आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · ज्येष्ठ
29 मई 2027 का पंचांग
शनिवार · ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी
29 मई 2027, शनिवार को ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी है, सुबह 8:21 तक; उसके बाद नवमी। नक्षत्र शतभिषा है, सुबह 9:43 तक। सूर्योदय सुबह 5:25 और सूर्यास्त शाम 7:13। राहु काल सुबह 8:52 से सुबह 10:35 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
29 मई 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमीसुबह 8:21 तक, फिर नवमी
- नक्षत्र
- शतभिषासुबह 9:43 तक, फिर पूर्वा भाद्रपद
- योग
- विष्कंभ30 मई, रात 3:43 तक, फिर प्रीति
- करण
- कौलवसुबह 8:21 तक
- वार
- शनिवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)वैशाख (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- कुंभसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- वृषभ
- सूर्योदय
- सुबह 5:25
- सूर्यास्त
- शाम 7:13
- चंद्रोदय
- रात 12:52
- चंद्रास्त
- दोपहर 12:51
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- रात 3:49 से सुबह 4:37 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:51 से दोपहर 12:46 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:37 से दोपहर 3:32 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 8:52 से सुबह 10:35 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 2:02 से दोपहर 3:46 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 5:25 से सुबह 7:08 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। मई 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
कृत्तिवासी रामायण
बांग्ला · उनतालीस में से एक
बांग्ला की वह रामकथा जो पयार छंद में, गाकर सुनाने के लिए लिखी गई। परंपरा कहती है कि गौड़ के एक राजा के कहने पर। यहाँ लंका की रक्षक लंकिनी नहीं, देवी चामुंडा हैं, जो हनुमान का नाम सुनते ही बिना लड़े कैलाश चली जाती हैं।