आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · फाल्गुन
25 फ़रवरी 2027 का पंचांग
गुरुवार · फाल्गुन कृष्ण पंचमी
25 फ़रवरी 2027, गुरुवार को फाल्गुन कृष्ण पंचमी है, रात 8:18 तक; उसके बाद षष्ठी। नक्षत्र चित्रा है, सुबह 9:33 तक। सूर्योदय सुबह 6:51 और सूर्यास्त शाम 6:18। राहु काल दोपहर 2:00 से दोपहर 3:26 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
25 फ़रवरी 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- फाल्गुन कृष्ण पंचमीरात 8:18 तक, फिर षष्ठी
- नक्षत्र
- चित्रासुबह 9:33 तक, फिर स्वाती
- योग
- वृद्धिरात 11:04 तक, फिर ध्रुव
- करण
- कौलवसुबह 8:23 तक
- वार
- गुरुवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- फाल्गुन (पूर्णिमांत)माघ (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- तुलासूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कुंभ
- सूर्योदय
- सुबह 6:51
- सूर्यास्त
- शाम 6:18
- चंद्रोदय
- रात 11:00
- चंद्रास्त
- सुबह 9:12
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:15 से सुबह 6:03 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:12 से दोपहर 12:57 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:29 से दोपहर 3:15 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 2:00 से दोपहर 3:26 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 6:51 से सुबह 8:17 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 9:43 से सुबह 11:09 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। फ़रवरी 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामावतारचरित
कश्मीरी · उनतालीस में से एक
कश्मीरी की रामकथा, रामावतारचरित, जिसे प्रकाश राम ने उन्नीसवीं सदी में रचा। यहाँ सीता रावण और मंदोदरी की बेटी हैं, जिन्हें जन्म के बाद छोड़ दिया गया। रावण और लंका के बनने की कथा सुंदरकांड के भीतर आती है, और पूरी कथा में कश्मीर का खाना, कपड़े और रीति रिवाज भरे हैं।