आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · श्रावण
15 अगस्त 2027 का पंचांग
रविवार · श्रावण शुक्ल त्रयोदशी
15 अगस्त 2027, रविवार को श्रावण शुक्ल त्रयोदशी है, सुबह 7:54 तक; उसके बाद चतुर्दशी। नक्षत्र उत्तराषाढ़ा है, रात 8:28 तक। सूर्योदय सुबह 5:50 और सूर्यास्त शाम 7:01। राहु काल शाम 5:22 से शाम 7:01 तक है। इस दिन स्वतंत्रता दिवस, मिलाद उन नबी है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
15 अगस्त 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- श्रावण शुक्ल त्रयोदशीसुबह 7:54 तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ारात 8:28 तक, फिर श्रवण
- योग
- आयुष्मानरात 11:37 तक, फिर सौभाग्य
- करण
- तैतिलसुबह 7:54 तक
- वार
- रविवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- श्रावण (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मकरसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कर्क
- सूर्योदय
- सुबह 5:50
- सूर्यास्त
- शाम 7:01
- चंद्रोदय
- शाम 5:55
- चंद्रास्त
- रात 3:50
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:14 से सुबह 5:02 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:59 से दोपहर 12:52 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:37 से दोपहर 3:30 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- शाम 5:22 से शाम 7:01 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 12:26 से दोपहर 2:04 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 3:43 से शाम 5:22 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। अगस्त 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
कृत्तिवासी रामायण
बांग्ला · उनतालीस में से एक
बांग्ला की वह रामकथा जो पयार छंद में, गाकर सुनाने के लिए लिखी गई। परंपरा कहती है कि गौड़ के एक राजा के कहने पर। यहाँ लंका की रक्षक लंकिनी नहीं, देवी चामुंडा हैं, जो हनुमान का नाम सुनते ही बिना लड़े कैलाश चली जाती हैं।