आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · आश्विन
29 सितंबर 2027 का पंचांग
बुधवार · आश्विन कृष्ण चतुर्दशी
29 सितंबर 2027, बुधवार को आश्विन कृष्ण चतुर्दशी है, सुबह 10:56 तक; उसके बाद अमावस्या। नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी है, 30 सितंबर, सुबह 4:01 तक। सूर्योदय सुबह 6:13 और सूर्यास्त शाम 6:10। राहु काल दोपहर 12:11 से दोपहर 1:41 तक है। इस दिन महालया है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
29 सितंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- आश्विन कृष्ण चतुर्दशीसुबह 10:56 तक, फिर अमावस्या
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी30 सितंबर, सुबह 4:01 तक, फिर हस्त
- योग
- शुक्ल30 सितंबर, रात 12:27 तक, फिर ब्रह्म
- करण
- शकुनिसुबह 10:56 तक
- वार
- बुधवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- आश्विन (पूर्णिमांत)भाद्रपद (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- सिंहसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कन्या
- सूर्योदय
- सुबह 6:13
- सूर्यास्त
- शाम 6:10
- चंद्रोदय
- सुबह 5:09
- चंद्रास्त
- शाम 5:29
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:37 से सुबह 5:25 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:48 से दोपहर 12:35 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है। बुधवार को इसे नहीं लेते।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:11 से दोपहर 2:59 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 12:11 से दोपहर 1:41 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 7:42 से सुबह 9:12 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 10:42 से दोपहर 12:11 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। सितंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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इस दिन की रामकथा
तोरवे रामायण
कन्नड़ · उनतालीस में से एक
कन्नड़ की पहली वैष्णव रामकथा, भामिनी षट्पदी छंद में, जिसे गाकर पढ़ा जाता है। इसके कवि नरहरि को कुमार वाल्मीकि कहा जाता है। कथा शिव पार्वती को सुनाते हैं, और यह मोटे तौर पर वाल्मीकि के साथ चलती है।