचांग
सोमवार · पौष अमावस्या
27 दिसंबर 2027, सोमवार को पौष अमावस्या है, 28 दिसंबर, रात 1:42 तक; उसके बाद प्रतिपदा। नक्षत्र मूल है, 28 दिसंबर, सुबह 5:07 तक। सूर्योदय सुबह 7:12 और सूर्यास्त शाम 5:32। राहु काल सुबह 8:30 से सुबह 9:47 तक है। इस दिन हनुमत जयंती (तमिल), सोमवती अमावस्या है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
27 दिसंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- पौष अमावस्या28 दिसंबर, रात 1:42 तक, फिर प्रतिपदा
- नक्षत्र
- मूल28 दिसंबर, सुबह 5:07 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा
- योग
- गंडसुबह 8:04 तक, फिर वृद्धि
- करण
- चतुष्पददोपहर 12:59 तक
- वार
- सोमवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- पौष (पूर्णिमांत)मार्गशीर्ष (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- धनुसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- धनु
- सूर्योदय
- सुबह 7:12
- सूर्यास्त
- शाम 5:32
- चंद्रोदय
- सुबह 6:46
- चंद्रास्त
- शाम 5:02
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:36 से सुबह 6:24 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:01 से दोपहर 12:43 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:05 से दोपहर 2:47 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 8:30 से सुबह 9:47 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 11:05 से दोपहर 12:22 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 1:39 से दोपहर 2:57 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। दिसंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
सिद्धि रामायण
नेपाल भाषा · उनतालीस में से एक
नेपाल भाषा यानी नेवारी में लिखी रामकथा, जिसे सिद्धिदास महाजु ने बीसवीं सदी की शुरुआत में रचा। नेपाल में एक ही समय कई भाषाएँ चलती हैं, और यह उस दूसरी भाषा की रामकथा है, भानुभक्त वाली नेपाली से अलग। एक ही देश, दो ज़बानें, और दोनों में अपनी अपनी रामकथा।