आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · भाद्रपद
6 सितंबर 2027 का पंचांग
सोमवार · भाद्रपद शुक्ल षष्ठी
6 सितंबर 2027, सोमवार को भाद्रपद शुक्ल षष्ठी है, सुबह 10:58 तक; उसके बाद सप्तमी। नक्षत्र विशाखा है, दोपहर 2:59 तक। सूर्योदय सुबह 6:02 और सूर्यास्त शाम 6:37। राहु काल सुबह 7:36 से सुबह 9:10 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
6 सितंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- भाद्रपद शुक्ल षष्ठीसुबह 10:58 तक, फिर सप्तमी
- नक्षत्र
- विशाखादोपहर 2:59 तक, फिर अनुराधा
- योग
- वैधृति7 सितंबर, रात 3:49 तक, फिर विष्कंभ
- करण
- तैतिलसुबह 10:58 तक
- वार
- सोमवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- भाद्रपद (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- तुलासूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- सिंह
- सूर्योदय
- सुबह 6:02
- सूर्यास्त
- शाम 6:37
- चंद्रोदय
- सुबह 11:47
- चंद्रास्त
- रात 10:12
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:26 से सुबह 5:14 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:54 से दोपहर 12:45 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:25 से दोपहर 3:16 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 7:36 से सुबह 9:10 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 10:45 से दोपहर 12:19 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 1:54 से दोपहर 3:28 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। सितंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
मोल्ला रामायणम्
तेलुगु · उनतालीस में से एक
तेलुगु की वह रामकथा जिसे सोलहवीं सदी में मोल्ला ने रचा, एक कुम्हार की बेटी ने। उनके पीछे कोई बड़ा घराना नहीं था, और वे अपनी कविता को अपनी कमाई नहीं, देन मानती हैं। यह तेलुगु की पहली संक्षेप रामकथा मानी जाती है।