आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · वैशाख
4 मई 2027 का पंचांग
मंगलवार · वैशाख कृष्ण त्रयोदशी
4 मई 2027, मंगलवार को वैशाख कृष्ण त्रयोदशी है, रात 7:31 तक; उसके बाद चतुर्दशी। नक्षत्र रेवती है, 5 मई, रात 3:15 तक। सूर्योदय सुबह 5:38 और सूर्यास्त शाम 6:58। राहु काल दोपहर 3:38 से शाम 5:18 तक है। इस दिन मासिक शिवरात्रि है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
4 मई 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- वैशाख कृष्ण त्रयोदशीरात 7:31 तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- रेवती5 मई, रात 3:15 तक, फिर अश्विनी
- योग
- विष्कंभशाम 4:14 तक, फिर प्रीति
- करण
- गरसुबह 7:54 तक
- वार
- मंगलवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- वैशाख (पूर्णिमांत)चैत्र (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मीनसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मेष
- सूर्योदय
- सुबह 5:38
- सूर्यास्त
- शाम 6:58
- चंद्रोदय
- रात 3:52
- चंद्रास्त
- शाम 4:58
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:02 से सुबह 4:50 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:52 से दोपहर 12:45 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:31 से दोपहर 3:25 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 3:38 से शाम 5:18 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 8:58 से सुबह 10:38 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 12:18 से दोपहर 1:58 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। मई 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामचरितम्
पुराना मलयालम · उनतालीस में से एक
मलयालम की सबसे पुरानी बची हुई काव्य रचना, जिसे चीरामन ने लगभग बारहवीं सदी में रचा। इसमें कथा शुरू से नहीं चलती, सीधे लड़ाई वाले हिस्से से उठती है। यानी उस भाषा की शुरुआत ही लड़ाई वाले कांड से हुई, और भाषा भी ऐसी है जिसमें मलयालम और तमिल दोनों की छाया दिखती है।