आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · आश्विन
30 सितंबर 2027 का पंचांग
गुरुवार · आश्विन अमावस्या
30 सितंबर 2027, गुरुवार को आश्विन अमावस्या है, सुबह 8:06 तक; उसके बाद प्रतिपदा। नक्षत्र हस्त है, 1 अक्टूबर, रात 2:12 तक। सूर्योदय सुबह 6:13 और सूर्यास्त शाम 6:09। राहु काल दोपहर 1:41 से दोपहर 3:10 तक है। इस दिन नवरात्रि आरंभ है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
30 सितंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- आश्विन अमावस्यासुबह 8:06 तक, फिर प्रतिपदा
- नक्षत्र
- हस्त1 अक्टूबर, रात 2:12 तक, फिर चित्रा
- योग
- ब्रह्मरात 9:09 तक, फिर ऐंद्र
- करण
- नागसुबह 8:06 तक
- वार
- गुरुवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- आश्विन (पूर्णिमांत)भाद्रपद (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- कन्यासूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कन्या
- सूर्योदय
- सुबह 6:13
- सूर्यास्त
- शाम 6:09
- चंद्रोदय
- सुबह 6:15
- चंद्रास्त
- शाम 6:04
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:37 से सुबह 5:25 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:47 से दोपहर 12:35 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:10 से दोपहर 2:58 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 1:41 से दोपहर 3:10 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 6:13 से सुबह 7:43 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 9:12 से सुबह 10:42 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। सितंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
हनुमान चालीसा
अवधी · उनतालीस में से एक
चालीस चौपाइयों की वह छोटी रचना जो रोज़ पढ़ी जाती है। उसमें इस पूरी रात की बातें गिनी चुनी पंक्तियों में याद कर ली गई हैं, और बहुत से लोग इस रात को इन्हीं पंक्तियों से जानते हैं।
