आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · ज्येष्ठ
21 मई 2027 का पंचांग
शुक्रवार · ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा
21 मई 2027, शुक्रवार को ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा है, शाम 5:24 तक; उसके बाद द्वितीया। नक्षत्र अनुराधा है, दोपहर 2:51 तक। सूर्योदय सुबह 5:28 और सूर्यास्त शाम 7:08। राहु काल सुबह 10:35 से दोपहर 12:18 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
21 मई 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदाशाम 5:24 तक, फिर द्वितीया
- नक्षत्र
- अनुराधादोपहर 2:51 तक, फिर ज्येष्ठा
- योग
- शिवरात 10:15 तक, फिर सिद्ध
- करण
- कौलवशाम 5:24 तक
- वार
- शुक्रवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)वैशाख (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- वृश्चिकसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- वृषभ
- सूर्योदय
- सुबह 5:28
- सूर्यास्त
- शाम 7:08
- चंद्रोदय
- रात 8:17
- चंद्रास्त
- सुबह 5:39
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- रात 3:52 से सुबह 4:40 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:51 से दोपहर 12:45 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:35 से दोपहर 3:29 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 10:35 से दोपहर 12:18 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 3:43 से शाम 5:26 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 7:10 से सुबह 8:53 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। मई 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
ककविन रामायण
पुरानी जावानी · उनतालीस में से एक
जावा की सबसे पुरानी रामकथा, नौवीं सदी के अंत में मध्य जावा में लिखी गई, छब्बीस सर्गों की। यह वाल्मीकि से नहीं, भट्टिकाव्य नाम की संस्कृत रचना से ली गई है, और लगभग दो तिहाई उसी के पास चलती है, फिर अपने रास्ते। पूर्वी जावा के पनातरन मंदिर की दीवारों पर इसी कथा के दृश्य खुदे हैं।