आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · मार्गशीर्ष
26 नवंबर 2027 का पंचांग
शुक्रवार · मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी
26 नवंबर 2027, शुक्रवार को मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी है, सुबह 9:48 तक; उसके बाद चतुर्दशी। नक्षत्र स्वाती है, शाम 6:00 तक। सूर्योदय सुबह 6:52 और सूर्यास्त शाम 5:24। राहु काल सुबह 10:49 से दोपहर 12:08 तक है। इस दिन मासिक शिवरात्रि है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
26 नवंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशीसुबह 9:48 तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- स्वातीशाम 6:00 तक, फिर विशाखा
- योग
- सौभाग्यसुबह 7:19 तक, फिर शोभन
- करण
- वणिजसुबह 9:48 तक
- वार
- शुक्रवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)कार्तिक (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- तुलासूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- वृश्चिक
- सूर्योदय
- सुबह 6:52
- सूर्यास्त
- शाम 5:24
- चंद्रोदय
- सुबह 4:57
- चंद्रास्त
- दोपहर 3:49
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:16 से सुबह 6:04 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:47 से दोपहर 12:29 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 1:54 से दोपहर 2:36 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 10:49 से दोपहर 12:08 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 2:46 से शाम 4:05 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 8:11 से सुबह 9:30 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। नवंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
गिरधर रामायण
गुजराती · उनतालीस में से एक
गुजराती की वह रामकथा जिसे गिरधर ने सन 1835 में पूरा किया। उन्होंने कथा मुख्य रूप से वाल्मीकि और हनुमन्नाटक से ली, और उसे सीधी सादी भाषा में लिखा। सबसे बड़ी बात इसका संगीत है: यह कई रागों और छंदों में बँधी है, जैसे धनाश्री, बिलावल, मारू, सोरठ और आसावरी, इसलिए इसे पढ़ा कम और गाया ज़्यादा जाता है।