आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · वैशाख
8 मई 2027 का पंचांग
शनिवार · वैशाख शुक्ल द्वितीया
8 मई 2027, शनिवार को वैशाख शुक्ल द्वितीया है, सुबह 11:43 तक; उसके बाद तृतीया। नक्षत्र रोहिणी है, रात 9:53 तक। सूर्योदय सुबह 5:35 और सूर्यास्त शाम 7:00। राहु काल सुबह 8:57 से सुबह 10:37 तक है। इस दिन परशुराम जयंती है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
8 मई 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- वैशाख शुक्ल द्वितीयासुबह 11:43 तक, फिर तृतीया
- नक्षत्र
- रोहिणीरात 9:53 तक, फिर मृगशिरा
- योग
- शोभनसुबह 5:52 तक, फिर अतिगंड
- करण
- कौलवसुबह 11:43 तक
- वार
- शनिवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- वैशाख (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- वृषभसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मेष
- सूर्योदय
- सुबह 5:35
- सूर्यास्त
- शाम 7:00
- चंद्रोदय
- सुबह 6:40
- चंद्रास्त
- रात 9:23
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- रात 3:59 से सुबह 4:47 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:51 से दोपहर 12:45 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:32 से दोपहर 3:26 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 8:57 से सुबह 10:37 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 1:58 से दोपहर 3:39 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 5:35 से सुबह 7:16 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। मई 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
फ़ोन पर Google का पन्ना ठीक से न खुले, तो यही बटन कंप्यूटर पर दबाइए। जुड़ते ही यह फ़ोन में भी दिखेगा।
जोड़ते समय “Remove Alerts” बंद कर दें (टिक हटा दें), तो बड़े त्योहारों की सुबह 7 बजे याद भी आएगी कि अपनों को कार्ड भेजना है।
- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल
इस दिन की रामकथा
रामायण कल्पवृक्षम्
तेलुगु · उनतालीस में से एक
तेलुगु की वह रामकथा जिसे विश्वनाथ सत्यनारायण ने बीसवीं सदी में रचा और जिसका नाम है रामायण कल्पवृक्षम्। यह उस समय लिखी गई जब लोग कह रहे थे कि अब पुरानी कथाओं का ज़माना गया। कवि ने वही कथा दोबारा कही, अपने ढंग से, और उसी पर उन्हें ज्ञानपीठ मिला। यह बताता है कि यह कथा किसी पुरानी सदी में बंद नहीं हुई।
